भारतीय पुजारियों को हटाने का फ़ैसला वापस

हिंदू संगठनों और राजनीतिक दलों के भारी दबाव के बीच नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर से भारतीय पुजारियों को हटाने का फ़ैसला वापस ले लिया गया है.
नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल उर्फ़ प्रचंड ने वहाँ की संसद को संबोधित करते हुए ये जानकारी दी. उनके बयान का नेपाली टेलीविज़न पर सीधा प्रसारण किया गया.
इससे पहले माओवादियों की अगुआई वाली सरकार ने प्रतिष्ठित पशुपतिनाथ मंदिर में पूजा अर्चना का काम नेपाल के ब्राह्मणों से कराने का फ़ैसला किया था जिसका भारी विरोध हुआ.
मैंने नए पुजारियों की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है और भारतीय पुजारियों से धार्मिक क्रियाकलाप जारी रखने की अपील की है प्रचंड
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ग़ौरतलब है कि इस मंदिर में परंपरागत तौर पर दक्षिण भारतीय ब्राह्मण ही पूजा पाठ कराते आए हैं.
प्रचंड ने बताया कि भारतीय पुजारियों की जगह जिन दो स्थानीय पुजारियों की नियुक्ति का आदेश दिया गया था, उसे रद्द कर दिया गया है.
उन्होंने बताया कि पशुपति एरिया डेवलपमेंट ट्रस्ट को नए पुजारियों की नियुक्ति प्रतिभा के आधार पर करने की सलाह दी गई है.
प्रचंड का कहना था, "मैंने नए पुजारियों की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है और भारतीय पुजारियों से धार्मिक क्रियाकलाप जारी रखने की अपील की है."
दबाव
नेपाली प्रधानमंत्री पर अपना फ़ैसला बदलने का भारी दबाव था. दरअसल नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने भी भारतीय पुजारियों से ही पूजा कराने का आदेश दिया था.
लेकिन सरकार ने इस फ़ैसले को मानने से इनकार कर दिया और माओवादी समर्थक कुछ लोग सरकारी फ़ैसले के समर्थन में मंदिर में घुस गए थे.
मंदिर में झड़पें भी हुईं जिनमें कुछ लोग घायल हुए थे. भारत में भी इस घटना की गूँज सुनाई दी और भारतीय जनता पार्टी के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने ख़ुद प्रचंड से बातचीत की.
प्रचंड ने आडवाणी को आश्वासन दिया कि नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर के मामले पर यथास्थिति वापस बहाल करने के बारे में जल्दी ही घोषणा की जाएगी.
इस बातचीत में प्रचंड ने भरोसा दिलाया था कि वो मंदिर के मामले में यथास्थिति वापस बहाल करने के लिए जल्दी ही घोषणा करेंगे.


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