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जम्मू कश्मीर में चौथे दौर में धीमा मतदान

By Staff
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जम्मू कश्मीर में चौथे दौर में धीमा मतदान

अपेक्षा के विपरीत दोपहर तक मिली ख़बर के अनुसार कई स्थानों पर मतदान की रफ्तार धीमी रही हैं.

बीबीसी संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन के अनुसार कई मतदान केंद्रों पर या तो वोट पड़े ही नहीं हैं या बहुत कम वोट ही पड़े है.

ग़ौरतलब है कि पिछले तीन चरणों में मतदान का प्रतिशत काफ़ी अच्छा रहा था और अलगाववादियों के चुनाव बहिष्कार का प्रभाव नहीं देखा गया था.

हालांकि चौथे चरण में अपेक्षा के विपरीत चुनाव बहिष्कार का प्रभाव देखा जा रहा है.

ज़बर्दस्त सुरक्षा

चौथे चरण के लिए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं जिसके तहत केंद्रीय सुरक्षा बलों की 119 कंपनियां तैनात की गई हैं जबकि स्थानीय पुलिस की 108 कंपनियों ने सुरक्षा व्यवस्था में मदद की है.

अधिकारियों के अनुसार बारामूला, बडगाम, रयासी और उधमपुर विधानसभा सीटों के क़रीब 1836 मतदान केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा पहले से ही कर दी गई है और सभी 18 सीटों के सभी मतदान केंद्रों को संवेदनशील माना गया है.

शुक्रवार को चुनाव प्रचार ख़त्म होने से पहले चरमपंथियों ने नेशनल कांफ्रेस के नेता शेख मुस्तफ़ा कमाल पर जानलेवा हमला किया था लेकिन वो बाल बाल बच गए.

बारामूला ज़िले में भी चरमपंथियों ने कुछ हिंसक कार्रवाईयां की है.

हालांकि अब तक हुए तीन चरणों में चरमपंथियों के चुनाव बहिष्कार के आह्वान के बावजूद कश्मीर घाटी में लोग बड़ी संख्या में मतदान करने पहुंचे हैं.

चौथे चरण के मतदान में 18 विधानसभा सीटों के लिए 256 उम्मीदवार मैदान में हैं जबकि 2002 में हुए पिछले चुनावों में यह संख्या 132 थी.

प्रमुख मुक़ाबला

इस दौर में पूर्व उपमुख्यमंत्री मुज़फ्फर हुसैन बेग, पूर्व मंत्री मोहम्मद दिलावर मीर ( पीडीपी), अब्दुल गनी वकील ( कांग्रेस), नेशनल कांफ्रेंस के सांसद अब्दुल रशीद शाहीन, शेख मुस्तफ़ा कमाल और अब्दुल रहीम के भाग्य का फ़ैसला होना है.

मुख्य मुकाबला, नेशनल कांफ्रेस और पीडीपी के बीच माना जा रहा है और चौथे चरण से पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आज़ाद ने व्यापक चुनाव प्रचार किया है.

उधर नेशनल कांफ्रेस की ओर से उमर अब्दुल्ला, फ़ारुख अब्दुल्ला और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती ने अपनी पार्टियों के लिए चुनाव प्रचार किया है.

सोपोर, संगरामा और बारामूला विधानसभा क्षेत्र अलगाववादियों के प्रभाव वाले माने जाते हैं और यहां हमेशा से मतदान का प्रतिशत कम रहता है लेकिन पिछले तीन चरणों के मतदान को देखते हुए इन इलाक़ों में भी अच्छा मतदान होने की संभावना है.

2002 में सोपोर में मात्र नौ प्रतिशत मतदान हुआ था जबकि संगरामा में 22 और बारामूला में 24 प्रतिशत मतदान रिकार्ड हुआ था.

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