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आंतकवादी हमले की नैतिक जिम्मेवारी नौकरशाही भी ले: विशेषज्ञ

By Staff
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नई दिल्ली, 4 दिसंबर(आईएएनएस)। जब कभी भारत में आतंकवादी हमला होता है, सुरक्षा प्रतिष्ठानों की नाकामियां उजागर होती हैं और लोग ऐसे संकट के लिए नौकरशाहों को भी जिम्मेदार मानते रहे हैं। क्या अधिकारियों को ऐसी चूक की नैतिक जिम्मेदारी नहीं लेनी चाहिए?

विशेषज्ञों की राय है कि जब भी देश में आतंकवादी वारदातें होती हैं, सुरक्षा खामियां उभर कर सामने आती हैं। प्रशासनिक और खुफिया तंत्र की नाकामी के कारण ऐसे हालात पैदा होते हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो(सीबीआई) के पूर्व प्रमुख जोगिंदर सिंह कहते हैं कि यह भारतीय लोकतंत्र की त्रासदी है कि तमाम महत्वपूर्ण मसलों पर फैसला लेने या निदेश जारी करने का अधिकार ऐसे लोगों को दिया गया है जो अनुभवहीन हैं।

जोगिंदर सिंह ने कहा, "फाइले वर्षो तक दबी रहती हैं। इसके लिए लालफीताशाही की जकड़न जिम्मेदार है। लगता है, जैसे इस देश में नौेकरशाहों को सिर्फ 'नहीं' कहने का ही अधिकार दिया गया है। संकट आने के बाद ही नौकरशाही जागती है। जब सितंबर में दिल्ली में बम धमाके हुए तब जाकर 17,000 रिक्त पुलिस पदों को भरने की जरूरत समझी गई।"

उत्तरप्रदेश पुलिस और सीमा सुरक्षा बल के पूर्व प्रमुख प्रकाश सिंह कहते हैं, "हमारे अधिकारी आतंकवादी हमलों को लेकर संवेदनहीन हो गए हैं। इन अधिकारियों में अधिकांश अक्षम और लापरवाह हैं। मैं समझता हूं कि ऐसी वारदातों के लिए पूरी व्यवस्था जिम्मेवार है।"

रॉ के पूर्व अधिकारी मेजर जनरल(सेवानिवृत्त) वी़ के. सिंह का मानना है कि जिन लोगों पर सुरक्षा का दारोमदार हैं उन्हें ऐसे हमलों की नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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