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भारत जानकारी साझा कर सकता है: प्रणव

By Staff
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भारत जानकारी साझा कर सकता है: प्रणव

भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने सीएनएन-आईबीएन टीवी चैनल पर 'डेविल्स एडवोकेट' कार्यक्रम में कहा, "भारत के पास जो भी साक्ष्य हैं, वह उपलब्ध कराए जा सकते हैं, लेकिन इस मामले में जाँच पड़ताल जारी है और हम अभी किसी नतीज़े पर नहीं पहुंचे हैं. इस समय साक्ष्यों को साझा करना ज़ल्दबाज़ी होगी."

हमनें इससे पहले भी पाकिस्तान के साथ जानकार साझा की है. मैं दोहराना चाहता हूँ कि उस जानकारी पर कार्रवाई नहीं हुई और उसे अंजाम तक नहीं पहुँचाया गया. यदि ज़रूरी हुआ तो हम अवश्य जानकारी साझी करना चाहेंगे विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी

हमनें इससे पहले भी पाकिस्तान के साथ जानकार साझा की है. मैं दोहराना चाहता हूँ कि उस जानकारी पर कार्रवाई नहीं हुई और उसे अंजाम तक नहीं पहुँचाया गया. यदि ज़रूरी हुआ तो हम अवश्य जानकारी साझी करना चाहेंगे

उनका कहना था, "हमनें इससे पहले भी पाकिस्तान के साथ जानकारी साझा की है. मैं दोहराना चाहता हूँ कि उस जानकारी पर कार्रवाई नहीं हुई और उसे अंजाम तक नहीं पहुँचाया गया. यदि ज़रूरी हुआ तो हम अवश्य जानकारी साझी करना चाहेंगे."

प्रत्यर्पण की माँग

मुखर्जी ने एक बार फिर मौलाना मसूद अज़हर और दाउद इब्राहिम जैसे लोगों को भारत को सौंपे जाने की मांग दोहराई.

उन्होंने कहा कि दो तरह के लोग हैं. एक वे जिन्होंने भारत में अपराध किए और पाकिस्तान में शरण ली. दूसरे वे जो पाकिस्तान के नागरिक हैं और 'आतंकवादी' गतिविधियों में शामिल हैं.

मुखर्जी ने कहा कि भारत पाकिस्तान से कह चुका है कि दाउद इब्राहिम जैसे लोगों को भारत को सौंप दिया जाए और जो पाकिस्तानी नागरिक हैं, उनके ख़िलाफ़ पाकिस्तान के क़ानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए.

मसूद अज़हर का नाम मैं ख़ासतौर पर ले रहा हूँ. पाकिस्तान उसे भारत को क्यों नहीं सौंप सकता? उसे घर में नज़रबंद रखने का क्या तुक है प्रणव मुखर्जी

मसूद अज़हर का नाम मैं ख़ासतौर पर ले रहा हूँ. पाकिस्तान उसे भारत को क्यों नहीं सौंप सकता? उसे घर में नज़रबंद रखने का क्या तुक है

टीवी चैनल के मुताबिक मुखर्जी ने कहा है, "मसूद अज़हर का नाम मैं ख़ासतौर पर ले रहा हूँ. वह भारत की हिरासत में था. इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी-814 के अपहरण के बदले में कंधार में हमें अज़हर को अपहर्ताओं के हवाले करना पड़ा. वह कई बार पाकिस्तान में टीवी चैनलों पर दिखाई देता है. तब पाकिस्तान उसे भारत को क्यों नहीं सौंप सकता? उसे घर में नज़रबंद रखने का क्या तुक है?"

भारतीय विदेश मंत्री का कहना था, "मै इंतज़ार कर रहा हूँ और देख रहा हूँ...आतंकवादियों के उपलब्ध मूलभूत ढांचा पूरी तरह से ध्वस्त होता है या नहीं और प्रतिबंधित संगठन पुराने चेहरों और नए नाम से काम करना तो नहीं शुरु करते."

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