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गिर गया भारतीय फुटबाल का 'लैंप पोस्ट'

By Staff
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नई दिल्ली, 25 नवंबर (आईएएनएस)। भारत के सबसे प्रतिभाशाली फुटबाल खिलाड़ियों में एक पीटर थंगाराज अब इस दुनिया में नहीं रहे। एक गोलकीपर के तौर पर दुनियाभर में अपने फन का लोहा मनवाने वाले थंगाराज की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण यही था कि उनके साथी उन्हें 'लैंप पोस्ट' कहकर पुकारते थे।

नई दिल्ली, 25 नवंबर (आईएएनएस)। भारत के सबसे प्रतिभाशाली फुटबाल खिलाड़ियों में एक पीटर थंगाराज अब इस दुनिया में नहीं रहे। एक गोलकीपर के तौर पर दुनियाभर में अपने फन का लोहा मनवाने वाले थंगाराज की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण यही था कि उनके साथी उन्हें 'लैंप पोस्ट' कहकर पुकारते थे।

छह फुट लंबे थंगाराज को भारतीय और एशियाई फुटबाल की दुनिया में उनके समर्पण, जुझारूपन और गोलपोस्ट के अंदर शानदार नियंत्रण के लिए याद किया जाएगा।

दो बार ओलंपिक खेलों में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके थंगाराज का जन्म 1936 में आंध्रप्रदेश में हुआ था। अपने चमकदार करियर के दौरान उन्होंने भारतीय टीम के अलावा मद्रास रेजीमेंटल सेंटर, मोहन बागान, ईस्ट बंगाल, मोहम्मडन स्पोर्टिग क्लब जैसी शीर्ष टीमों का प्रतिनिधित्व किया।

थंगाराज 1962 के जकार्ता एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य थे। उन्होंने दो बार एशियाई ऑल स्टार टीम का प्रतिनिधित्व किया था।

वर्ष 1958 में उन्हें एशिया का सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर चुना गया और वर्ष 1967 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

मजेदार बात यह है कि थंगाराज ने अपने करियर की शुरुआत बतौर गोलकीपर नहीं की थी। 50 के दशक में वे जब मद्रास रेजीमेंटल सेंटर टीम में चुने गए थे, तब वे सेंटर फारवर्ड खिलाड़ी हुआ करते थे।

कुछ वर्षो तक सेंटर फारवर्ड के तौर पर खेलने के बाद उन्होंने गोलकीपर के तौर पर अपनी किस्मत आजमाने की ठानी और इसी के माध्यम से दुनिया भर में छा गए।

1956 के मेलबर्न और 1960 के रोम ओलंपिक में थंगाराज ने भारतीय फुटबाल के दो अन्य धुरंधरों-चुन्नी गोस्वामी और पी.के. बनर्जी के साथ जबरदस्त धूम मचाई। मेलबर्न में भारतीय टीम चौथे स्थान पर रही थी। ओलंपिक खेलों में भारतीय फुटबाल टीम का यह अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है।

थंगाराज ने 1960 में सर्विसेज की टीम को अपनी कप्तानी में संतोष ट्राफी का खिताब दिलाया था। 1960 से 1969 तक थंगाराज पांच अलग-अलग टीमों के लिए खेले।

वर्ष 1976 से 1995 तक वे बोकारो स्टील प्लांट की टीम के कोच रहे। इसके बाद वे भिलाई स्टील प्लांट टीम के सलाहकार के तौर पर जुड़ गए। रिटायर होने के बाद थंगाराज बोकारो लौट आए थे, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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