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ब्रितानी आतंकवादियों को मिली सज़ा

By Sridhar L
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ब्रितानी आतंकवादियों को मिली सज़ा

रंगज़ेब अहमद को आतंकवाद फैलाना का दोषी पाया गया है और मैनचेस्टर क्राउन कोर्ट ने उन्हें "बेहद ख़तरनाक व्यक्ति" मानते हुए आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है.

33 वर्षीय रंगज़ेब को अल क़ायदा का सदस्य साबित किया गया है और उनके एक सहयोगी हबीब अहमद को 10 साल की सज़ा सुनाई गई है.

29 वर्षीय हबीब को अल क़ायदा का सदस्य होने की वजह से नौ वर्ष की सज़ा सुनाई गई है और आतंकवादी गतिविधियों के लिए दस्तावेज़ जमा करने के लिए उन्हें एक वर्ष की सज़ा दी गई है.

पेशे से टैक्सी ड्राइवर हबीब के पास से एक टेलीफ़ोन डायरी मिली थी जिसमें अल क़ायदा के शीर्ष नेताओं के फ़ोन नंबर थे, इस डायरी को आतंकवादियों की डायरेक्टरी कहा जा रहा है.

जूरी ने पाया है कि रंगज़ेब अल क़ायदा का नेता नहीं था लेकिन वह आतंकवादी हमले करने के लिए लोगों को जुटाने और संगठित करने का काम करता था जस्टिस सैंडर्स

जूरी ने पाया है कि रंगज़ेब अल क़ायदा का नेता नहीं था लेकिन वह आतंकवादी हमले करने के लिए लोगों को जुटाने और संगठित करने का काम करता था

अदालत को बताया गया कि डायरी में कुछ नाम अदृश्य स्याही से लिखे गए थे जिनमें अल क़ायदा के एक बड़े आतंकवादी हम्ज़ा राबिया का भी नाम है.

रंगज़ेब और हबीब दोनों मैनचेस्टर के रहने वाले हैं लेकिन उनका आपस में कोई रिश्ता नहीं है.

अदालत में अभियोजन पक्ष ने बताया कि रंगज़ेब का जन्म मैनचेस्टर के रौशडेल में हुआ था और वह तीन सदस्यीय अल क़ायदा सेल का हिस्सा था.

फ़ैसला सुनाते हुए जस्टिस सैंडर्स ने कहा, "जूरी ने पाया है कि रंगज़ेब अल क़ायदा का नेता नहीं था लेकिन वह आतंकवादी हमले करने के लिए लोगों को जुटाने और संगठित करने का काम करता था."

जज ने रंगज़ेब को संबोधित करते हुए कहा, "मैं इस बात से संतुष्ट हूँ कि आप इस्लामी आतंकवाद में लिप्त हैं, आप एक अक्लमंद, काबिल और एक आम से दिखने वाले इंसान हैं जिसकी वजह से आप बहुत ही ख़तरनाक व्यक्ति हैं."

जस्टिस सैंडर्स ने कहा कि रंगज़ेब को तब तक रिहा नहीं किया जाएगा जब तक यह नहीं मान लिया जाए कि वे आम जनता के लिए ख़तरा नहीं हैं.

कोर्ट ने बताया कि रंगज़ेब ने 2005 में "एक बड़े मिशन के तहत" दुबई, पाकिस्तान, चीन और दक्षिण अफ्रीका की यात्रा की थी. यह मिशन अचानक रोक देना पड़ा था क्योंकि रंगज़ेब का उस्ताद हम्ज़ा राबिया एक धमाके में मारा गया.

जज ने कहा कि हबीब ने यह जानते-बूझते हुए रंगज़ेब की मदद की कि "वह अल क़ायदा का सक्रिय आतंकवादी था".

दोनों आतंकवादियों को काफ़ी जटिल ख़ुफ़िया ऑपरेशन के बाद पकड़ा गया था, रंगज़ेब को 2006 में पाकिस्तान से और हबीब को ब्रिटेन से गिरफ़्तार किया गया था.

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