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वोट के लिए नोट मामला : आरोपमुक्त हुए अमर और अहमद (लीड-2)

By Staff
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समिति ने अपनी रिपोर्ट में पटेल के बारे में कहा, "वीडियो टेपों और समिति के समक्ष उपस्थित होने वाले गवाहों के साक्ष्यों में ऐसा कुछ नहीं है जो शिकायतकर्ताओं को धन की कथित पेशकश में पटेल के शामिल होने की बात साबित करता है।"

रिपोर्ट में अमर सिंह के बारे में समिति ने कहा, "प्रस्तुत टेपों और रिकार्ड में उपलब्ध सामग्री से समिति इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है कि संजीव सक्सेना द्वारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो सांसदों अशोक अर्गल और फग्गन सिंह कुलस्ते को धनराशि दिए जाने की घटना से अमर सिंह को जोड़ा जा सकता है। अत: समिति की राय है कि अमर सिंह के विरूद्ध लगाए गए आरोपों को सिद्ध करने के लिए कोई निर्णायक प्रमाण नहीं है।"

उल्लेखनीय है कि गत 22 जुलाई को लोकसभा में विश्वास मत पर चल रही बहस के दौरान भाजपा के तीन सांसद अशोक अर्गल, फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर भगोरा नोटों की गड्डियां लेकर लोकसभा में घुस गए और उन्होंने इसे हवा में लहराना आरंभ कर दिया। भाजपा सांसदों का कहना था कि उन्हें यह राशि सरकार के पक्ष में मतदान करने के लिए दी गई। कांग्रेस के वी. किशोर चंद्र एस. देव की अध्यक्षता में इस मामले की जांच के लिए एक सात सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था।

तीनों भाजपा सांसद समिति के समक्ष अमर सिंह, अहमद पटेल और सपा सांसद रेवती रमण सिंह के मामले में भी कोई सबूत मुहैया नहीं करा पाए। रिपोर्ट के अनुसार, "समिति ने पाया कि रेवती पर लगाया गया तीनों सांसदों को सरकार के पक्ष में मतदान करने या मतदान से अनुपस्थित रहने के लिए प्रेरित करने का आरोप साक्ष्य विहीन है।"

समिति ने इस मामले में अमर के सहायक और सांसदों को पैसे देने के आरोपी संजीव सक्सेना, उनके ड्राइवर सुहैल हिन्दुस्तानी और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के सहयोगी सुधीन्द्र कुलकर्णी की भूमिका की जांच एजेंसी से कराने की आवश्यकता जताई।

संजीव सक्सेना के संबंध में समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उनके साक्ष्य में कई कमियां और खामियां हैं। उनके द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण तनिक भी विश्वसनीय नहीं है। समिति ने हिन्दुस्तानी के बारे में कहा, "उन्होंने अपनी इच्छा से पर्दाफाश ऑपरेशन में भाग लिया था। मामले के तथ्य तथा परिस्थितियों पर विचार करते हुए वह ईमानदार नहीं जान पड़ते। साथ ही उन्होंने इस विवादास्पद ऑपरेशन में छल्ल कपट किया है। उनकी भूमिका के बारे में संदेह बना हुआ है। मामले की जांच एजेंसी द्वारा किए जाने की आवश्यकता है।"

सुधीन्द्र कुलकर्णी के बारे में समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा, "अपनी इच्छा से उन्होंने विवादास्पद पर्दाफाश ऑपरेशन का ताना-बाना बुना। उन्होंने सदस्यों को घूस देने में मदद की।"

समिति के दो सदस्यों भाजपा के विजय कुमार मल्होत्रा और मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के मोहम्मद सलीम ने समिति के निष्कर्षो से असहमति जताई है।

भाजपा के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि समिति की रिपोर्ट राजनीति से प्रेरित है और यह भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई संदेश देने में असफल रही है।

उधर, सपा के राज्य सभा सदस्य कमाल अख्तर ने कहा कि इस रिपोर्ट से सच्चाई सामने आ गई है। उन्होंने मांग की है कि संसद और लोकतंत्र की पवित्रता नष्ट करने वाले भाजपा सांसदों की सदस्यता समाप्त कर दी जानी चाहिए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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