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'सरकार की तरफ़ से तैयारी की कमी थी'

By रेहान फ़ज़ल
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विश्लेषकों की राय में चरमपंथी हमले रोकने के लिए पाकिस्तान पर दबाब बढ़ने की आवश्यकता है.
विश्लेषकों की राय में मुंबई में होने वाले हमले पहले से काफ़ी भिन्न थे लेकिन सरकार की तरफ़ से तैयारी में कमी साफ़ नज़र आ रही थी.

पेश है वरिष्ठ रक्षा विश्लेषिकों भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी 'रॉ' के पूर्व निदेशक आनंद कुमार वर्मा, इंडियन डिफ़ेंस रिव्यू के संपादक भरत वर्मा और भारत के पूर्व उप सुरक्षा सलाहकार और पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त रहे सतीश चंद्र की राय.

ये हमला पहले के हमलों से किस तरह भिन्न था?

भरत वर्मा के अनुसार ये हमलावार प्रशिक्षित थे और इन चरमपंथियों को सेना और ख़ुफिया विभाग के लोगों ने पेशेवर प्रशिक्षण दिया था और निशाना साधकर हमले किए गए. इन हमलों में सीधे तौर पर पाकिस्तान का हाथ था.

पहली बार भारत में अमरीकी, ब्रितानी और इसराइली लोगों को निशाना बनाया गया. इसका मतलब है कि अगर चरमपंथी विदेशियों पर उनके देशों में हमला नहीं कर सकते हैं पर भारत में तो कर ही सकते हैं. इस एक हमले से कई निशाने साधे गए हैं.

आनंद कुमार वर्मा के अनुसार ये हमला पहले के हमलों का विस्तार है और ऐसा लगता है कि ऐसे ही हमले आगे और भी हो सकते हैं. इन हमलों की तकनीक अलग थी, हमले से पहले ज़बर्दस्त तैयारी की गई थी और काफ़ी सूझबूझ के साथ इसे अंज़ाम दिया गया था.

हमलों में तीन चरण थे, जो पहले कभी नहीं देखे गए. पहला आम लोगों पर फ़ायरिंग की गई. दूसरे हथगोले फेंके गए और विस्फोटकों का इस्तेमाल किया. स्वचालित बंदूक़ों का भी इस्तेमाल किया गया और कोशिश की गई कि मुठभेड़ देर तक चले.

पूरी कार्रवाई के दौरान भारत की प्रतिक्रिया

विश्लेषकों की राय में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के दौरान तैयारी की कमी दिखी.

सतीश चंद्र का कहना है कि चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई और बेहतर ढ़ंग से हो सकती थी. राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के कमांडो आख़िर देर से क्यों पहुंचे. उनका कहना था कि जब पहले से सरकार को पता है ऐसे हमले हो सकते हैं ऐसे में ख़ुफ़िया तंत्र ने एहतियाती क़दम क्यों नहीं उठाए.

जब चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जा रही थी उस समय भी कुछ गलतियाँ की गई और कुछ जानकारियाँ मीडिया में ऐसी चली गई जिन्हें नहीं जाना चाहिए था. ये सब तैयारी में कमी के उदाहरण हैं.

उनका कहना था कि जब हमें पता है कि इसमें पाकिस्तान का हाथ है तो इसके ख़िलाफ़ कठोर क़दम उठाने चाहिए. उनके अनुसार इन हमलों में पाकिस्तान, एलटीटीई और दाऊद इब्राहीम का हाथ था.

आनंद कुमार वर्मा भी मानते है कि भारत की जवाबदही कमज़ोर रही क्योंकि कानून और व्यवस्था राज्यों का विषय है और ये संवैधानिक कमज़ोरी है. इसकी वजह से भी कार्रवाई में देरी हुई.

भरत वर्मा के अनुसार भारत के 'हारने की मानसिकता' के कारण रेस्पॉंस टाइम बढ़ा. वैसे एनएसजी कमांडो के पहुँचने से पहले मुंबई में मौजूद सेना को लगा देना चाहिए.

भारत- पाकिस्तान से रिश्तों पर इसका असर

आनंद कुमार वर्मा के मुताबिक़ भारत को पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंध तोड़ लेने चाहिए. सिंधु जल समझौते को तोड़ पाकिस्तान का पानी बंद कर दबाब बढ़ाना चाहिए.

सतीश के अनुसार भी पाकिस्तान पर दबाब बढ़ने की आवश्यकता है. पाकिस्तान से सिंधु जल समझौता हर हाल में तोड़ लेना चाहिए. सिंधु जल समझौते के अंदर भी फ़ौरी तौर पर पूर्वी क्षेत्र को दिए जा रहे पानी को भी बंद कर देना चाहिए.

चरमपंथी हमलों को रोकने के उपाय

सतीश चंद्र के अनुसार आतंकवाद को बेअसर करने की आवश्कता है. भारत को इससे लड़ने की क्षमता बढ़ाने पर ज़ोर देना चाहिए.

भरत वर्मा के अनुसार पुलिस में सुधार की ज़रूरत है. हारने और निष्क्रिय रहने की आदत को बंद की जानी चाहिए अर्थात भारत को दिमाग़ी तौर पर भी तैयार होना चाहिए.

उनके अनुसार अक्रामक होने का साथ-साथ दुश्मन को दुश्मन के घर में घुस कर मारने की ज़रूरत है.

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