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चालीस बरस का हुआ 'चूहा'!

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चालीस बरस का हुआ 'चूहा'!

नौ दिसंबर, 1968 को दूरदृष्टा डगलस एंगेलबार्ट ने कंप्यूटर को चलाने का प्रदर्शन करते वक़्त पहली बार माउस का प्रयोग किया था.

डॉ एंगेलबार्ट ने फ़ॉल ज्वाइंट कंप्यूटर कांफ़्रेंस में किए अपने प्रदर्शन में जिस माउस का प्रयोग किया था वह लकड़ी का बना हुआ था और उसमें सिर्फ़ एक बटन था.

उस प्रदर्शन में दर्शाई गई तकनीक ने ही आज सर्वत्र प्रयोग किए जा रहे हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर के विकास की प्रेरणा दी.

उस वक्त फ़ॉल ज्वाइंट कंप्यूटर कांफ़्रेंस (एफजेसीसी) में दर्शाए गए सॉफ़्टवेयर के प्रमुख प्रोग्रामर, आर्किटेक्ट और वर्तमान में सन माइक्रोसिस्टम के रिसर्च ग्रुप के निदेशक डॉ जेफ़ रुलिफ़्सन कहते हैं, "वह एक शानदार प्रदर्शन था लेकिन सब कुछ असली था."

शुरूआती काम

माउस के 40 बरस के होने की खुशी में कैलिफ़ोर्निया में उत्सव का आयोजन किया गया है जहाँ ऐसे बहुत से शोधार्थी एकत्र होंगे जिन्हें माउस को विकसित करने का श्रेय जाता है.

डॉ डगलस की सोच इस बारे में स्पष्ट थी कि कैसे कंप्यूटर मानव की मदद करेगा

इस माउस को बिल इंग्लिश ने बनाया था जिसने डॉ एंगेलबार्ट को कंप्यूटर नेटवर्क के काम करने के तरीकों का प्रदर्शन करते वक़्त यह दिखाने में मदद की कि कैसे टेक्स्ट फ़ाइलों को इकट्ठा किया जा सकता है, कॉपी किया जा सकता है और पेस्ट किया जा सकता है.

डॉ रुलिफ्सन ने सन् 1965 में हुई फ़ॉल ज्वाइंट कंप्यूटर कांफ़्रेंस में डॉ एंगेलबार्ट से मिलने के बाद उनके उस ग्रुप में शामिल हो गए जिसे उन्होंने कैलीफ़ोर्निया के स्टेनफ़र्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट में बनाया था.

डॉ रुलिफ़्सन कहते हैं, मैं डॉ डगलस से मिलकर वाकई बहुत खुश हुआ. मैं समझ गया था कि वे असलियत में क्या हैं. मैं विचारों से भर गया था.

डॉ डगलस एंगेलबार्ट चाहते थे कि कंप्यूटर मानव के सहायकों के रूप में काम करें और मानव की बुद्धिमत्ता को बढ़ाएं ताकि मानव और अधिक सक्रियता और उत्पादकता के साथ काम करे.

इंटरनेट का विकास

1968 में एनएलएस कही जाने वाली कंप्यूटर की पूरी व्यवस्था को प्रदर्शित किया गया जिसे सारे विचारों को कार्यरूप देने के लिए विकसित किया गया था.

वह प्रदर्शन उस समय के कंप्यूटर के इस्तेमालों से बहुत आगे का था और प्रदर्शन की तकनीक इतने प्रभावशाली रूप से लोगों को समझाई गई थी कि कांफ़्रेंस के प्रत्येक व्यक्ति ने डॉ एंगेलबार्ट की दोनों हाथों से काम करने की कोशिशों को पसंद किया.

उस कांफ़्रेंस में एनएलएस ने न सिर्फ़ दर्शकों को प्रभावित किया बल्कि यह तभी बने अर्पानेट पर प्रयोग किया जाने वाला पहला प्रोग्राम भी बना.

एनएलएस को पहला ऐसा तकनीकी डाक्यूमेंट कहा गया जिसने आज के इंटरनेट के काम का वर्णन किया.

1969 में यूसीएलए के साथ एसआरआई नेटवर्क के पहले लिंक का एक सिरा था जो बाद में अर्पानेट और अंत में इंटरनेट बना.

 

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