राजू गिरफ़्तार, सत्यम का बोर्ड भंग

सत्यम कंप्यूटर्स के पूर्व चेयरमैन रामलिंगा राजू को आंध्रप्रदेश की पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है. उधर सरकार ने सत्यम के बोर्ड को भंग कर दिया है.
इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया है. उनके साथ उनके भाई रामा रामजू को भी गिरफ़्तार किया गया है. संभावना है कि उन्हें शनिवार को अदालत में पेश किया जाएगा.
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन परिस्थितियों में शनिवार को रामालिंगा राजू भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के सामने प्रस्तुत हो सकेंगे या नहीं.
इस बीच सरकार ने सत्यम के बोर्ड को भंग करते हुए उसमें सरकार की ओर से 10 निदेशक नियुक्त करने का निर्णय लिया है और पहले से तय बोर्ड की शनिवार को होने वाली बैठक को फ़िलहाल टाल दिया गया है.
उल्लेखनीय है कि बुधवार को बी रामालिंगा राजू ने कंपनी के खाते में 7800 करोड़ का घपला करने की बात स्वीकार करते हुए अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.
अग्रणी सॉफ़्टवेयर कंपनी सत्यम कंप्यूटर के इस घोटाले के उजागर होने के बाद भारत और दुनिया भर के निवेशकों के बीच अफ़रातफ़री मच गई है.
सरकार ने इस पूरे घोटाले की जाँच की बात कही है और इसकी शुरुआत भी की जा चुकी है.
मामला दर्ज
शुक्रवार को आंध्र सरकार ने इस मामले की जाँच के आदेश जारी कर दिए थे और इसके बाद सीआईडी की अपराध शाखा ने ख़ुद ही आर्थिक अपराध का एक मामला दर्ज कर लिया था.
सत्यम का वर्तमान बोर्ड अब अस्तित्व में नहीं है और शनिवार को होने वाली बैठक अब नहीं होगी प्रेमचंद गुप्ता, कंपनी मामलों के मंत्री
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इसके बाद शुक्रवार की रात बी रामालिंगा राजू ने आंध्र प्रदेश के पुलिस महानिदेशक एसएसपी यादव के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है.
पुलिस ने उन्हें और उनके भाई रामा रामजू को गिरफ़्तार कर लिया है और उनके ख़िलाफ़ आपराधिक षडयंत्र, धोखाधड़ी और घपले का मामला दर्ज किया है.
संभावना है कि दोनों भाइयों को शनिवार को अदालत में पेश किया जाएगा.
इससे पहले सत्यम कंप्यूटर्स में वित्तीय अनियमितताओं की जाँच कर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कंपनी के पूर्व चेयरमैन बी रामलिंगा राजू को पूछताछ के लिए बुलाया था लेकिन वे पेश नहीं हुए.
राजू के वकील भरत कुमार ने पत्रकारों को बताया कि सेबी ने शुक्रवार शाम चार बजे पेश होने के लिए समन जारी किया था लेकिन ख़राब स्वास्थ्य के कारण राजू सेबी अधिकारियों के सामने पेश नहीं हो पाए.
इस बीच ये चर्चा होने लगी थीं कि रामालिंगा राजू देश छोड़कर चले गए हैं लेकिन उनके वकील ने स्पष्ट किया था कि राजू हैदराबाद में ही हैं और देश छोड़कर उनके भागने की ख़बर ग़लत है.
राजू की गिरफ़्तारी के बाद यह स्पष्ट नहीं है कि अब राजू शनिवार को सेबी के अधिकारियों के समक्ष पेश हो सकेंगे या नहीं.
बोर्ड में निदेशकों की नियुक्ति
मैनमपट्टी राम को अंतरिम मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया है
इस बीच सरकार ने सत्यम के वर्तमान बोर्ड को भंग करके इसमें सरकार की ओर से दस लोगों को मनोनीत करने की घोषणा की है.
इसके साथ ही शनिवार, 10 जनवरी को होने वाली बोर्ड की बैठक भी टाल दी गई है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार भारत के कंपनी मामलों के मंत्री प्रेमचंद गुप्ता ने कहा है, "सत्यम का वर्तमान बोर्ड अब अस्तित्व में नहीं है और शनिवार को होने वाली बैठक अब नहीं होगी."
उनका कहना था कि कंपनी लॉ बोर्ड की सलाह से सरकार उपयुक्त लोगों को सत्यम के बोर्ड में मनोनीत करेगी. सरकार ने सत्यम के बोर्ड से नौ में से छह लोगों को अलग कर दिया है. कंपनी मामलों के मंत्री के अनुसार अब बोर्ड की बैठक अगले सात दिनों में होगी.
उन्होंने स्पष्ट किया है कि नया बोर्ड ही सत्यम के नए प्रबंधन के बारे में निर्णय लेगा और सरकार ने प्रबंधन अपने हाथ में लेने का कोई फ़ैसला फ़िलहाल नहीं किया है.
कर्मचारी संकट में
सत्यम का सच उजागर होने के बाद शेयर बाज़ार को तगड़ा झटका लगा है. ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि कंपनी वित्तीय मुश्किलों और नक़दी संकट के कारण 10 हज़ार कर्मचारियों को निकाल सकती है.
एक दिन पहले ही कंपनी के अंतरिम मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मैनमपट्टी राम ने बताया था कि कंपनी में नक़दी का संकट है.
उन्होंने यह भी कहा था कि दिसंबर में कर्मचारियों के वेतन तो दे दिए गए हैं लेकिन उन्हें भरोसा नहीं है कि इस महीने का वेतन कैसे दिया जाएगा.
वेतन पर सत्यम का ख़र्चा 500 करोड़ रुपए हैं. ख़बर ये भी मिल रही है कि सत्यम की हालत देखते हुए कंपनी के क़रीब 14 हज़ार कर्मचारियों ने नई नौकरी की तलाश के लिए विभिन्न वेबसाइटों को अपना बॉयोडेटा भेजा है.
लेकिन सबसे ज़्यादा मुश्किल में हैं प्रशिक्षु कर्मचारी, जिन्होंने दो लाख रुपए गारंटी राशि के तौर पर जमा कराया है. सूत्रों का कहना है कि सत्यम ने पिछले दो वर्षों के दौरान ऐसे प्रशिक्षु कर्मचारियों से 140 करोड़ रुपए की राशि जमा की थी.
अब जबकि कंपनी वित्तीय संकट का सामना कर रही है, ऐसी स्थिति में कर्मचारियों को भरोसा नहीं कि उनकी गारंटी राशि वापस मिलेगी या नहीं.


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