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बसपा को दलित-ब्राह्मण गठजोड़ का सहारा

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बहुजन समाज पार्टी अपने 'सोशल इंजीनयरिंग' के फ़ॉर्मूले को मध्य प्रदेश में लागू करने की उम्मीद के साथ इस बार विधानसभा चुनाव मैदान में उतरी है. उत्तर प्रदेश में अपने ब्रह्मण-दलित वोट बैंक तैयार करने का 'सोशल इंजीनयरिंग' दिखा चुकी मायावती को उम्मीद है कि वह मध्य प्रदेश में भी कुछ ऐसा ही कमाल दिखाएंगी.

बसपा ने राज्य की सभी 230 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं और यहाँ भी बड़े पैमाने पर ब्राह्मणों और राजपूतों को टिकट दिए गए हैं. मायावती ने इस बार लगातार पाँच दिनों तक मध्य प्रदेश में मौजूद रहकर चुनाव प्रचार किया है. पार्टी का सर्वजन समाज सम्मलेन, ब्रह्मण सम्मलेन वगैरह तो पिछले कई महीनों से जारी था.

सवर्ण प्रेम

मायावती के साथ आए पार्टी महासचिव सतीशचंद्र जैन ने ख़ास तौर पर छतरपुर में चुनाव सभा में अपने भाषण में बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया कि बसपा सवर्ण विरोधी नहीं क्योंकि अगर ऐसा होता तो मायावती उन्हें पार्टी में इतना उच्च स्थान क्यों देती.

बसपा ने कुछ कद्दावर लोगों को टिकट थमाए हैं. बुंदेलखंड और इससे सटे विंध्य में ब्राह्मणों और राजपूतों के काफ़ी वोट हैं. कुछ यही हाल है ग्वालियर-चंबल संभाग का जहाँ पिछले चुनाव में बीएसपी को दो सीटें मिली थी.

अपने भाषण में मायावती ने कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश में ग़रीबों को तीन-तीन एकड़ ज़मीन के पट्टे दिए हैं जिससे तीन लाख से ज़्यादा लोगों को फ़ायदा हुआ है और उच्च वर्ग के ग़रीबों को दो कमरों के मकान की व्यवस्था की गई है.

उन्होंने कहा कि यदि केंद्र में बसपा की सरकार बनेगी तो सवर्ण जाति से ताल्लुक रखने वाले ग़रीबों को भी आरक्षण की सुविधा दिए जाने की व्यवस्था की जाएगी.

ग्वालियर- चंबल के कुछ इलाक़ों में ब्राह्मण बसपा को वोट देंगें क्योंकि वह इस इलाके में स्थापित राजपूतों के वर्चस्व को तोड़ना चाहते हैं
भाषण के दौरान उन्होंने सरकार में आने पर एक पृथक बुंदेलखंड राज्य बनाने की घोषणा भी की जिस पर मैदान के कुछ हिस्से से तालियों की आवाज़ भी आई.

हालांकि उन्हीं के कुछ उम्मीदवारों ने कहा कि इस मामले का पार्टी को बहुत लाभ नहीं मिलेगा क्योंकि मध्य प्रदेश के हिस्से में पड़ने वाले बुंदेलखंड निवासी उत्तर प्रदेश के हिस्से के साथ मिलने के इच्छुक नहीं है क्योंकि वह इलाक़ा बिलकुल पिछड़ा हुआ है.

दूसरी ओर मध्य प्रदेश वाले हिस्से में पिछले वर्षों में हालत काफ़ी बेहतर हुए हैं.

बेहतर प्रदर्शन की आस

लोग बीएसपी को पिछले चुनाव में लगभग सत्तर सीटों पर 10 से 50 हज़ार, सात में तीस हज़ार से अधिक और लगभग दो दर्जन क्षेत्रों में 20 से 30 हज़ार मिले वोटों को गिना कर कह रहे हैं कि इस चुनाव में पार्टी बहुत बेहतर प्रदर्शन करेगी क्योंकि ब्राह्मण उसके साथ जुड़ गए हैं.

मध्य प्रदेश में अभी बीएसपी के 'सोशल इंजीनियरिंग' की स्थितियाँ तैयार नहीं हुई हैं और लोगों को यह नहीं भूलना चाहिए की पिछले चुनाव में भी कई जगह वोट काटने के बावजूद बसपा राज्य में दो सीटें ही जीत पाई थी
गुना स्थित संजीव शर्मा कहते हैं कि कुछ हिस्सों, जैसे ग्वालियर- चंबल के कुछ इलाक़ों में ब्राह्मण बसपा को वोट देंगें क्योंकि वह इस इलाके में स्थापित राजपूतों के वर्चस्व को तोड़ना चाहते हैं.

हालांकि इसके विरुद्ध यह तर्क भी दिया जाता है कि जब ब्रह्मणों और अन्य सवर्णों को मध्य प्रदेश की सत्ता में भागेदारी है तो वह बसपा की ओर क्यों जाएँगें?

वरिष्ठ पत्रकार गिरिजाशंकर का कहना है की मध्य प्रदेश में अभी बीएसपी के 'सोशल इंजीनियरिंग' की स्थितियाँ तैयार नहीं हुई हैं और लोगों को यह नहीं भूलना चाहिए की पिछले चुनाव में भी कई जगह वोट काटने के बावजूद बसपा राज्य में दो सीटें ही जीत पाई थी.

बसपा की चुनावी मैदान में मौजूदगी को भारतीय जनता पार्टी यह बता कर अपने लिए फ़ायदे का सौदा बता रही है कि वह कांग्रेस का वोट काटेगी लेकिन राज्य में कई सीटें ऐसी हैं जहाँ बसपा की मौजूदगी कांग्रेस नहीं भाजपा को नुकसान देगी.

कांग्रेस के कुछ नेता 'बसपा फ़ैक्टर' को लेकर परेशान हैं. उनका तो यह भी आरोप है कि मायावती चुनाव जीतने के लिए नहीं बल्कि कांग्रेस को हराने के लिए लड़ रही हैं. उत्तर प्रदेश के बाद कांग्रेस का अन्य राज्यों में भी कमज़ोर होना ही बसपा सुप्रीमो के प्रधानमंत्री बनने की आकांक्षा को पूरा कर सकता है.

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