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हरकत में आने में कोई देर नहीं: एनएसजी

By Staff
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मीडिया में ये सवाल उठाए जा रहे हैं कि एनएसजी के कमांडो को मुंबई पहुँचने में देर क्यों हुई.
राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड्स ने कहा है कि मुंबई में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ हरकत में आने में देर नहीं हुई और कार्रवाई के दौरान चरमपंथियों ने कोई माँग नहीं रखी.

एनएसजी महानिदेशक ने ये भी कहा, "पूरी कार्रवाई के दौरान चरमपंथियों ने कोई माँग नहीं रखी और ये कहना सही नहीं होगा कि उनके पास इतने विस्फोटक थे कि वे ताज की इमारत को ही ध्वस्त कर सकें."

पूरी कार्रवाई के दौरान चरमपंथियों ने कोई माँग नहीं रखी और ये कहना सही नहीं होगा कि उनके पास इतने विस्फोटक थे कि वे ताज की इमारत को ही ध्वस्त कर सकें. कमांडोस के जैसे ही जानकारी मिली वे निर्धारित समय के भीतर तैयार थे. हरकत में आने में कोई देर नहीं हुई

'कमरों में आग, कई बंधक'

एनएसजी महानिदेशक जेके दत्त ने ये भी कहा, "एनएसजी को एक ड्रिल के तहत सूचना मिलने के बाद निश्चित समय में पूरी तरह से हथियारों और अन्य सामग्री के साथ तैयार होना होता है. कमांडोस के जैसे ही जानकारी मिली वे निर्धारित समय के भीतर तैयार थे. विमान में ईंधन भरा गया और वह दिल्ली से मुंबई पहुँचा. जैसे ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने एनएसजी की माँग की थी वैसे ही 191 कमांडो का दस्ता तैयार हो गया. हरकत में आने में कोई देर नहीं हुई."

एनएसजी की ओर से कार्रवाई शुरु होने में देर होने का बयान ऐसे वक्त में आया है जब इस बात पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि एनएसजी के कमांडो मुंबई में कार्रवाई के लिए घटनाओं के कई घंटे बाद क्यों पहुँचे.

कुछ समाचार माध्यमों और पूरे घटनाक्रम पर नज़र रख रहे लोगों ने एनएसजी के कमांडोस के हमले के लगभग नौ घंटे बाद कार्रवाई शुरु करने पर सवाल उठाए हैं. ग़ौरतलब है कि एनएसजी के कमांडो 27 तारीख को भारतीय समयानुसार सुबह सात बजे ही चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अपना ऑपरेशन शुरू कर पाए थे.

मुंबई में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई में कई एनएसजी कमांडों भी मारे गए थे

जेके दत्त ने रविवार को दिल्ली में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा, "मुंबई में हमला करने वाले आतंकवादी पूरी तरह से प्रशिक्षित थे और उन्हें ताज होटल के नक्शे, भीतरी संरचना के बारे में पूरी जानकारी थी और उनके पास दो जीआरपीएस भी थे जिससे उपग्रह के ज़रिए नक्शे देखे जा सकते हैं. वो बग़ैर किसी ग़लती या अड़चन के एक जगह से दूसरी जगह जा रहे थे."

उन्होंने बताया कि एनएसजी को भी होटल के लेआउट की कॉपी मिल गई थी, हालांकि उनकी टीम के लोग चरमपंथियों की तरह होटल के लेआउट से परिचित नहीं थे.

जेके दत्त के अनुसार चरमपंथियो के ख़िलाफ़ कार्रवाई में इसलिए परेशानी हो रही थी क्योंकि तीनों जगहों यानी नारीमन हाउस, ताज और ओबेरॉय के कमरों में आग लगी थी और बड़ी तादाद में आम लोग इन जगहों पर बंधक थे या फंसे हुए थे. इस स्थिति में एनएसजी पर ये भी दबाब था कि उनकी कार्रवाई में मासूम लोग न मारे जाएँ.

जेके दत्त ने कहा, "मुझे हर्ष है कि एमएसजी की कार्रवाई से किसी आम नागरिक और बंधक के हताहत होने की कोई ख़बर नहीं है. अधिकतर लोगों की मौत चरमपंथियों की फ़ायरिंग और धमाकों की वजह से हुई. उन्होंने बताया कि चरमपंथियों ने कार्रवाई के दौरान जब़र्दस्त हथगोले फेंके, धमाके किए और फ़ायरिंग की.

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