'आर्थिक वृद्धि दर से सेवा क्षेत्र को फायदा'

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नई दिल्ली, 28 दिसम्बर: वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण जहां तमाम देशों की कंपनियां संकट के दौर से गुजर रही हैं, वहीं फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स एंड कॉमर्स एंड इंडस्‍ट्री (फिक्‍की) ने कहा है कि आर्थिक मंदी के बावजूद आईटी, शिक्षा और संगठित खुदरा बिक्री जैसे सेवा क्षेत्र के कुछ व्यवसायों में इस वित्तीय वर्ष में 10 से 20 प्रतिशत के बीच की ऊंची वृद्धि दर कायम रह सकती है।

सर्वेक्षण के मुताबिक पिछले साल की तुलना में इस साल अप्रैल से नवंबर के बीच मोबाइल ग्राहकों की संख्या में 50 फीसदी अधिक वृद्धि हुई है। इंटरनेट सुविधा से जुड़ने वालों की संख्या में 26 प्रतिशत और ब्राडबैंड की सेवा लेने वालों की संख्या 87.7 प्रतिशत बढ़ी है।

इस कारण कुछ क्षेत्रों में गिरावट के बावजूद सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 63 प्रतिशत योगदान देने वाले सेवा क्षेत्र की वृद्धि से इस वित्तीय वर्ष में जीडीपी में बढ़िया वृद्धि कायम रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

वित्तीय वर्ष 2007-08 के दौरान सेवा क्षेत्र की विकास दर 10.7 प्रतिशत थी। यह विनिर्माण क्षेत्र की 8.8 प्रतिशत और कृषि क्षेत्र की 4.5 प्रतिशत विकास दर से अधिक थी। अप्रैल-नवंबर के बीच आवास वित्त, मनोरंजन और मीडिया उद्योग, आईटी और इससे जुड़ी सेवाओं, शिक्षा और प्रशिक्षण और संगठित खुदरा व्यापार जैसे व्यापारों में 10 से 20 प्रतिशत के बीच भारी वृद्धि दर्ज हुई है।

रेलवे के राजस्व में भी वृद्धि हुई है। परंतु हवाई सेवाओं, लैंडलाइन फोन सेवाओं, म्युचुअल फंडों और बीमा प्रीमियम जैसे क्षेत्रों में गिरावट आयी। इसलिए इन क्षेत्रों में संकट बरकरार रहने की संभावना है।

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