क्यूबा में क्रांति की 50वीं वर्षगाँठ

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क्यूबा में क्रांति की 50वीं वर्षगाँठ मनाई जा रही है जब फ़िदेल कास्त्रो सत्ता में आए थे लेकिन आर्थिक संकट के कारण समारोह फ़ीका है.पचास वर्ष पहले पूर्व राष्ट्रपित फ़िदेल कास्त्रो बतिस्ता शासन को समाप्त कर सत्ता में आए थे.

क्यूबा के राष्ट्रपति राउल कास्त्रो समारोह की अगुआई कर रहे हैं. वे अपने बड़े भाई फिदेल कास्त्रो के बाद राष्ट्रपति बने हैं. फिदेल कास्त्रो ने अस्वस्थता के कारण सत्ता छोड़ी थी.

अमरीकी प्रतिबंध

राउल कास्त्रो ने अमरीकी प्रतिबंध से लोहा लेने के लिए देश वासियों की तारिफ़ की, लेकिन ज़ोर देकर कहा कि देश ने बुरे समय का सामना किया है.

क्रांति की 50वीं वर्षगाँठ का समारोह छोटे स्तर पर हो रहा है क्योंकि हाल ही में क्यूबा में तीन विनाशकारी तूफ़ान आए थे और आर्थिक मंदी का असर भी वहाँ देखा जा रहा है.

फ़िदेल कास्त्रो की ख़राब सेहत के कारण भी समारोह फ़ीका है. 18 महीने पहले हुई सर्जरी के बाद से 82 वर्षीय फ़िदेल कास्त्रो को सार्वजनिक मंच पर नहीं देखा गया है.

सरकारी टेलीवीज़न पर उनका पहले से रिकॉर्ड किया गया संदेश भी नहीं दिया गया है.पचास साल पहले अमरीका समर्थक तानाशाह बतिस्ता क्यूबा से भाग गए थे और फ़िदेल कास्त्रो ने सत्ता पर क़ब्ज़ा जमाया था.

क्रांति

पिछले दो वर्षों से 82 वर्षीय फ़िदेल कास्त्रो को सार्वजनिक मंच पर नहीं देखा गया है

आज पृष्ठभूमि में रहते हुए भी फ़िदेल कास्त्रो क्यूबा में बड़ी हस्ती हैं. राउल कास्त्रो ने एक साल में कई सुधार लागू किए हैं लेकिन संवाददाताओं के मुताबिक क्यूबा में कई लोगों का मानना है कि जब तक फ़िदेल कास्त्रो ज़िंदा है तब तक कोई भी अर्थपूर्ण राजनीतिक या आर्थिक बदलाव नहीं आ सकता.

फिदेल कास्त्रो को अमरीका विरोधी रुख़ के लिए दुनिया भर में जाना जाता है. उनका जन्म 1926 में क्यूबा के फिदेल अलेजांद्रो कास्त्रो परिवार में हुआ था जो काफ़ी समृद्ध माना जाता था.

वर्ष 1953 में उन्होंने क्यूबा के राष्ट्रपति फुलगेंसियो बतिस्ता की सत्ता के ख़िलाफ़ हथियार उठा लिए. जनक्रांति शुरू करने के इरादे से 26 जुलाई को फिदेल कास्त्रो ने अपने 100 साथियों के साथ सैंतियागो डी क्यूबा में सैनिक बैरक पर हमला किया लेकिन नाकाम रहे.

इस हमले के बाद फिदेल कास्त्रो और उनके भाई राउल बच तो गए लेकिन उन्हें जेल में डाल दिया गया. दो साल बाद उन्हें माफ़ी देते हुए छोड़ दिया गया लेकिन फिदेल कास्त्रो ने बतिस्ता शासन के ख़िलाफ़ अभियान बंद नहीं किया.

यह अभियान उन्होंने मैक्सिको में निर्वासित जीवन जीते हुए चलाया. वहाँ उन्होंने एक छापामार संगठन बनाया जिसे 26 आंदोलन का नाम दिया गया.

फिदेल कास्त्रो के क्रांतिकारी आदर्शों को क्यूबा में काफ़ी समर्थन मिला और 1959 में उनके संगठन ने बतिस्ता शासन का तख़्ता पलट दिया. बतिस्ता के शासन को भ्रष्टाचार, असमानता और अन्य तरह की परेशानियों का प्रतीक माना जाने लगा था.

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