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बी रामालिंगा राजू : श्री सत्यम से सत्यम तक

By Staff
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बी रामालिंगा राजू : श्री सत्यम से सत्यम तक

सत्यम दक्षिण भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद में स्थापित होने वाली पहली कंपनी थी.

अपनी स्थापना के कुछ समय बाद ही सत्यम सॉफ़्टवेयर क्षेत्र की देश की चार बड़ी कंपनियों में से एक बन गई.

इसने साठ हज़ार लोगों को रोजगार दिया.

किसान का बेटा

आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी ज़िले के रहने वाले बी रामालिंगा राजू के पिता सत्यानारायण राजू अंगूर की खेती करते थे.

मृदुभाषी और विनम्र व्यवहार वाले राजू ने अमरीका के ओहायो विश्विविद्यालय से एमबीए करने के बाद श्री सत्यम के नाम से एक स्पिनिंग (धागा) मिल की स्थापना की. राजू के पिता का घरेलू का नाम भी सत्यम था.

साल 1987 के शुरुआत में जब कंप्यूटर और सॉफ़्टवेयर जैसे शब्दों से लोग बहुत परिचित नहीं थे, उस समय राजू ने इस क्षेत्र में क़दम रखा और सत्यम कंसट्रक्शन के नाम से एक कंपनी बनाई.

अपने स्पीनिंग मिल में उन्होंने सॉफ़्टवेयर की प्रयोगशाला बनाई. जहाँ वे बैठकर अपनी कल्पनाओं पर विचार करते थे और उन्हें 'ट्रायल एंड एरर' की प्रक्रिया से गुजारते थे लेकिन उन्हें इसका अनुभव बहुत बुरा रहा.

बाद में राजू को अपने साले डीवीएस राजू का साथ मिला. इसके बाद उनकी कंपनी को सफलता मिलने लगी.

कंपनी के प्रंबंधन और पूँजी के सवाल पर दोनों में विवाद बढ़ने पर कंपनी का विभाजन हो गया.

सत्यम ने पिछले 22 वर्षों में काफ़ी प्रगति की और सॉफ़्टवेयर बनाने वाली दुनिया की प्रमुख कंपनियों में से एक बन गई. सत्यम बीपीओ और जीवन विज्ञान के क्षेत्र में भी सक्रिय है.

वैश्विक व्यापार

दुनिया के 35 देशों की क़रीब तीन सौ कंपनियों के लिए सत्यम काम करती है. इसके कुछ सेंटर अमरीका में भी हैं. जहाँ क़रीब आठ सौ लोग काम करते हैं.

सत्यम ने जापान, सिंगापुर और ब्रिटेन में सॉफ़्टवेयर विकास केंद्र भी खोल रखे हैं.

कंपनी ने रियल इस्टेट के क्षेत्र में क़दम रखते हुए हैदराबाद के भादुरापल्ली गाँव में करोड़ों डालर के निवेश से 120 एकड़ क्षेत्र में एक तकनीकी विकास केंद्र की स्थापना की है.

बी राजूलिंगा का अपने गृह राज्य आंध्रप्रदेश में ख़ासा रुतबा है. उनके रुतबे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मार्च 2000 में जब अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने हैदराबाद का दौरा किया था तो राजू मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के साथ मंच पर बैठे थे.

बी रामालिंगा राजू के कंपनी के मुनाफ़े में 'फ़र्ज़ीवाड़ा' स्वीकार करने के बाद से सत्यम को काफ़ी नुक़सान का सामना करना पड़ा है.

विश्व बैंक ने हाल ही में कंपनी के साथ आठ साल का करार ख़त्म कर लिया है. वहीं कंपनी छोड़कर कर्मचारियों और निदेशकों के जाने का सिलसिला शुरू हो गया है.

बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर से चार लोगों ने इस्तीफ़ा दे दिया है. वहीं मंगलवार को कंपनी के 120 कर्मचारी नौकरी छोड़कर चले गए.

अब रामालिंगा राजू क़ानूनी कार्रवाइयों का सामना करेंगे और उनकी कंपनी को फिर से खड़ा होने के लिए लंबी जद्दोजहद करनी पड़ेगी.

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