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ग़ज़ा में अंदर तक पहुँची इसराइली सेना

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ग़ज़ा में अंदर तक पहुँची इसराइली सेना, लड़ाई जारी

ग़ज़ा पट्टी में जारी युद्ध को रोकने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के बावजूद इसराइली सेना की कड़ी ज़मीनी कार्रवाई जारी है और वे ग़ज़ा में अंदर तक पहुँच गई है.

इस बीच दुनियाभर में ग़ज़ा पर हमलों की निंदा हो रही है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस स्थिति का समाधान निकालने के प्रयास जारी हैं पर युद्ध रुकता नज़र नहीं आ रहा है.

इसराइली सेना ने ग़ज़ा को घेर लिया है. ग़ज़ा दो हिस्सों में बाँट दिया गया है. दक्षिणी ग़ज़ा की ओर जाने वाले रास्तों को इसराइली सेना ने ध्वस्त कर दिया है इसलिए लोग ज़मीनी कार्रवाई से सर्वाधिक प्रभावित उत्तरी इलाके से निकल भी नहीं पा रहे हैं.

ज़मीनी हमले के अलावा इसराइली वायु सेना और नौसेना भी कार्रवाई में जुटी हुई है. उधर इसराइल पर हमास के मिसाइल हमलों की भी ख़बरें रविवार तक आती रही हैं.

अब दक्षिणी इसराइली के खान यूनिस शहर की ओर 40 इसराइली टैंकों के मार्च के साथ ही वहाँ भी लड़ाई शुरू हो गई है. उत्तरी ग़ज़ा से मिल रही ख़बरों के मुताबिक इसराइली सेना ने उत्तरी ग़ज़ा को भी तीन हिस्सों में बाँटकर अपनी युद्ध की रणनीति लागू की है.

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक़ इसराइली सैनिकों और हमास चरमपंथियों के बीच गोलीबारी भी चल रही है. अस्पतालों में जगह नहीं ग़ज़ा पर ज़मीनी, हवाई और समुद्री रास्ते से इसराइली कार्रवाई चल रही है.

ग़ज़ा से मिल रही जानकारी के मुताबिक अस्पतालों में अब और लोगों को भर्ती कर पाने की जगह तक नहीं बची है. स्वास्थ्य सेवाओं को देख रहे अधिकारियों ने बताया है कि 500 से ज़्यादा लोगों की मौत अभी तक हुए हमलों में हो चुकी है.

इनमें बड़ी तादाद आम लोगों की है जिसमें औरतें और बच्चे भी शामिल हैं. एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि एक स्कूल और मुख्य बाज़ार में हुई इसराइली गोलाबारी में बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे गए हैं.

बताया जा रहा है कि अस्पतालों की स्थिति तो ऐसी हो चुकी है कि वहाँ फर्श पर भी घायलों को रखकर उपचार दे पाने की स्थिति नहीं बची है. बिजली और टेलीफ़ोन सेवाओं के पूरी तरह से ठप्प होने के बाद अब पेयजल का भी संकट ग़ज़ा में पैदा हो गया है और लोगों को इससे काफी तकलीफ़ हो रही है.

कार्रवाई

दस दिन पहले शुरू हुई इसराइली सेना की कार्रवाई में अभी तक 500 से भी ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. रॉकेट हमले में चार इसराइली भी मारे गए हैं. इसराइली सैनिकों ने ग़ज़ा पट्टी को दो हिस्सों में बाँट दिया है

उधर मिस्र और जॉर्डन ने ग़ज़ा में इसराइली कार्रवाई की आलोचना की. मिस्र और जॉर्डन ही अरब में दो ऐसे देश हैं, जिनके साथ इसराइल ने शांति समझौता किया है.

मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के कार्यालय ने कहा है कि इसराइल को बिना किसी शर्त के अपनी कार्रवाई तुरंत रोकनी चाहिए. जबकि जॉर्डन के शाह अब्दुल्लाह ने भी तुरंत हमले रोकने की मांग की है. उन्होंने कहा है कि इन हमलों से इसराइल की सुरक्षा नहीं हो सकती है.

शाह अब्दुल्लाह ने कहा कि फ़लस्तीनियों के स्वतंत्र देश के गठन के अधिकार को मान्यता देने से ही इसराइल की सुरक्षा हो सकती है.

कूटनीतिक कोशिशें

ग़ज़ा में संघर्ष को रोकने के लिए यूरोपीय देशों ने केंद्रीय भूमिका में आने का फ़ैसला लिया है और इसी के मद्देनज़र फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सार्कोज़ी ने इस दिशा में प्रयास तेज़ कर दिए हैं. इसराइली हमलों का दुनियाभर में विरोध भी हो रहा है.

उनके साथ यूरोपीय संघ की एक उच्चस्तरीय टीम भी गठित की गई है. सार्कोज़ी इसी सिलसिले में इसराइल और वेस्ट बैंक जाने वाले हैं पर इससे पहले वो मिस्र के राष्ट्रपति मुबारक से भी मुलाक़ात करेंगे. उधर हमास भी मिस्र सरकार के निमंत्रण पर एक प्रतिनिधिमंडल को मिस्र के लिए रवाना करने का मन बना रहा है.

बीबीसी के कूटनीतिक मामलों के संवाददाता का कहना है कि इन तमाम प्रयासों के बीच जल्द ही किसी राहत की गुंजाइश कम ही नज़र आती है क्योंकि इसराइली सेना अपने लक्ष्य हासिल करने से पहले कार्रवाई रोकेगी, इसकी संभावना कम ही है.

बीबीसी टेलीविज़न को दिए एक इंटरव्यू में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन भी कह चुके हैं कि दोनों पक्षों की ओर से हमले रोकने की आवश्यकता है.

उन्होंने कहा कि इसके साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समर्थन से एक समझौते की भी आवश्यकता है, जिसके तहत ग़ज़ा में हथियारों की तस्करी पर रोक लगे.

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