आतंकियों को दफनाने से मुसलमानों का इंकार

मुस्लिमों की एक संस्था मुस्लिम काउंसिल ट्रस्ट ने मुंबई के कब्रिस्तानों से अपील की है कि वे मारे गए आतंकवादियों के शव स्वीकार न करें। जल्द ही यह ट्रस्ट मुंबई पुलिस से अपील करने वाला है कि आतंकियों के शव भारत की जमीन पर कहीं भी न दफनाएं जाएं।
ट्रस्ट के अध्यक्ष इब्राहिम ताई का मानना है कि आतंकवादियों को पुलिस यही सोच कर दफनाएगी कि वे मुसलमान हैं, लेकिन हम नहीं मानते कि वे मुसलमान हैं।
उन्होंने कहा कि इस्लाम में एक बूंद पानी भी बर्बाद करना गुनाह माना जाता है, लेकिन इन आतंकियों ने बेगुनाहों का खून बहाया है। जिन आतंकवादियों ने सैकड़ों बेकसूरों को मौत के घाट उतार दिया, वे मुसलमान हो ही नहीं सकते। इब्राहिम ने कहा कि इस्लाम अमन व शांति का पैगाम देता है। इसलिए हम इन आतंकियों को मुसलमान नहीं मानते।
किसी भी प्रकार की आतंकी घटनाओं में आतंकवादियों को दफनाने का काम इतनी जल्दी नहीं किया जाता है। सरकारी नियमों के मुताबिक 29 दिन तक शव के दावेदार का इंतजार किया जाता है।
किसी दावेदार के न आने पर पुलिस कुछ समाजसेवी संगठनों के साथ मिल कर शव को दफन करवा देती है। मुंबई में आये आतंकवादियों के शव पर तो समाजसेवी संगठन भी पैसा देने में कतरा रहे हैं।


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