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बेटे, रामू को घुमाने पर देशमुख की सफ़ाई

By Staff
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बेटे, रामू को घुमाने पर देशमुख की सफ़ाई

देशमुख को इस बात के लिए कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है कि वे अपने फ़िल्म अभिनेता बेटे रितेश और फ़िल्म निर्माता रामगोपाल वर्मा को अपने साथ हमलों के घटनास्थल पर ले गए थे.

भारतीय मीडिया ने आलोचना करते हुए इस दौरे को 'बेटे के साथ पिकनिक' करार दिया था, कांग्रेस पार्टी के कुछ नेताओं ने भी इसकी निंदा की थी.

देशमुख ने सफ़ाई देते हुए कहा है कि "ऐसा करने के पीछे कोई बुरी नीयत नहीं थी."

अगर मेरा बेटा मेरे साथ गया था तो इसमें क्या बुराई है, यह एक बड़ी घटना थी और वह देखना चाहता था विलासराव देशमुख

अगर मेरा बेटा मेरे साथ गया था तो इसमें क्या बुराई है, यह एक बड़ी घटना थी और वह देखना चाहता था

उन्होंने कहा, "घटनास्थलों पर बहुत सारे लोग आए थे, इस दौरे का टीवी फुटेज सरकार ने ही उपलब्ध कराया था."

समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में देशमुख ने कहा कि रितेश देशमुख के घटनास्थल पर जाने में कोई बुराई नहीं थी, उन्होंने कहा, "अगर मेरा बेटा मेरे साथ गया था तो इसमें क्या बुराई है, यह एक बड़ी घटना थी और वह देखना चाहता था."

रामगोपाल वर्मा की सफ़ाई

इस मामले पर फ़िल्म निर्माता रामगोपाल वर्मा ने पत्रकारों से कहा, "मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मुख्यमंत्री जी ने हमें आमंत्रित नहीं किया था, मेरा उनसे कोई औपचारिक परिचय भी नहीं है. हुआ ये था कि मैं रितेश देशमुख के साथ था जिन्हें मैं बहुत अच्छी तरह जानता हूँ."

मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मुख्यमंत्री जी ने हमें आमंत्रित नहीं किया था, मेरा उनसे कोई औपचारिक परिचय भी नहीं है. हुआ ये था कि मैं रितेश देशमुख के साथ था जिन्हें मैं बहुत अच्छी तरह जानता हूँ रामगोपाल वर्मा

मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मुख्यमंत्री जी ने हमें आमंत्रित नहीं किया था, मेरा उनसे कोई औपचारिक परिचय भी नहीं है. हुआ ये था कि मैं रितेश देशमुख के साथ था जिन्हें मैं बहुत अच्छी तरह जानता हूँ

वर्मा ने कहा कि उनका मुंबई के हमलों पर फ़िल्म बनाने का कोई इरादा नहीं है और वे संयोगवश वहाँ था.

रामगोपाल वर्मा ने कहा कि उनके घटनास्थल पर जाने को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर देखा जा रहा है, इस मामले को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए और सभी लोगों को मिल-जुलकर आतंकवाद का मुक़ाबला करना चाहिए.

आम जनता में इन हमलों को लेकर बहुत ग़ुस्सा है और वे ख़ास तौर पर नेताओं से नाराज़ हैं.

मुंबई में एक एसएमएस मैसेज भी हज़ारों लोगों को भेजा जा रहा है जिसमें फ़िल्म निर्माताओं से अपील की गई है कि वे इस घटना पर फ़िल्म बनाने के बारे में न सोचें.

संदेश में कहा गया, "हमारी प्यारी मुंबई पर हुए हमले पर एक वास्तविक फ़िल्म बनाने के नाम पर हमारा अपमान न करें."

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