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पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह नहीं रहे

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V P Singh
देश में अहम राजनीतिक और सामाजिक बदलाव देने वाले भारत के पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह का गुरुवार को निधन हो गया. वह दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती थे और लंबे अरसे से बीमार चल रहे थे।

उनकी उम्र 77 साल की थी। वीपी सिंह दो दिसंबर 1989 से लेकर 10 नवंबर 1990 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। इंदिरा गांधी के शासन काल में वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे।

वीपी सिंह को भारत की राजनीति में मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू कराने और बोफोर्स मुद्दे को उठाकर इतिहास में पहली बार कांग्रेस को लंबे अर्से तक राजनीतिक नुकसान पहुंचाने के चलते हमेशा याद किया जाएगा। इसके अलावा भी भारत के राजनीति ध्रुवीकरण में वीपी सिंह का अहम योगदान रहा है।

यहां 7 अगस्त 1990 को विश्वनाथ प्रताप सिंह ने रिपोर्ट लागू करने की घोषणा की और इसके बाद 10 अगस्त 1990 आयोग की सिफारिशों के तहत सरकारी नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था करने के ख़िलाफ़ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू। 13 अगस्त 1990 मंडल आयोग की सिफारिश लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी गई।

वीपी सिंह नई दिल्ली के अपोलो अस्पताल में निधन हुआ। इससे पहले गुर्दे और हृदय की समस्याओं से पीड़ित वीपी सिंह को बॉम्बे अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में भर्ती कराया गया था।

76 वर्षीय सिंह के गुर्दे और दिल की बीमारियों का इलाज चल रहा था। आम तौर पर उनका नई दिल्ली स्थित अपोलो अस्पताल में या मुंबई के बॉम्बे अस्पताल में डायलिसिस होता था। वे सन 1991 से ब्लड कैंसर जैसी बीमारी से भी जूझ रहे थे मगर इसके बावजूद उन्होंने सक्रिय राजनीतिक जीवन नहीं छोड़ा।

वीपी सिंह एक राजनेता होने के अलावा संवेदनशील कवि और चित्रकार के रूप में भी जाने जाते थे। उनके कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं और कई कला प्रदर्शिनियों में उनकी बनाई तस्वीरें भी सराही गई थीं। उनकी एक कविता की पंक्तियां हैं...

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