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गिरफ़्तार हमलावर के 'गाँव' की आँखों देखी

By Staff
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गिरफ़्तार हमलावर के 'गाँव' की आँखों देखी

बीबीसी के पाकिस्तान स्थित संवाददाता पिछले कई दिनों से उस फ़रीदकोट गाँव की तलाश में थे जहाँ का हमलावर अजमल अमीर कसाब बताया जा रहा है, दिक़्कत ये थी कि पाकिस्तान में फ़रीदकोट नाम के तीन गाँव हैं और दो गाँवों के लोगों ने कहा था कि गिरफ़्तार नौजवान उनके गाँव का नहीं है.

तीसरा फ़रीदकोट पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में लाहौर से 100 किलोमीटर दूर ओकाड़ा ज़िले की दिपारपुर तहसील का हिस्सा है. इस गाँव की आबादी 15-20 हज़ार के आसपास है.

इसी गाँव में पहुँचे बीबीसी के संवाददाता अली सलमान ने बताया कि वहाँ के हालात ग़ैरमामूली हैं और बड़ी संख्या में ख़ुफ़िया एजेंसियों के लोग हरकत में नज़र आ रहे हैं लेकिन कोई भी इस बात की पुष्टि करने को तैयार नहीं है कि मुंबई में गिरफ़्तार किया गया अजमल अमीर कसाब इस गाँव का है या नहीं.

अली सलमान ने वहाँ जो देखा उन्हीं की ज़ुबानी-

"जब मैं गाँव के लोगों से पता पूछता हुआ अमीर कसाब के घर पहुँचा तो वहाँ सादे कपड़ों में ख़ुफ़िया एजेंसियों के लोग मौजूद थे, कैमरा और माइक्रोफ़ोन देखते हुए वे घर से बाहर निकल आए.

मैंने इन लोगों से बात करने की कोशिश तो वे बिना कुछ कहे दूसरी ओर चले गए. अंदर एक महिला थीं जिन्होंने अपना नाम मेराज बीबी बताया, वे साफ़ तौर पर परेशान दिख रही थीं.

इस घर में दो ही कमरे थे और दोनों कमरों में बाहर से ताला लगा हुआ था, सिर्फ़ एक चारपाई बाहर रखी हुई थी. मेराज बीबी ने बताया कि वह किसी अमीर कसाब को नहीं जानतीं, वे गफ़ूर कसाब की पत्नी हैं और उनका कोई बच्चा गायब नहीं है.

गाँव के लोगों ने मुझे बताया कि कुछ सिक्योरिटी के अफ़सर आए थे और वे वहाँ से फैमिली को ले गए

गाँव के लोगों ने मुझे बताया कि कुछ सिक्योरिटी के अफ़सर आए थे और वे वहाँ से फैमिली को ले गए

दूसरी जो अजीब बात लगी कि पंजाब के गाँवों में लोग कैमरे पर तस्वीर खिंचवाने से या माइक को देखकर नहीं घबराते हैं लेकिन यहाँ लोग कुछ घबराए हुए दिख रहे थे, वहाँ एक साहब मौजूद थे जो साफ़ तौर पर गाँव के नहीं दिख रहे थे उन्होंने मना किया कि मैं तस्वीरें न खींचूँ और लोगों के इंटरव्यू न करूँ.

मैंने उनसे पूछा कि क्या वे इस घर में रहते हैं तो उन्होंने कहा कि नहीं, मैंने पूछा कि क्या आप गाँव में रहते हैं तो उन्होंने कहा कि हाँ. लेकिन जब मैंने उनका नाम पूछा तो वे जवाब दिए बिना चले गए.

गाँव के बाहरी हिस्से में जब हमने कई लोगों से अमीर कसाब (कसाई) पता पूछा तो लोगों ने उसी घर का पता बताया, यहाँ तक कि हमने गाँव की मुख्य मस्जिद के इमाम से भी पूछा जिन्होंने कहा कि अमीर कसाई का एक लड़का था जिसका सही नाम उन्हें याद नहीं था, वे आजम या अजमल जैसा कोई नाम याद कर रहे थे.

इमाम साहब ने ये भी कहा कि लड़का धार्मिक रुझान वाला था और कुछ समय से उसका अपने पिता से कोई संपर्क नहीं था.

गाँव के लोगों ने मुझे बताया कि कुछ सिक्योरिटी के अफ़सर आए थे और वे वहाँ से फैमिली को ले गए.

फ़रीदकोट में अख़बारों के पत्रकारों का तांता लगा हुआ है. यहाँ के लोगों का कहना है कि पिछले एक सप्ताह से यहाँ ख़ुफ़िया एजेंटों की सरगर्मियाँ बहुत बढ़ गई हैं".

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