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'पेट्रोलियम की क़ीमतों में कमी चुनाव के बाद'

By Staff
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कच्चे तेल के दामों में कमी के कारण पेट्रोल-डीज़ल के दाम घटाने का दबाव सरकार पर है
पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने कहा है कि पेट्रोलियम की क़ीमतों में कमी चुनाव के बाद होगी. लेकिन भाजपा ने इसे आचार संहिता का उल्लंघन बताया है.

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में क़ीमतों में आई कमी का ज़िक्र करते हुए कहा कि कच्चे तेल की क़ीमतें 147 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 50 डॉलर के क़रीब आ गई है इसलिए देश में पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतों में कमी होनी चाहिए.

उधर पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतों में कमी करने की इस घोषणा का मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा ने विरोध करते हुए कहा है कि चुनाव के बीच में की गई यह घोषणा आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है.

भाजपा ने इसकी शिकायत चुनाव आयोग से भी करने की बात कही है.

उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी के बाद सरकार ने जून में पेट्रोल की क़ीमतों में पाँच रुपए और डीज़ल की क़ीमतों में तीन रुपए प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी की थी. एपीजी की क़ीमतों में 50 रुपए प्रति सिलेंडर की बढ़ोत्तरी की गई थी.

घोषणा और राजनीति

यह आचार संहिता का उल्लंघन है. नियम साफ़ हैं. जब चुनाव चल रहे हों तो सरकार प्रत्यक्ष रुप से या परोक्ष रुप से ऐसी कोई घोषणा नहीं कर सकती जिससे मतदाता प्रभावित होता हो

आंकड़े बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतों में कमी के बाद से सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम पिछले नवंबर से लाभ अर्जित कर रहे हैं.

दिल्ली में पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने कहा, "कच्चे तेल की क़ीमतें 147 डॉलर से घटकर अब 50 डॉलर के आसपास आ गई हैं. स्वाभाविक तौर पर उम्मीद की जा रही है कि पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों में कटौती की जाए और अब हम यह करेंगे."

उन्होंने कहा, "हमें क़ीमतें घटानी है लेकिन यह विधानसभा चुनाव के बाद ही हो सकेगा."

जम्मू कश्मीर सहित छह राज्यों के चुनाव 24 दिसंबर को पूरे होंगे और तब तक आदर्श आचार संहिता के कारण सरकार पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतों में कमी नहीं कर सकती.

हालांकि पेट्रोलियम मंत्री की इस घोषणा से भी मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी नाराज़ है कि चुनाव के दौरान की गई यह घोषणा आचार संहिता का उल्लंघन है.

मुरली देवड़ा के बयान पर भाजपा चुनाव आयोग में शिकायत करने जा रही है

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार भाजपा के प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा, "यह आचार संहिता का उल्लंघन है. नियम साफ़ हैं. जब चुनाव चल रहे हों तो सरकार प्रत्यक्ष रुप से या परोक्ष रुप से ऐसी कोई घोषणा नहीं कर सकती जिससे मतदाता प्रभावित होता हो."

उनका कहना था, "अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के दामों में कमी बहुत पहले से आ गई है लेकिन कांग्रेस को क़ीमतें अब घटा रही है."

रविशंकर प्रसाद का कहना था कि जब दिल्ली में चुनाव को सिर्फ़ तीन दिन ही बचे हैं तो यह मतदाता को लुभाने की कोशिश के अलावा कुछ नहीं है.

हालांकि वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने भाजपा की इस आपत्ति को ख़ारिज करते हुए कहा है कि पेट्रोलियम मंत्री ने क़ीमतें घटाने की नहीं, क़ीमतें घटाने पर विचार करने की बात कही है तो इसमें आचार संहिता का उल्लंघन कैसे हो सकता है.

क़ीमतें

समाचार एजेंसियों ने ख़बर दी है कि चुनावों के बाद संभावना है कि सरकार पेट्रोल की क़ीमतों में पाँच रुपए प्रति लीटर और डीज़ल की क़ीमतों में तीन रुपए प्रति लीटर की कमी कर सकती है.

पेट्रोलियम मंत्रालय ने माना है कि पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों को लेकर अब तेल कंपनियाँ सुविधाजनक स्थिति में हैं.

तेल कंपॉनियों को कैरोसिन में प्रति लीटर 22.40 रुपए और एलपीजी में प्रति सिलेंडर 343.49 रुपए का नुक़सान अभी भी हो रहा है

हालांकि पेट्रोलियम सचिव आरएस पांडे का कहना है कि मिट्टीतेल यानी कैरोसिन और एलपीजी में अभी भी तेल कंपनियों को बड़ा नुक़सान हो रहा है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उनका कहना था, "तेल कंपॉनियों को कैरोसिन में प्रति लीटर 22.40 रुपए और एलपीजी में प्रति सिलेंडर 343.49 रुपए का नुक़सान अभी भी हो रहा है."

उनका कहना था कि इन दोनों का घाटा मिलाकर प्रतिदिन 80 करोड़ रुपए प्रतिदिन का घाटा तेल कंपनियों को होता है.

उनका कहना था कि इस साल के मध्य में जब पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतें बढ़ाई गईं तब तक तेल कंपनियों को 14 हज़ार करोड़ रुपए का घाटा हो चुका था.

पेट्रोलियम सचिव ने कहा कि इस घाटे को कैसे पूरा किया जाएगा इस पर मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति को विचार करना है.

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