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अफ़ग़ानिस्तान नहीं जाएँगे ज़रदारी

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kabul

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने अफ़ग़ानिस्तान दौरा स्थगित कर दिया है. अधिकारियों के मुताबिक़ 'ख़राब मौसम' के कारण ऐसा हुआ है.

आसिफ़ अली ज़रदारी को अफ़ग़ानिस्तान दौरे के क्रम में राष्ट्रपति हामिद करज़ई से मुलाक़ात करनी थी. बातचीत का एजेंडा था- साझा रूप में आतंकवाद के ख़िलाफ़ कार्रवाई और व्यापार को बढ़ावा देना.

सितंबर में राष्ट्रपति पद संभालने के बाद आसिफ़ अली ज़रदारी की ये पहली अफ़ग़ानिस्तान यात्रा होती. सीमावर्ता इलाक़ों में बढ़ती हिंसा के कारण पहले ही चिंता जताई जा रही है.

वैसे अफ़ग़ानिस्तान पहले पाकिस्तान पर यह आरोप लगा चुका है कि वह तालेबान की गतिविधियों को रोकने के लिए ज़्यादा कुछ नहीं कर रहा है.

ख़राब मौसम

इस्लामाबाद में पाकिस्तान अधिकारियों ने बताया है कि ख़राब मौसम के कारण राष्ट्रपति ज़रदारी काबुल रवाना नहीं हो पाए.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने अपने देश में आमंत्रित करने के लिए हामिद करज़ई का धन्यवाद दिया है. निकट भविष्य में उचित समय पर वे अफ़ग़ानिस्तान आएँगे राष्ट्रपति कार्यालय का बयान

पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने अपने देश में आमंत्रित करने के लिए हामिद करज़ई का धन्यवाद दिया है. निकट भविष्य में उचित समय पर वे अफ़ग़ानिस्तान आएँगे

अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति कार्यालय ने एक बयान जारी किया है. इस बयान में लिखा है- पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने अपने देश में आमंत्रित करने के लिए हामिद करज़ई का धन्यवाद दिया है. निकट भविष्य में उचित समय पर वे अफ़ग़ानिस्तान आएँगे.

लेकिन राष्ट्रपति ज़रदारी के अफ़ग़ानिस्तान दौरे की नई तारीख़ अभी नहीं पता चल पाई है.

काबुल से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि पिछले कुछ समय से दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण चल रहे थे लेकिन अब स्थिति कुछ बेहतर हुई है.

राष्ट्रपति के रूप में ये ज़रदारी का पहला दौरा होता

राष्ट्रपति हामिद करज़ई तो आसिफ़ अली ज़रदारी के शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल हुए थे. सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भी दोनों की मुलाक़ात हुई थी.

दिसंबर में वे इस्तांबुल में भी मिले थे. इस बैठक में उन्होंने सीमावर्ती इलाक़ों में चरमपंथी गुटों से निपटने के लिए साझा रणनीति पर सहमति जताई थी.

माना जाता है कि अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाक़ों से तालेबान और अल क़ायदा के चरमपंथी अपनी गतिविधियाँ चलाते हैं और यह इलाक़ा उनके लिए काफ़ी सुरक्षित भी है.

अमरीका और अफ़ग़ानिस्तान का तो ये भी दावा है कि इन्हीं इलाक़ों से चरमपंथी अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद विदेशी सैनिकों पर हमला भी करते हैं.

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