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जम्‍मू-कश्‍मीर: सरकार बनाने की कवायद शुरू

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Omar Abdullah and Mufti Mohammad Sayeed
श्रीनगर, 29 दिसम्बर: जम्मू-कश्मीर की 11वीं विधानसभा के लिए हुए चुनावों में किसी भी दल को बहुमत हांसिल नहीं हो सका। लिहाजा यहां त्रिशंकु विधानसभा बनेगी। ताज किस पार्टी का नेता पहनेगा यह अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन हां विभिन्‍न राजनीतिक दलों ने गठजोड़ के प्रयास शुरू कर सरकार बनाने की कवायद शुरू कर दी है।

कुल 87 सीटों वाली विधानसभा के लिए राज्य की दोनों प्रमुख पार्टियां नेशनल कांफ्रेंस (28) और पीपुल्स डेमोक्रेटिकपार्टी (पीडीपी) (21) इस बार 17 सीटें हासिल करने वाली कांग्रेस के साथ सरकार बनाने की कोशिश कर रही हैं।

खास बात यह है कि 11 सीटों के साथ आगे आयी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ कोई भी गठबंधन को तैयार नहीं है। हालांकि भाजपा भी किसी को समर्थन देने के मूड में नहीं दिख रही है।

नेशनल कांफ्रेंस से फारुक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला ने क्रमश: हजरतबल और गांदरबल विधानसभा सीटों से जीत हासिल की है। पीडीपी नेता मुफ्ती मोहम्मद सईद ने अनंतनाग से जबकि उनकी बेटी महबूबा मुफ्ती ने वाची विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की है। पैंथर्स पार्टी ने तीन, मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, डेमोक्रेटिक पार्टी नेशनलिस्ट, और पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट ने क्रमश: एक-एक और चार सीटों पर निर्दलीयों ने जीत हासिल की।

तारीगामी अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के कड़े विरोध के बावजूद विजयी हुए हैं। गिलानी तारीगामी को हराने के लिए प्रतिबद्ध थे।

पार्टियां मिलकर करेंगी ताज का फैसला

किसके सिर पर मुख्‍यमंत्री पद का ताज होगा यह अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन हां गठजोड़ में लगी एनसी ने कहा है कि यदि वो कांग्रेस के साथ सरकार बनायेगी तो दोनों पार्टियां मिलकर तय करेंगी कि ताज किसे पहनाया जाएगा।

नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुला ने कहा कि यदि उनकी पार्टी और कांग्रेस के बीच किसी तरह का कोई गठबंधन बनता है तो मुख्यमंत्री का फैसला दोनों पार्टियां मिलकर करेंगी।

अब्दुल्ला ने कहा कि यह कहना बहुत जल्दी होगा कि कौन मुख्यमंत्री पद के लिए उम्मीदवार होगा। जब एनसी कांग्रेस के साथ गठबंधन को पूरा कर लेगी तभी यह फैसला होगा।

अपने बेटे उमर अब्‍दुल्‍ला को मुख्‍यमंत्री बनाये जाने की बात पर फारुख अब्‍दुल्‍ला ने उनकी जमकर पैरवी की। उन्‍होंने कहा कि उमर युवा हैं और वे राज्य की जनता की सेवा करने के लिए तैयार भी हैं।

छोटे दलों से गठजोड़ में लगी पीडीपी

राज्य की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी पीडीपी अब छोटे दलों व निर्दलीय उम्‍मीदवारों से गठजोड़ में लग गई है। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने वाची सीट से विजय के बाद कहा कि उनकी पार्टी न्यूनतम साक्षा कार्यक्रम के आधार पर अन्य दलों के साथ गठबंधन बनाएगी। राज्‍य की परिस्थितियों की मांग अच्छा शासन है।

अमरनाथ भूमि विवाद पर अपने रुख को सही ठहराते हुए महबूबा ने कहा कि पीडीपी लोगों की आकांक्षाओं का सम्मान करती
है।

आलाकमान पर निर्भर कांग्रेस

पीडीपी को समर्थन दे या एनसी को। इस बात को लेकर कांग्रेस के उम्‍मीदवार असमंजस में हैं। कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री गुलाब नबी आजाद डोडा के भद्रवाह सीट से विजयी हुए हैं। आजाद ने कहा कि जुलाई-अगस्त के महीने में जो कुछ भी हुआ उसका यह नतीजा है। लेकिन हां किस पार्टी को समर्थन देना है यह बात केंद्र में बैठे आलाकमान तय करेंगे।

किसी को समर्थन नहीं: भाजपा

भाजपा ने नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी के साथ गठबंधन की किसी भी संभावना से इंकार किया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता चमनलाल गुप्ता ने कहा कि अमरनाथ जमीन विवाद के समय रहे पीडीपी के रुख और उसके अलगाववादी एजेंडा की वजह से उसके साथ गठबंधन का सवाल ही नहीं है।

उन्‍होंने कहा कि उमर अब्दुल्ला वाजपेयी सरकार में शामिल होने को अपनी भूल करार दे चुके हैं, ऐसे में उनके साथ भी गठबंधन नहीं किया जाएगा।

गौरतलब है कि राज्य में 17 नवंबर से 24 दिसम्बर के बीच सात चरणों में मतदान हुआ था। मतदान के दौरान राज्य के लगभग 63 फीसदी मतदाताओं ने अलगाववादियों द्वारा चुनावों का बहिष्कार करने की अपील को ठुकराते हुए अपने मताधिकार का उपयोग किया था। खास बात यह है कि इस बार चुनावों के दौरान अमरनाथ भुमि विवाद पूरी तरह छाया रहा, जिसका असर साफ देखने को मिला।

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