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'नोट दो, वोट दो, बेईमानों को चोट दो'

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शमीम मोदी ग़ैर सरकारी संस्था श्रमिक आदिवासी संगठन भी चलाती हैं
वोट के लिए 'नोट' देने के कई मामले प्रकाश में आए हैं लेकिन मध्य प्रदेश में एक उम्मीदवार मतदाताओं से वोट के साथ-साथ नोट भी माँग रही हैं.

ये हैं समाजवादी जन परिषद की उम्मीदवार शमीम मोदी जो विधानसभा चुनाव में हरदा से अपना भाग्य आज़मा रही हैं.

वो पिछले कई वर्षो से मध्य प्रदेश के बैतूल, हरदा, होशंगाबाद और खंडवा ज़िले में एनजीओ 'श्रमिक आदिवासी संगठन' के ज़रिए दलितों और आदिवासियों के बीच सक्रिय रही हैं.

दलितों और आदिवासियों को सामाजिक रुप से सशक्त बनाने की इस मुहिम में शमीम मोदी के पति अनुराग मोदी भी अहम भूमिका निभाते रहे हैं.

हमारे पास अन्य दलों की तरह चुनाव लड़ने के लिए पैसा नहीं है. इसलिए हम हर मतदाता से वोट के साथ-साथ चंदा भी माँगते हैं. आज ही मुझे इस गाँव से 250 रूपए चंदे के रुप में मिल गए

अनुराग मोदी कहते हैं, "जब हमें लगा कि सिर्फ़ एनजीओ से हम कुछ ख़ास हासिल नहीं कर सकते तो हमने इसका राजनीतिक मंच 'समाजवादी जन परिषद' खड़ा किया और चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया."

इस बार समाजवादी जन परिषद ने पाँच सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं. पिछले चुनाव में शमीम मोदी हार गई थीं लेकिन इस बार विश्लेषकों की राय में उनकी स्थिति बेहतर है.

वोट दो, नोट दो..

चुनाव प्रचार के आख़िरी दिन एक सुदूरवर्ती गाँव का दौरा कर लौट रहीं शमीम मोदी कहती हैं, "हमारे पास अन्य दलों की तरह चुनाव लड़ने के लिए पैसा नहीं है. इसलिए हम हर मतदाता से वोट के साथ-साथ चंदा भी माँगते हैं. आज ही मुझे इस गाँव से 250 रूपए चंदे के रुप में मिल गए."

शमीम मोदी की सभाओं में अच्छी भीड़ जुट रही है

इस पार्टी का नारा है, "नोट दो, वोट दो, बेईमानों को चोट दो."

हरदा ज़िले में आदिवासियों की जनसंख्या 37 फ़ीसदी से ज़्यादा है. शमीम मोदी कहती हैं, "आप यहाँ आईए और देखिए, विकास के सरकारी दावों की पोल खुल जाएगी. न बिजली है, न सड़क. विकास के लिए पैसे आए और कहाँ गए किसी को पता नहीं."

जन परिषद ने भ्रष्टाचार और क़ानून-व्यवस्था को मुख्य मुद्दा बनाया है. शमीम मोदी कहती हैं, "किसानों की आत्महत्या के साथ-साथ यहाँ आदिवासियों के उत्पीड़न की कई घटनाएँ सामने आई हैं लेकिन सरकार ने कुछ नहीं किया."

घोषणापत्र

इस सीट पर शमीम मोदी को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मौजूदा विधायक कमल पटेल से कड़ी चुनौती मिल रही है जो पिछले 15 वर्षों से इस सीट पर जीत का परचम लहराते आए हैं.

लेकिन भाजपा से अलग हुईं उमा भारती की पार्टी ने अशोक गुर्जर को टिकट थमा कर इस बार उनकी स्थिति कमज़ोर कर दी है. अशोक गुर्जर भाजपा के पुराने कार्यकर्ता रहे हैं लेकिन टिकट नहीं मिलने से वो बाग़ी हो गए.

जब हमें लगा कि सिर्फ़ एनजीओ से हम कुछ ख़ास हासिल नहीं कर सकते तो हमने इसका राजनीतिक मंच 'समाजवादी जन परिषद' खड़ा किया और चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया

कांग्रेस ने हेमंत ताले को उम्मीदवार बनाया है. विश्लेषकों का कहना है कि अशोक गुर्जर के चुनाव मैदान में होने का सीधा फ़ायदा शमीम मोदी को मिल सकता है.

समाजवादी जन परिषद ने अपने घोषणापत्र में प्रशासनिक सुधार, दलितों-आदिवासियों के विकास का वादा किया है और वह सशक्त विपक्ष की भूमिका निभाने का वादा कर रही है.

पार्टी के नेता अनुराग मोदी कहते हैं, "हमारा घोषणापत्र अन्य दलों से कुछ अलग है. दूसरी पार्टियाँ हारने के बाद घोषणापत्र को रद्दी की टोकरी में फेंक देती हैं लेकिन अगर हम हार भी गए तो भी इस पर अमल करेंगे."

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