• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

एक जांबाज़ कमांडो का जाना...

By Staff
|
एक जांबाज़ कमांडो का जाना...

सेना के एनएसजी दस्ते में कमांडो हवलदार गजेंद्र सिंह नरीमन हाउस में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ मोर्चा लेते हुए शहीद हो गए थे.

उनके भरे-पूरे परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटा, एक बेटी, दो बड़े भाई और उनकी विधवा मां हैं.

उनके पिता का अगस्त में देहांत हो गया था. गजेंद्र के भाई रो रो कर सूज गई आंखों और बुझी हुई आवाज़ के साथ बताते हैं, "पिछले हफ़्ते ही फोन पर गजेंद्र ने कहा था कि पिताजी की बरसी पर आऊंगा."

"हमें पता भी नहीं था कि गजेंद्र मुंबई के एनएसजी ऑपरेशन में गया है. बस जब फोन आया तो उसकी मौत का."

पिछले 18 वर्षों से फौज की सेवा कर रहे गजेंद्र की भर्ती गढ़वाल राइफल्स में हुई थी लेकिन जल्दी ही उसके जज्बे और काबिलियत को देखते हुए उसे सेना की बेहद प्रतिष्ठित बटालियन 10 पैरा कमांडो में तैनाती मिल गई थी.

गजेंद्र ने एक सच्चे फौजी का दायित्व निभाया है जिसके लिये देश सबसे पहले था फिर देशवासी और सबसे अंत में खुद की ज़िंदगी कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल, आरएस सुजरावाला

गजेंद्र ने एक सच्चे फौजी का दायित्व निभाया है जिसके लिये देश सबसे पहले था फिर देशवासी और सबसे अंत में खुद की ज़िंदगी

इसी बटालियन के हवलदार और गजेंद्र के दोस्त करण कहते हैं, "वो कारगिल युद्ध में गया, जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों के ख़िलाफ़ कुछ ऑपरेशन को उसने खुद लीड किया था लेकिन उसे कभी एक खरोंच भी नहीं आई थी. वो जांबाज़ था, उसकी मौत नहीं हुई है वो शहीद हुआ है."

उमड़ा जन सैलाब

मुंबई में हुए हमलों में कामांडो की सेवा ली गई थी

शहीद हवलदार गजेंद्र के 12 साल के बेटे गौरव के पास अपने पिता पर गर्व करने के लिए उनकी बहादुरी दिलेरी और हौसले की कहानियां होंगी. फिलहाल तो वो ऐसे दुख से घिरा है जो उसका बाल मन ही समझ सकता है.

अपने ताऊ की मदद से जब उसने अपने पिता को मुखाग्नि दी, अंतिम संस्कार के वक़्त उमड़े जन सैलाब की आंखों में बरबस ही आंसू भर आए.

कमांडो गजेंद्र की पत्नी गहरे सदमे में है और बात करने की हालत में नहीं है.

गजेंद्र के पड़ोसी दोस्त का कहना था, "वो एक दिलदार इंसान था. फौज में जाने से पहले भी उसकी दिलेरी की सभी तारीफ करते थे. जहां किसी को मदद चाहिए वो आगे आता. जहां कोई मुश्किल काम होता वो फौरन कूद पड़ता."

शायद यही ख़ूबी थी जिसकी वजह से गजेंद्र को एनएसजी की इस अहम मुहिम में शामिल किया गया था. उसकी यूनिट के दोस्तो का कहना है कि नरीमन हाउस में आतंकियों से लोहा लेने में भी वो आगे था. अपनी जान की परवाह किए बिना.

शहीद को आखिरी सलामी देने के लिए देहरादून के गणेशपुर गांव में सेना के बड़े अफसर आए थे.

फौजी का दायित्व

देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल आरएस सुजरावाला ने गजेंद्र के परिवार के साथ हार्दिक सहानुभूति जताते हुए कहा, "ये एक दुख की घड़ी तो है ही लेकिन गर्व की भी है. गजेंद्र ने एक सच्चे फौजी का दायित्व निभाया है जिसके लिये देश सबसे पहले था फिर देशवासी और सबसे अंत में खुद की ज़िंदगी."

शहीद गजेंद्र सिंह का मूल निवास उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग ज़िले में है.

वो कारगिल युद्ध में गया, जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों के ख़िलाफ़ कुछ ऑपरेशन को उसने खुद लीड किया था लेकिन उसे कभी एक खरोंच भी नहीं आई थी. वो जांबाज था, उसकी मौत नहीं हुई है वो शहीद हुआ है करण, गजेंद्र के दोस्त

वो कारगिल युद्ध में गया, जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों के ख़िलाफ़ कुछ ऑपरेशन को उसने खुद लीड किया था लेकिन उसे कभी एक खरोंच भी नहीं आई थी. वो जांबाज था, उसकी मौत नहीं हुई है वो शहीद हुआ है

गजेंद्र को श्रद्धांजलि देने आए उसी ज़िले से एक सैन्य अधिकारी कर्नल जीबी थपलियाल ने कह, "वो गजेंद्र के जज़्बे को सलाम करते हैं.यहां के लोग पीढ़ी दर पीढ़ी सेना में आते रहे हैं. और वे कई लड़ाईयों में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर चुके हैं. इन शहादतों में एक नाम गजेंद्र का भी जुड़ गया है."

गजेंद्र का बेटा गौरव अपने पिता को पंचतत्व में विलीन होते देखता रहा. उसके लिए अब तक की दुनिया एक बड़ी छांव थी लेकिन अब आगे उसे कड़े दिनों के लिए खुद को तैयार करना होगा.

सैन्य अधिकारियों ने गौरव को कमांडो गजेंद्र की टोपी और बेल्ट सौंपी और कहा कि घबराना नहीं. तुम्हारे पिता ने सबका मान बढ़ाया है.

दिलासा के इन शब्दों और थपथपाहटों के बीच गौरव जैसे किसी शून्य में निहार रहा था.

गजेंद्र की शहादत को प्रणाम करने जमा हुए लोग यही दुआ कर रहे थे कि ईश्वर उसे दुख के इस पहाड़ को संभालने और आगे बढ़ने के लिये मनोबल दे.

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts

Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more