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'यह मेरे लिए एक बड़ा सम्मान है'

By Staff
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'यह मेरे लिए एक बड़ा सम्मान है'

ब्रिटेन में किसी भारतीय मूल के व्यक्ति को दिया गया यह अब तक का सबसे ऊँचा ओहदा है. इससे पहले भारतीय मूल के कीथ वाज़ टोनी ब्लेयर के पहले कार्यकाल में मंत्री रह चुके हैं.

हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स के सदस्य स्वराज पॉल ने डिप्टी स्पीकर चुने जाने के बाद बीबीसी हिंदी के विजय राणा से विशेष बातचीत की.

इस नियुक्ति की ख़बर मिलने के बाद आपको कैसा महसूस हुआ?

देखिए, ये भी एक काम है, जिम्मेदारी है, जब स्पीकर मौजूद नहीं हो तो उसकी जगह हाउस ऑफ़ लार्ड्स की अध्यक्षता करनी होगी. ये खुशी हुई है कि मैं मूल रूप से हिंदुस्तानी हूँ लेकिन जिस मुल्क में रह रहा हूँ वहाँ इज़्ज़त है बाहर से आकर बसे लोगों की. मेरा इतिहास है कि मैं स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेने वाले परिवार से हूँ. मैं दस साल का था तब हर रोज़ हम लोग भारत की आज़ादी के नारे लगाते थे, घरवालों ने इसी वजह से मेरा नाम स्वराज रखा था. ऐसी पृष्ठभूमि से आने के बाद हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में पहुँचना ही बड़ी बात थी और अब उसके ऊपर से यह नियुक्ति, इससे ख़ुशी होती है कि हम ऐसे देश में रह रहे हैं जहाँ सचमुच लोकतंत्र है और गोरे काले का कोई भेद नहीं है. मुझे इस बात पर भी गर्व होता है कि मैं ऐसे देश से आता हूँ जहाँ डेमोक्रेसी है और उसकी इज़्ज़त है.

आपको हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में बहस का संचालन करना होगा, कितना कठिन होगा ये काम. क्या हाउस ऑफ़ कॉमंस की तरह यहाँ भी शोर-शराबा होता है?

नहीं, ऐसा नहीं है, हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स बहुत ही अनुशासित और शालीन सदन है. आपने जैसा कहा वैसा कुछ नहीं होता, हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स तो सेल्फ़ रेगुलेटेड हाउस है. हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में जब कोई बोलता है तो स्पीकर को संबोधित नहीं करता बल्कि लॉर्ड्स को ही संबोधित करता है. यह सदन दुनिया की ज्यादातर संसदीय सदनों से बेहतर है, यहाँ तक कि हाउस ऑफ़ कॉमंस से भी.

हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स के बारे में ऐसी धारणा है कि वह एक अलोकतांत्रिक किस्म की संस्था है जहाँ नुमाइंदे जनता नहीं चुनती, हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स की इस छवि के बारे में आप क्या कहेंगे?

देखिए, हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स का मुख्य काम एक ऊपरी सदन का काम है जिसे देखना होता है कि हाउस ऑफ़ कॉमंस ने कोई ऐसा क़ानून तो नहीं बना दिया है जिस पर ठीक से बहस नहीं हुई है यहाँ दीर्घकालिक हित में नहीं है. हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स का काम ये भी देखना होता है कि क़ानून सबके हित में हो न कि सत्ताधारी पार्टी के हित में. हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में लेबर पार्टी, कंज़रवेटिव पार्टी और लिबरल पार्टी के लॉर्ड्स हैं लेकिन ऐसे लोग भी हैं जिन्हें क्रॉस बेंचर कहा जाता है जो पार्टी के निर्देशों का पालन नहीं करते बल्कि अपने विवेक से फ़ैसला करते हैं. इसका सम्मान किया जाता है, लॉर्ड्स एक बहुत ही अनूठी राजनीतिक संस्था है जो पूरे लोकतांत्रिक तरीक़े से काम करती है. ख़ानदानी सदस्यता तो 1999 में ही ख़त्म कर दी गई जिसकी वजह से ऐसी धारणा बनी होगी.

आप भारत में पैदा हुए और उसके बाद ब्रिटेन आए, यहाँ व्यापार किया और अब आप देश की सबसे ऊँची राजनीतिक संस्था के डिप्टी स्पीकर का कार्यभार संभालने जा रहे हैं, क्या होंगी आपकी सबसे बड़ी चुनौतियाँ?

अगर आप अध्यक्षता करेंगे तो चुनौतियाँ तो होंगी लेकिन ये चुनौतियाँ हर काम में होती हैं, अगर आप व्यापार करें तो भी, राजनीति करें तो भी, आपको संतुलित और निष्पक्ष रहना होगा और अपना आपा नहीं खोना होगा. डिप्टी स्पीकर होने के नेता थोड़ा और सजग रहना होगा. असल में इस नियुक्ति के लिए सभी पार्टियों को सहमत होना पड़ता है, वे मेरे नाम पर सहमत हो गए हैं जो मेरे लिए एक सम्मान है.

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