रामालिंगा राजू : आंध्र के गर्व से शर्म तक

ramalinga raju
हैदराबाद, 7 जनवरी: सत्यम आंध्रप्रदेश की ब्रांड इमेज बन गई थी और हैदराबाद को कंपनी के नाम के साथ ही पहचाना जाता था। युवाओं के बीच सत्यम और उसके अध्यक्ष बी.रामालिंगा राजू एक नायक बन गऐ थे। परंतु आज उनकी कंपनी समाप्त होने के कगार पर है।

करीब दो दशकों की मेहनत के बाद सत्यम को देश की चौथी सबसे बड़ी कंपनी बनाने वाले राजू को 40 अरब रुपये की धोखाधड़ी स्वीकार करने के बाद अब निवेशक जेल की सलाखों के पीछे देखना चाहते हैं।

राजू का जन्म तटीय आंध्रप्रदेश के पश्चिमी गोदावरी जिले के गर्गापारु गांव में एक किसान बी.सत्यनारायण राजू के यहां 16 सितम्बर 1954 को हुआ था। सत्यनारायण राजू 1960 में हैदराबाद चले आए।

रामालिंगा राजू ने अपनी बी.काम की उपाधि विजयवाड़ा के आंध्र लायोला कालेज से हासिल की। एमबीए की उपाधि उन्होंने 1975 में अमेरिका के ओहियो विश्वविद्यालय से हासिल की। वे हावर्ड बिजनेस स्कूल के भी विद्यार्थी रहे।

आईटी उद्योग में हाथ अजमाने से पहले उन्होंने निर्माण और वस्त्र उद्योग में काम किया।

केवल 20 कर्मचारियों के साथ 1987 में सत्यम की शुरुआत करने वाले राजू ने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1989 में सत्यम लिमिटेड कंपनी और 1992 में पब्लिक लिमिटेड कंपनी बनी। कंपनी ने वर्ष 2001 में न्यूयार्क स्टाक एक्सचेंज में कारोबार आरंभ किया।

राजू के परिवार में उनकी पत्नी नंदिनी, दो पुत्र तथा एक पुत्री है। उनके पुत्र तेजा बी.राजू और रामा बी.राजू मेटास इंफ्रास्ट्रक्चर और मेटास प्रापर्टीज नामक कंपनियां चलाते हैं।

मितभाषी राजू को उनकी नेतृत्व क्षमता और दूरदर्शिता के कारण कई पुरस्कारों से भी नवाजा गया। परंतु कल तक जो व्यक्ति तेलुगू गौरव माना जाता था, आज वही लोगों के क्रोध के निशाने पर है।

करीब 40 अरब रुपये की धोखाधड़ी की स्वीकारोक्ति करने वाले सत्यम के संस्थापक बी.रामालिंगा राजू को वर्ष 2007 का सर्वश्रेष्ठ युवा उद्यमी का सम्मान मिला था और कंपनी को वर्ल्ड काउंसिल फॉर कारपोरेट गर्वनेंस ने सर्वश्रेष्ठ कारपोरट गर्वनेंस के लिए स्वर्ण मयूर पुरस्कार से सम्मानित किया था।

कंपनी की स्थापना 24 जून 1987 को हुई। सितम्बर 2008 तक इसके 52,865 कर्मचारी हैं।

1991 में सत्यम ने बंबई स्टाक एक्सचेंज में कदम रखा और इसके आईपीओ के लिए 17 गुना लोगों ने आवेदन दिया था। 1999 में नैस्डेक में सूचीबद्ध होने वाली सत्यम पहली भारतीय इंटरनेट कंपनी थी। 2001 में सत्यम ने न्यूयार्क स्टाक एक्सचेंज में कदम रखा।

वर्ष 2006 में सत्यम का राजस्व बढ़कर एक अरब डॉलर हो गया। इसने सिंगापुर में इन्नोवेशन और चीन के गुआंगझाउ में संचालन केंद्र स्थापित किया।

वर्ष 2007 में सत्यम फीफा फुटबाल विश्व कप 2010 (दक्षिण अफ्रीका) और विश्व कप 2014 (ब्राजील) के लिए आधिकारिक आईटी सेवा प्रदाता कंपनी बनी। राजू को वर्ष के सर्वश्रेष्ठ युवा उद्यमी का पुरस्कार मिला।

वर्ष 2008 में कंपनी का राजस्व बढ़कर दो अरब डॉलर हो गया।

16 दिसम्बर 2008 : सत्यम ने मायटास कंपनी को खरीदने की घोषणा की। इसके कुछ समय बाद ही शेयर धारकों ने इस निर्णय की मुखालफत आरंभ कर दी। शेयरों के दामों में गिरावट।

18 दिसम्बर: बोर्ड बैठक की घोषणा

29 दिसम्बर: बाजार में शेयरों के दाम गिरने से उनकी पुनर्खरीद पर विचार

23 दिसम्बर : विश्व बैंक ने अधिकारियों को घूस देने और आंकड़ें चुराने के कारण सत्यम को आठ वर्ष के लिए काली सूची में डालने की पुष्टि की।

26 दिसम्बर: एक स्वतंत्र निदेशक मंगलम श्रीनिवासन ने कंपनी छोड़ी। इसके बाद 29 दिसम्बर को तीन और निदेशकों ने पद छोड़ा।

2 जनवरी 2009: संस्थापक प्रमोटरों के शेयर 8.64 प्रतिशत से घटकर 5.13 प्रतिशत हुए। छह जनवरी को प्रमोटरों के शेयरों में और कमी हुई।

7 जनवरी : रामालिंगा राजू ने धोखाधड़ी कबूलते हुए अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया।

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