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ग़ाज़ा पर चर्चा लेकिन मतदान नहीं

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ग़ज़ा में जारी हिंसा पर चर्चा हुई है पर संघर्षविराम पर मतदान नहीं हुआ है. अमरीका, ब्रिटेन ने प्रस्ताव के मसौदे पर आपत्ति जताई है.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अरब देशों की सरकारों और फ़लस्तीनियों की इसराइली हवाई हमलों को बंद करने की अपील सुनी है. अरब लीग के अनुरोध पर सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई गई थी.

पिछले पाँच दिन की इसराइली हवाई कार्रवाई में फ़लस्तीनी अधिकारियों के अनुसार 391 लोग मारे गए हैं. ग़ज़ा से चलाए गए रॉकेटों में चार इसराइली भी मारे गए हैं.

ग़ौरतलब है कि हाल में दोनों पक्षों के बीच ग़ज़ा संबंधी संघर्षविराम समाप्त हुआ था और हमास ने ये कहते हुए इसे आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया था कि इसराइल ने पहले किए गए वादे नहीं निभाए.

इससे पहले इसराइली सुरक्षा केबिनेट ने 48 घंटे के संघर्षविराम के अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रस्ताव को ठुकरा दिया था.

अमरीका, ब्रिटेन की आपत्तियाँ

ग़ज़ा में इसराइल की बमबारी बर्बर और आपराधिक कार्रवाई है और यदि इसराइल हमारे हितों के ख़िलाफ़ उग्र कार्रवाई का समर्थन करता है तो मुझे इसराइल के साथ शांति वार्ता बंद करने से भी परहेज़ नहीं होगा महमूद अब्बास

ग़ज़ा में इसराइल की बमबारी बर्बर और आपराधिक कार्रवाई है और यदि इसराइल हमारे हितों के ख़िलाफ़ उग्र कार्रवाई का समर्थन करता है तो मुझे इसराइल के साथ शांति वार्ता बंद करने से भी परहेज़ नहीं होगा

सुरक्षा परिषद में संयुक्त राष्ट्र में फ़लस्तीनी राजदूत रिजाद मनसूर ने माँग उठाई की तत्काल संघर्षविराम के लिए ऐसा प्रस्ताव पारित किया जाए जिसे लागू करने पर इसराइल बाध्य हो.

लेकिन संयुक्त राष्ट्र में इसराइली राजदूत गेब्रियला शालेव ने कहा कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ अपनी हिफ़ाज़त के लिए उनका देश जिस भी कार्रवाई को ज़रूरी समझेगा, वह करेगा.

लीबिया ने एक प्रस्ताव का मसौदा रखा था जिसमें इसराइली सैन्य कार्रवाई की निंदा की गई थी और तत्काल संघर्षविराम की अपील की गई थी.

लेकिन अमरीका और ब्रिटेन के राजदूतों का कहना था कि प्रस्ताव के मसौदे में हमास के इसराइल के ख़िलाफ़ रॉकेट हमलों का कोई ज़िक्र नहीं है. उनके अनुसार इन हमलों के कारण ही वर्तमान संकट शुरु हुआ था.

उधर फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने धमकी दी है कि वे इसराइल के शांति वार्ता से पूरी तरह पीछे हट जाएँगे.

उनका कहना था, "ग़ज़ा में इसराइल की बमबारी बर्बर और आपराधिक कार्रवाई है और यदि इसराइल हमारे हितों के ख़िलाफ़ उग्र कार्रवाई का समर्थन करता है तो मैं इसराइल के साथ शांति वार्ता बंद करने से नहीं हिचकिचाऊँगा."

इसराइली हवाई हमलों में 391 से ज़्यादा फ़लस्तीनी मारे गए हैं

पिछले पाँच दिनों में इसराइल जेट विमानों और हेलिकॉप्टरों ने हमास के कथित ठिकानों को निशाना बनाकर हमले किए हैं जिनमें सुरक्षा परिसरें, सरकारी इमारतें, तस्करी की कथित सुरंगें और चरमपंथी नेताओं के घर शामिल हैं.

दोनों पक्षों पर संघर्ष समाप्त करने का दबाव बढ़ रहा है क्योंकि ग़ज़ा में अस्पताल हताहतों को चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए जूझ रहे हैं और खाद्य पदार्थों और इंधन की ग़ज़ा में ख़ासी कमी हो गई है.

अमरीका में अनेक प्रदर्शनकारियों ने इसराइल और अमरीका के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की और उनमें से अनेक ने आरोप लगाए कि उनके दिए गए टैक्स में से अमरीकी सरकार इसराइल को सैनिक और आर्थिक सहायता देती है.

उधर संयुक्त राष्ट्र, अमरीका, रूस और यूरोपीय संघ ने संयुक्त तौर की गई अपील में कहा है - ''हम सभी पक्षों से ग़ज़ा की गंभीर मानवीय और आर्थिक ज़रूरतों को देखते हुए आवश्यक आपूर्ति को जारी रखने का अनुरोध करते हैं.''

इससे पहले इसराइल के प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट ने कहा था कि ग़ज़ा में इसराइली सैन्य अभियान का अभी पहला चरण ही शुरू हुआ है.

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