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सुरक्षाकर्मियों से लैस गोवा को देखना

By Staff
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सुरक्षाकर्मियों से लैस गोवा को देखना

साल के अंत में गोवा जितना अपने नृत्य संगीत और पार्टियों के लिए जाना जाता है उतना ही एक ख़ास किस्म की फ़ैशन परेड के लिए भी.

देश की जानीमानी फ़िल्मी हस्तियाँ ग्लैमर और मॉडलिंग उद्योग से जुड़े लोग देश में फैशन और चलन किस ओर जा रहा है, झिलमिल और शरीर को नहीं ढकने वाले परिधानों में इसकी जैसे नुमाइश करते दिखते हैं.

फैशन, पार्टी और ग्लैमर से सरोबार वर्ष के अंत के गोवा में जब आप बड़ी संख्या में पूरी वर्दी और शस्त्रों से लैस सुरक्षाकर्मियों का जमावड़ा समुद्रतट सैलानियों के मध्य देखते हैं तो कुछ अजीब सा लगता है.

स्वचालित राइफ़ल, समुद्रतट पर बने वॉच टॉवर, हाथ में दूरबीन और वॉकी-टॉकी लिए सुरक्षाकर्मी, और समुद्र तट पर पार्टियों और सैलानियों के मध्य देर रात तक होने वाले जश्न पर रोक, यह सब सुनने में आपको अतिशयोक्ति लग सकता है पर 2008 की रवानगी के समय के गोवा की यह एक सच्चाई है.

सुरक्षा व्यवस्था

26/11 के मुंबई हमलों के बाद गोवा में भी सुरक्षा एजेंसियाँ एकदम हरकत में आ गईं और स्थानीय पुलिस के साथ-साथ यहाँ भी अर्धसैनिक बलों की लगभग आठ कंपनियाँ चौकसी के लिए तैनात हैं.

वैसे तो गोवा को निशाना बनाने के संबंध में कोई स्पष्ट चेतावनी नहीं मिली है पर 26/11 के मुंबई हमलों में जिस तरह विदेशियों को निशाना बनाया गया है, उसके बाद गोवा में सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत किया जाना लाज़िमी था आत्माराम देशपांडे

वैसे तो गोवा को निशाना बनाने के संबंध में कोई स्पष्ट चेतावनी नहीं मिली है पर 26/11 के मुंबई हमलों में जिस तरह विदेशियों को निशाना बनाया गया है, उसके बाद गोवा में सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत किया जाना लाज़िमी था

गोवा के खुफ़िया विभाग के एसपी और स्थानीय आतंकवादी विरोधी दस्ते यानी एटीएस के शीर्ष अधिकारी आत्माराम देशपांडे ने बीबीसी को बताया कि वैसे तो गोवा को निशाना बनाने के संबंध में कोई स्पष्ट चेतावनी नहीं मिली है पर 26/11 के मुंबई हमलों में जिस तरह विदेशियों को निशाना बनाया गया है, उसके बाद गोवा में सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत किया जाना लाज़िमी था.

लेकिन इस बढ़ी हुई सुरक्षा व्यवस्था की मार यहाँ के सबसे बड़े उद्योग यानी पर्यटन व्यवसाय पर खासी पड़ रही है.

स्थानीय टैक्सी चालक केसी फ़र्नांडिस का कहना है कि पहले वैश्विक आर्थिक मंदी ने इस पर्यटन व्यवसाय को ख़ासा नुकसान पहुँचाया था पर मुंबई के आतंकी हमले ने तो जैसे यहाँ की कमर ही तोड़ दी है.

एक पाँच सितारा होटल से जुड़े एक दूसरे टैक्सी चालक मेनन का कहना था कि पहले क्रिसमस और नए साल के सीज़न में वे आराम से दिन के हज़ार- 1500 रुपए कमा लेते थे लेकिन अब हालत यह है कि पिछले तीन दिन में भी एक भी ग्राहक नसीब नहीं हो रहा है.

हालात में सुधार

गोवा चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स के पर्यटन प्रकोष्ठ के अध्यक्ष राल्फ़ डिसूज़ा का कहना है कि पिछले वर्षों के मुक़ाबले इस साल 25 फ़ीसदी सैलानी कम आए हैं.

पहले वैश्विक आर्थिक मंदी ने इस पर्यटन व्यवसाय को ख़ासा नुकसान पहुँचाया था पर मुंबई के आतंकी हमले ने तो जैसे यहाँ की कमर ही तोड़ दी है. केसी फ़र्नांडिस

पहले वैश्विक आर्थिक मंदी ने इस पर्यटन व्यवसाय को ख़ासा नुकसान पहुँचाया था पर मुंबई के आतंकी हमले ने तो जैसे यहाँ की कमर ही तोड़ दी है.

पर डिसूज़ा का मानना है कि पिछले एक दो दिनों से हालात जैसे सुधर रहे हैं.

हालात सुधरेंगे यह बात सही होती दिख भी रही है. जैसे जैसे मुंबई आतंकी हमलों की याद कुछ नेपथ्य में जाती है, लोग आम जनजीवन वापस शुरू करते हैं और गोवा के संदर्भ में यहाँ हैं मौज मस्ती में आई सैलानियों की टोलियाँ.

पर अगर स्थिति स्थाई रूप से सामान्य की ओर लौटनी है तो हमारी सुरक्षा व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्तन करना होगा.

आवश्यक है कि लोगों में यह विश्वास पैदा हो कि सरकार और सुरक्षा तंत्र अपनी ज़िम्मेदारियों के प्रति सजग और गंभीर है. पर क्या ऐसा हो रहा है, शायद नहीं.

अगर आप गोवा के मुख्या रेलवे स्टेशन का ही उदाहरण लें तो यहाँ यात्रियों को तो मेटल डिटेक्टर की जाँच के बाद ही अंदर जाने दिया जाता है पर सामान बिना जाँच के पहले प्लेटफ़ार्म और फिर रेलगाड़ियों में चला जाता है.

अब इस भगवान भरोसे किस्म की सुरक्षा व्यवस्था के चलते विदेशी सैलानियों का विश्वास जीतना तो दूर, अपने लोगों को आश्वस्त करना भी मुश्किल होगा.

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