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बीते वर्ष किताब की शक्ल में आए कई दस्तावेज

By Staff
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नई दिल्ली, 1 जनवरी (आईएएनएस)। सूचना व अध्ययन के तमाम आधुनिक माध्यमों की मौजूदगी में भी पुस्तक की अहमियत बनी हुई है। भारत में पुस्तक वजनी तौर पर भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराती है। वर्ष 2008 में उपन्यास व कहानी के साथ राजनीति, सिनेमा आदि विषयों पर आई तमाम पुस्तकें इसका प्रमाण हैं।

वर्ष 2008 अब पीछे छूट चुका है लेकिन इस वर्ष ऐसी कई पुस्तकें आईं जो बतौर दस्तावेज लंबे समय तक प्रासंगिक बनी रहेंगी। कई ऐसी पुस्तकें भी आईं जो चाह कर भी समसामयिक राजनीति से मुंह नहीं फेर सकी।

लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी की आत्मकथा 'माई कंट्री माई लाइफ' इनमें से एक है। इस पुस्तक का हिन्दी संस्करण 'मेरा देश मेरा जीवन' नाम से प्रकाशित हो चुका है। हालांकि कई लोग मानते हैं कि इस आत्मकथा में कुछ जरूरी कथाएं रह गई हैं, फिर भी शोधार्थी पुस्तक को बड़े चाव से पढ़ रहे हैं।

पड़ोसी देश पाकिस्तान की घरेलू राजनीति की हल्की पर महत्वपूर्ण जानकारी देने वाली दो पुस्तकें इस वर्ष प्रकाशित हुईं। इनमें से पहली है मोहम्मद हनीफ की लिखी 'ए केस ऑफ एक्सप्लोडिंग मैंगोज' जो पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल जिया उल हक से जुड़ी है। जबकि दूसरी पुस्तक 'गुडबाय शाहजादी' पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो से जुड़ी है। इस पुस्तक को श्याम भाटिया ने लिखा है।

साहित्य की दुनिया में अरविंद अडिग ने तो 'द व्हाइट टाइगर' नामक पुस्तक लिखकर एक तरह से इतिहास ही बना डाला। यह उनकी पहली कृति है और इस रचना के लिए उन्हें बुकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। कई पाठकों का मानना है कि यह पुस्तक भारत की कमियों को गिनाती जरूर है पर उसके प्रति क्षोभ पैदा करने या हालात में सुधार लाने के लिए प्रेरित नहीं कर पाती।

सामाजिक कार्यकर्ता कुमार कलानंद मणि और पत्रकार फ्रेडरिक नरोन्हा की लिखी पुस्तक 'पिक्चर पोस्टकार्ड पावर्टी' एक उदाहरण प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक खूबसूरत व लोकप्रिय पर्यटन स्थल गोवा में बसे उन गांवों की कहानी है, जिसे समय के साथ अनसुना कर दिया गया या फिर भुला दिया गया। इस पुस्तक में गोवा के ग्रामीण इलाकों के उन हलकों का जिक्र है, जिनकी लगातार अनदेखी होती रही है।

पुस्तकों की इस भीड़ में गुलजार की पुस्तक 'टू टेल्स ऑफ माई टाइम' को भुलाना मुश्किल हो जाता है। यह पुस्तक रुपहले परदे पर दिखाई पड़ने वाली फिल्म के पीछे की कहानी बयां करती है। ऐसी और भी कई पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं जो ताउम्र हमारे साथ रहने वाली हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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