'इंजीनियर हत्या में पुलिस-नेता गठजोड़'

'इंजीनियर हत्या में पुलिस-नेता गठजोड़'

उत्तरप्रदेश में इंजीनियर हत्याकांड मामले में अबतक हुई जाँच में सत्तारुढ़ दल के नेताओं और स्थानीय पुलिस की मिलीभगत के संकेत मिले हैं.

दूसरी तरफ़ इस मामले के मुख्य अभियुक्त बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायक शेखर तिवारी पर वो मामले भी दर्ज किए गए हैं जो पहले नहीं किए गए थे. पार्टी के स्थानीय नेताओं ने तिवारी की शिकायत आलाकमान से भी की है.

गुरुवार को विधायक तिवारी के ख़िलाफ़ औरेया रेलवे स्टेशन पर तोड़फोड़ करने के मामले में एक मुक़दमा दर्ज किया गया है. इंजीनियर हत्या कांड से तीन दिन पहले तिवारी और उनके समर्थकों ने औरेया रेलवे स्टेशन पर कथित रुप से तोड़फोड़ भी की थी.

पुलिस-नेता गठजोड़

इंजीनिय हत्या मामले में अभी तक छह लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है जिनमें पुलिस विभाग से जुड़े दो लोग हैं और चार का संबंध बसपा से हैं. दारोग़ा होशियार सिंह और बसपा नेता योगेंद्र दोहरे की गिरफ़्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं विक्रम सिंह

दारोग़ा होशियार सिंह और बसपा नेता योगेंद्र दोहरे की गिरफ़्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं

पुलिस जिन दो अन्य अभियुक्तों की तलाश कर रही है उनमें दिव्यापुर पुलिस थाना के निलंबित पुलिस अधिकारी होशियार सिंह और औरेया ज़िला के बसपा ज़िलाध्यक्ष योगेंद्र दोहरे हैं. दोहरे को पार्टी से निष्कासित किया जा चुका है.

उत्तरप्रदेश पुलिस महानिदेशक विक्रम सिंह कहना है, "दारोग़ा होशियार सिंह और बसपा नेता योगेंद्र दोहरे की गिरफ़्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं."

ग़ौरतलब है कि 24 दिसंबर को ओरैया ज़िले में लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर मनोज गुप्ता की कथित रूप से पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में इलाक़े के विधायक शेखर तिवारी को मुख्य अभियुक्त बनाया गया है, और उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून लगा दिया गया है.

गुरवार को पुलिस ने दावा किया है कि बसपा विधायक ने कथित रुप से इंजीनियर की हत्या के समय जिस 'टवेरा' गाड़ी का इस्तेमाल किया था उसे बरामद कर लिया गया है.

छवि का नुक़सान

इस पूरे घटनाक्रम से मायावती की छवि को काफ़ी नुक़सान पहुँचा है और वो भी एक ऐसे समय पर जब लोकसभा चुनाव कुछ ही महीनों में होने वाले हैं.

विपक्ष इसे प्रदेश में चंदावसूली का मामला बता रही है और इस मामले की सीबीआई जाँच की माँग कर रही है. मायावती इस मामले की सीबीआई जांच से इनकार कर चुकी हैं.

इस मामले में विधायक और उनके साथियों पर ऐसे आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने मुख्यमंत्री के जन्म दिवस पर होने वाले सालाना आर्थिक सहयोग के लिए जबरन वसूली के चक्कर में इंजीनियर की पिटाई की थी.

राजनीतिक विश्लेषकों में इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है कि मुख्यमंत्री मायावती ने विधायक शेखर तिवारी और पार्टी के स्थानीय संयोजक नौशाद अली के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की है.जबकि इससे पहले कई स्थानीय पार्टी कार्यकत्ताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई है.

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