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2009: कहीं ज़ोरदार स्वागत, कहीं रंग फीका

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sydney getty grande

वर्ष 2008 के अंत और वर्ष 2009 की शुरुआत का दुनिया में अनेक जगहों पर ज़बरदस्त स्वागत हुआ. लेकिन कुछ जगह नववर्ष जश्न का रंग फीका ही रहा.

लेकिन एशिया में अनेक जगह वर्ष 2009 का स्वागत ज़्यादा ज़ोरदार नहीं रहा है. जहाँ भारत में मुंबई हमलों के बाद इस बार नववर्ष के आगमन पर धूमधाम ज़्यादा नहीं दिखी, वहीं पाकिस्तान में मोहर्रम के महीने की वजह से, मध्य पूर्व में ग़ज़ा पर हमलों के कारण और मलेशिया में आर्थिक मंदी के चलते ज़्यादा तड़क-भड़क नहीं नज़र आई.

ऑस्ट्रेलिया में सिडने से लेकर, ब्रिटेन में एडिनबरा और अमरीका में न्यूयॉर्क तक लोगों ने पटाख़े फोड़कर और सड़कों पर जश्न मनाकर नववर्ष के आगमन का स्वागत किया.

न्यूज़ीलैंड में नववर्ष के आगमन पर पटाख़े फोडे गए और रंगारंग कार्यक्रम हुआ

लाखों लोग एकत्र हुए

लंदन में चार लाख लोग टेम्स नदी पर आयोजित आतिशबाज़ी के कार्यक्रम को कड़ाके की ठंड के बावजूद देखने पहुँचे. ग्रीनिच मान समयानुसार दस बजे प्रशांत महासागर में कीर्तीमाती या क्रिसमस द्वीप में पृथ्वी पर सबसे पहले नववर्ष के आगमन का स्वागत किया गया.

बैंकॉक में नए साल के जश्न के दौर आग में 59 मारे गए

एक घंटे बाद न्यूज़ीलैंड में ऑकलैंड के निवासियों ने रंग बिरंगी आतिशबाज़ी का लुत्फ़ उठाते हुए और फिर ऑस्ट्रेलिया के सिडनी और मेलबर्न शहरों में एकत्र लाखों लोगों ने नए साल का स्वागत किया. सिडनी के हार्बर ब्रिज पर पटाखों और आतिशबाज़ी का मज़ा लूटने रिकॉर्ड 15 लाख लोग एकत्र हुए.

वेटिकन में कैथोलिक ईसाइयों के धर्मगुरु पोप बेनेडिक्ट-16वें ने लोगों से अनुरोध किया कि वे इस अनिश्चिता के समय में भयभीत न हों बल्कि एक दूसरे की मदद करें.

पोप बेनेडिक्ट-16वें ने लोगों से इन समयों में भयभीत न होने का अनुरोध किया

उधर लंदन में इंजीनियरों बिग बेन क्लॉक के समय सही किया और उसमें एक सैकेंड की वृद्धि की.

कई जगह रंग फीका

मिस्र, जॉर्डन और सीरिया समेत कई अरब देशों ने पूर्व आयोजित नववर्ष कार्यक्रमों को रद्द कर दिया. उन्होंने ग़ज़ा में फ़लस्तीनियों पर हो रही इसराइली बमबारी के ख़िलाफ़ विरोध दर्ज किया.

मलेशिया में सरकारी कार्यक्रम नहीं हुए क्योंकि देश आर्थिक मंदी की चपेट में है.

भारत में भीषण सुरक्षा के बीच जहाँ महानगरों मुंबई, दिल्ली, बंगलौर इत्यादि ने अपने इलाक़ों में जश्न मनाया वहीं पिछले सालों की तरह व्यापक स्तर पर कार्यक्रम या तो आयोजित नहीं किए गए या फिर उनका रंग फीका ही दिखा.

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