आतंकवाद के मुद्दे पर मुख्यमंत्रियों की बैठक

आतंकवाद, ख़ुफ़िया जानकारियों के आदान-प्रदान और सीमा सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दे पर दिल्ली में मंगलवार को मुख्यमंत्रियों की एक अहम बैठक हो रही है.
मुख्यमंत्रियों की इस बैठक की अध्यक्षता भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कर रहे हैं.
बताया जा रहा है कि इस बैठक में चरमपंथ से लड़ने की रणनीति, ख़ुफिया जानकारी के आदान-प्रदान की व्यवस्था को मज़बूत करने, सीमा और तटीय सीमाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बातचीत होनी है.
इसके अलावा उन विशेष इमारतों, भवनों, उपक्रमों की सुरक्षा पर भी विशेष रूप से चर्चा होनी है जो कि सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील हैं. इनमें परमाणु संयंत्रों को भी शामिल करके देखा जा रहा है.
यह पहला मौका होगा जब गृहमंत्री का नया पदभार संभालने के बाद पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम सुरक्षा के मुद्दे पर इस स्तर की कोई बैठक कर रहे होंगे.
आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि गृहमंत्री बैठक में मुख्यमंत्रियों के साथ चरमपंथ और सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर बातचीत करेंगे और उनके विचार, सुझाव भी लेंगे.
अहम मुद्दे
ग़ौरतलब है कि 26 नवंबर को मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों के बाद से सुरक्षा को लेकर भारत सरकार ने गंभीर रुख अख़्तियार किया है.
दिल्ली में हो रही इस बैठक को कई मायनों में अहम माना जा रहा है
मुंबई हमलों के बाद देश की आंतरिक सुरक्षा और खुफ़िया तंत्र के कामकाज के तरीके पर भी बहुत सवाल उठाए गए थे. इसके चलते ही हमलों के बाद नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए तत्कालीन गृहमंत्री शिवराज पाटिल को इस्तीफ़ा देना पड़ा था.
ऐसे में वर्तमान गृहमंत्री सुरक्षा और चरमपंथ से लड़ने की तैयारियों को ज़्यादा गंभीरता से देख भी रहे हैं.
माना जा रहा है कि मंगलवार की बैठक के दौरान पुलिस विभागों में रिक्त पदों को तत्काल भरने, सूचनाओं के आदान-प्रदान की व्यवस्था को चुस्त करने और सभी राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों में कमांडो यूनिटों को खड़ा करने के मुद्दों पर फ़ैसले लिए जा सकते हैं.
पर सबसे अहम चर्चा हो सकती है हाल ही में भारतीय संसद में पारित एक राष्ट्रीय खुफ़िया एजेंसी बनाने के प्रस्ताव पर. गृहमंत्रालय इस मुद्दे पर राज्यों के मुख्यमंत्रियों से तालमेल और इसे लागू करने के तरीके पर चर्चा कर सकता है.


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