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विस परिणाम : कांग्रेस ने भाजपा को 'बैकफुट' पर ढकेला (राउंडअप)

By Staff
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जिन पांच राज्यों में चुनाव हुए हैं उनमें से दिल्ली में कांग्रेस ने रिकार्ड तीसरी बार सत्ता में वापसी की है, जबकि राजस्थान और मिजोरम में पार्टी सत्ता छीनने में कामयाब रही है। भाजपा ने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में सत्ता बचा ली है।

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में समर्थकों द्वारा उत्सव मनाए जाने के बावजूद भाजपा नेतृत्व ने स्वीकार किया है कि परिणाम निराशाजनक रहे। पार्टी को सबसे ज्यादा निराशा दिल्ली में हुई है जहां उसे कांग्रेस की 10 वर्षो की सत्ता के खत्म होने की आशा थी।

14 नवंबर से चार दिसंबर के बीच हुए इन विधानसभा चुनावों के नतीजों ने समय से पहले लोकसभा चुनावों की संभावना को प्रबल कर दिया है। हालांकि, कांग्रेस वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने इस संभावना से इनकार किया है।

उधर, भाजपा सूत्रों ने आईएएनएस से कहा कि अगर वह चार में से तीन राज्यों में भी जीत हासिल कर लेती तो पार्टी समयपूर्व आम चुनाव के लिए दबाव बना सकती थी।

कांग्रेस के लिए सबसे उत्साहित करने वाली जीत दिल्ली में रही जहां पार्टी ने कुल 70 में से 40 सीटों पर जीत हासिल की है। चार विधानसभा सीटों के परिणाम आने बाकी है।

राजस्थान में 200 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस 96 सीटों पर जीत हासिल कर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। पार्टी 25 निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनाने की कोशिश में है।

उधर, पूर्वोत्तर के राज्य मिजोरम में कांग्रेस ने राज्य में मिजो नेशनल फ्रंट के 10 वर्षो के शासन का सफाया कर दिया है और कुल 40 में से 32 सीटों पर जीत हासिल की है।

लेकिन, कांग्रेस को मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में हार का सामना करना पड़ा है। मध्यप्रदेश में 230 सदस्यीय विधानसभा के घोषित 185 परिणामों में से भाजपा को 119 पर जीत हासिल हुई है, जबकि पड़ोसी छत्तीसगढ़ की 90 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी को 50 सीटें मिली हैं।

राजनीतिक विश्लेषक जी. वी. एल. नरसिम्हा राव ने हालांकि चेतावनी देते हुए कहा है कि दोनों पार्टियां कांग्रेस व भाजपा को उत्साहित होने की जरूरत नहीं है।

राव ने आईएएनएस से कहा, "कांग्रेस ने आशा से थोड़ा बेहतर प्रदर्शन किया है लेकिन आम चुनाव जीतने के लिए जैसा प्रदर्शन चाहिए था वैसा नहीं है।"

उन्होंने कहा, "भाजपा ने आशा के विपरीत प्रदर्शन किया है और नहीं लगता कि वह केंद्र में सत्ता हासिल करने की दौड़ में आगे है।"

हालांकि उत्साहित कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली ने कहा, "कांग्रेस के लिए अब कोई बाधा नहीं है।"

उधर, भाजपा नेताओं ने निजी बातचीत में स्वीकार किया कि वे अपनी लोकसभा चुनाव की रणनीति पर फिर से विचार करेंगे। क्योंकि 26 नवंबर को मुंबई में हुए आतंकवादी हमले और मालेगांव विस्फोट मामले में हिंदू कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के मुद्दे को पार्टी प्रभावी तरीके से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं कर सकी है।

भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, "हम नतीजों का विश्लेषण करने जा रहे हैं।"

सोमवार को आए इन चुनाव परिणामों में सबसे बड़ी नायक बनकर उभरी दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित। दीक्षित देश की पहली महिला बन गई हैं जिन्होंने लगातार तीसरी बार किसी राज्य में पार्टी को जीत दिलाई है। अपने निवास पर उत्सव जैसे माहौल में दीक्षित ने मीडिया के सामने 'वी' (विजय) चिन्ह दिखाते हुए संकेत दिया कि परिणाम काफी अच्छे रहे हैं।

राजस्थान में भाजपा नेताओं ने हार के लिए पार्टी के भीतरी कलह को जिम्मेदार ठहराया है। लेकिन, यहां दिलचस्प बात यह रही कि कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को छोड़कर सभी हार गए हैं।

हालांकि छत्तीसगढ़ में अपनी हार के लिए कांग्रेस भी आतंरिक कहल को जिम्मेदार ठहरा रही है लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि यहां भाजपा की जीत मुख्यमंत्री रमन सिंह की 'मिस्टर क्लीन' छवि के कारण हुई है।

मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता कांग्रेस पर भारी पड़ी और भाजपा को बेहतरीन जीत दिलाई। वहीं भारतीय जनशक्ति की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती टीकमगढ़ विधानसभा सीट से चुनाव हार गईं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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