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अमरीकाः बैंकों को 800 अरब डॉलर की सहायता

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अमरीका में अब तक दी गई सहायता के बाद भी मंदी गहराती जा रही है
अमरीका के केंद्रीय बैंक फ़ेडरल रिज़र्व ने वित्तीय व्यवस्था को स्थिर करने के लिए अर्थव्यवस्था में 800 अरब डॉलर और डालने का फ़ैसला किया है. अमरीकी वित्तमंत्री हेनरी पॉलसन ने कहा है यह राशि उपभोक्ताओं को अधिक कर्ज़ उपलब्ध करवाने की दृष्टि से दी जा रही है.

इसमें से 600 अरब डॉलर का उपयोग मकानों के लिए गए कर्ज़ की प्रतिभूतियों या ज़मानत को छुड़ाने के लिए किया जाएगा जबकि 200 अरब डॉलर से उपभोक्ता कर्ज़ बाज़ार का बोझ कम करने के लिए किया जाएगा.

अमरीकी सरकार को यह क़दम इसलिए उठाना पड़ा है क्योंकि मंदी के लगातार गहराते जाने की वजह से अमरीकी वित्तीय संस्थाएँ कर्ज़ देने से कतरा रही हैं. 800 अरब डॉलर की सहायता की यह घोषणा पहले दिए गए 700 अरब डॉलर के पैकेज के अतिरिक्त है.

संकट

वित्तमंत्री पॉलसन का कहना है कि अक्तूबर से ही क्रेडिट कार्ड, कार लोन और छात्रों को दिए जाने वाला कर्ज़ बंद हो चुका है. उनका कहना है कि ताज़ा सहायता का उद्देश्य इस तरह की सभी सेवाओं को पहले की ही तरह से बहाल कर सामान्य स्थिति में लाना है.

हम अपने वित्तीय बाज़ारों को स्थिर करने और उनको मज़बूत करने के लिए वो सभी उपाय करेंगे जो हमारे बस में हैं और कोशिश करेंगे कि इसका असर बाक़ी अर्थव्यवस्था पर न्यूनतम हो

उनका कहना था, "बाज़ार और अर्थव्यवस्था में समस्याओं से निपटने में समय लगेगा और नई समस्याएँ सामने आती रहेंगीं."

उन्होंने कहा, "हम अपने वित्तीय बाज़ारों को स्थिर करने और उनको मज़बूत करने के लिए वो सभी उपाय करेंगे जो हमारे बस में हैं और कोशिश करेंगे कि इसका असर बाक़ी अर्थव्यवस्था पर न्यूनतम हो."

इस अतिरिक्त सहायता की घोषणा वाणिज्य विभाग के उन आंकड़ों के बाद की गई है जिसमें दिखाया गया है कि जुलाई-सितंबर के बीच अर्थव्यस्था पहले की गई भविष्यवाणियों की तुलना में ज़्यादा तेज़ी से सिकुड़ रही है.

इन आंकड़ों को अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने 'परेशान करने वाला' बताया है.

इन आँकड़ों के अनुसार पहले अनुमान लगाया गया था कि तीसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद में 0.3 प्रतिशत की गिरावट आएगी लेकिन यह गिरावट 0.5 प्रतिशत दर्ज़ की गई और इन तीन महीनों में उपभोक्ताओं ने खर्च में सबसे बड़ी मात्रा में कटौती की है जो 28 सालों के इतिहास में सबसे अधिक है.

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता का कहना है कि इन आंकड़ों के बाद यह क़दम उठाया गया है. इस ताज़ा सहायता की घोषणा का आमतौर पर स्वागत किया गया है.

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