• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

बिजली का जाल, गुजरात की चाल

By Staff
|

नई दिल्ली, 7 दिसम्बर (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश में किसानों के घरों और खेतों में बिजली का अभाव व अनियमितता, अत्यधिक मुनाफा वसूली और इस सबके अलावा मुफ्त बिजली के चुनावी वादों पर अमल न होने से इस वर्ष भी दीपावली का त्योहार अंधकार में बीता। अब तो अपेक्षा जनता से है कि वह प्रत्येक पूर्व घोषित योजना का स्वयं मूल्यांकन करें और शासन की ईमानदारी और नीयत पर अपनी राय बनाएं।

नर्मदा घाटी में सरदार सरोवर बांध ही नहीं इंदिरा सागर व ओंकारेश्वर बांधों से, प्रस्तावित से भी अधिक बिजली प्रदान किए जाने का दावा, इस दिशा में पहला कदम हो सकता है। 20 वर्षो से अधिक समय से विवादग्रस्त रहे सरदार सरोवर की भी कलई अब खुलने लगी है। इस महाकाय परियोजना से मध्यप्रदेश को जहां एक ओर पानी की एक बूंद भी नहीं मिलेगी, वहीं निर्मित बिजली में उसका हिस्सा 56 प्रतिशत ही है।

नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बार-बार यह जिक्र करते हैं कि विद्युत संयंत्र की कुल क्षमता 1450 मेगावाट है। वैसे योजना के मूल दस्तावेजों (विस्तृत योजना रिपोर्ट डी. पी. आर.) में भी यह स्पष्ट किया गया है कि प्रत्यक्ष विद्युत उत्पादन 450 मेगावाट के भीतर ही रहेगा। इतना ही नहीं पूर्व क्षमता का उपयोग भी नियमित रूप से संभव नहीं है। जैसे-जैसे गुजरात में नहरों का जाल व सिंचाई क्षमता बढ़ती जाएगी, वैसे-वैसे मुख्य विद्युत संयंत्र से उत्पादन कम होता जाएगा और केवल नहर में स्थित विद्युत संयंत्रों से ही बिजली बनेगी। जिस मुख्य विद्युत संयंत्र की क्षमता 250 मेगावाट है, अंत में वह केवल 50 मेगावाट ही रह जाएगी।

प्राप्त लाभों की उपरोक्त सच्चाई से मध्यप्रदेश ही नहीं महाराष्ट्र और गुजरात की जनता भी अनभिज्ञ है। पिछले कुछ वर्षो से गुजरात और मध्यप्रदेश शासन सर्वोच्च न्यायालय में यह दावा करते रहे हैं कि बांध की ऊंचाई (विस्थापितों द्वारा गैर कानूनी डूब के खिलाफ उठाई आवाज से) रुकी रहने से विद्युत निर्माण के क्षेत्र में करोड़ों का नुकसान भुगतना पड़ रहा है। उनका यह दावा अब झूठा साबित हो चुका है। बांध की ऊंचाई बढ़ाने पर गुजरात के राजनेताओं ने सन् 2000 से 2006 तक ऊंचाई का लाभ लेने के लिए न तो आवश्यक नहर निर्माण पर ध्यान दिया और न ही विद्युत संयंत्र की स्थापना पर।

सन् 2004 में यह विसंगति तब खुलकर सामने आ गई जब झूठे शपथपत्रों के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय से मध्यप्रदेश व गुजरात सरकार को बांध की ऊंचाई 110 मीटर तक बढ़ाने की अनुमति मिल गई। इसके बावजूद इस ऊंचाई पर छह संयंत्रों को स्थापित कर विद्युत उत्पादन का कार्य 2005 तक प्रारंभ नहीं हो पाया। इतने पर भी एक बार फिर नुकसान और विकास की चीख पुकार के मध्य इन सरकारों ने केंद्र से बांध की ऊंचाई 121.97 अर्थात 122 मीटर तक बढ़ाने की मंजूरी ले ली। इससे 125 से अधिक गांव व शहरों को जल समाधि दी गई और बदले में मात्र 56 करोड़ यूनिट (110 मीटर से) बिजली अधिक बन पाई।

मुझे याद है कि बांध की ऊंचाई बढ़ाने के विरुद्ध दिल्ली में मेरे अनशन के दौरान मोदी सरकार और उसके कुछ पिछलग्गू केंद्रीय अधिकारियों ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि इससे 350 से 600 करोड़ यूनिट बिजली निर्माण होना है।

इस वर्ष अभी से ही सरदार सरोवर से लेकर बरगी व ओंकारेश्वर तक तथा 34 नदियों पर निर्मित अनेक बांधों से पानी रोके जाने से सरदार सरोवर डूब क्षेत्र में नदी ही सूखने लगी है और बांध भी पूरा नहीं भरा है। महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश को कितनी बिजली किस कीमत पर मिली इसका जवाब हर अधिकृत वेबसाइट पर अलग-अलग मिलता है। महाराष्ट्र विद्युत मंडल व नियामक आयोग की बैठक के दस्तावेजों में सरदार सरोवर से प्राप्त विद्युत का जिक्र तक नहीं है। 193 गांवों और शहरों के 45,000 परिवारों के विस्थापन और उपजाऊ भूमि, जंगल तथा करोड़ों रुपयों की आहुति देने वाली मध्यप्रदेश की सरकार इस मामले में बिलकुल सचेत नहीं है।

14 से 18 अक्टूबर 2008 तक और जून व जुलाई में कुछ दिन तक सरदार सरोवर का मुख्य विद्युत संयंत्र बंद रहने पर मध्यप्रदेश सरकार ने कोई हैरानी या चिंता प्रकट नहीं की? मध्यप्रदेश ने आज तक बिजली मिलने या न मिलने पर कोई सवाल ही नहीं उठाया।

गुजरात ने तो साफ कह दिया है कि भले ही बांध की ऊंचाई 122 मीटर हो गई हो लेकिन यदि कम बरसात की वजह से बांध 117 मीटर तक नहीं भरा तो गुजरात विद्युत निर्माण की जिम्मेदारी नहीं ले सकता, जिससे की मध्यप्रदेश व महाराष्ट्र को लाभ मिलता रहे। गुजरात इस संबंध में नर्मदा जल विवाद प्राधिकरण के फैसले को कानूनी अधिकार बना रहा है।

इससे यह भी स्पष्ट हो गया है कि जब भी ऐसी स्थितियां निर्मित होंगी गुजरात अपना पूरा पानी लेकर रहेगा। गुजरात विधानसभा में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मजबूरन दिए जवाब से यह स्पष्ट होता है कि गुजरात उपलब्ध जल का केवल सात प्रतिशत ही पीने और सिंचाई में उपयोग ला पा रहा है। इसके बावजूद गुजरात नहर में पानी लेकर मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र को बिजली के लाभों से आखिर क्यों वंचित रखना चाहता है?

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

**

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts

Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more