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आडवाणी भाजपा के लिए सर्वोत्तम हो सकते हैं, मगर देश के लिए नहीं : गोविंदाचार्य

By Staff
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नई दिल्ली, 25 नवंबर(आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के पूर्व महासचिव के.एन. गोविंदाचार्य ने कहा है कि भाजपा में प्रतिभा की कमी के कारण ही लालकृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार चुना गया। गोविंदाचार्य के अनुसार आडवाणी हिंदुत्व आंदोलन के स्वाभाविक नेता नहीं हैं और देश में मौजूदा आर्थिक संकट के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी को जिम्मेदार हैं। गोविंदाचार्य के अनुसार आगामी संसदीय चुनाव में भाजपा सत्ता में नहीं आ सकेगी।

नई दिल्ली, 25 नवंबर(आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के पूर्व महासचिव के.एन. गोविंदाचार्य ने कहा है कि भाजपा में प्रतिभा की कमी के कारण ही लालकृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार चुना गया। गोविंदाचार्य के अनुसार आडवाणी हिंदुत्व आंदोलन के स्वाभाविक नेता नहीं हैं और देश में मौजूदा आर्थिक संकट के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी को जिम्मेदार हैं। गोविंदाचार्य के अनुसार आगामी संसदीय चुनाव में भाजपा सत्ता में नहीं आ सकेगी।

किसी समय आडवाणी के बेहद करीबी रहे गोविंदाचार्य ने एक खास बातचीत के दौरान कहा, "आडवाणी का चयन भाजपा के लिए सर्वोत्तम हो सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि वह देश के लिए भी सर्वोत्तम हो। दरअसल, जिस संगठन ने उन्हें चुना है, वह इतना कमजोर है कि उसमें आडवाणी ही सर्वोत्तम निकले।''

ज्ञात हो कि गोविंदाचार्य ने वर्ष 2000 में भाजपा से त्यागपत्र दे दिया था और वह आत्मचिंतन और अध्ययन के लिए अवकाश पर चले गए थे। हाल ही में वह उमा भारती की पार्टी भारतीय जन शक्ति (भाजश) के सर्वेसर्वा के रूप में राजनीति में फिर सक्रिय हुए हैं।

गोविंदाचार्य ने कहा, "आडवाणी हिंदुत्व आंदोलन के स्वाभाविक नेता नहीं है। वह एक सही आंदोलन के गलत नेता बन गए। उनकी कथनी और करनी में भारी अंतर है। उनका 'भारत' संविधान सभा मे हुई बहसों से शुरू होता है। वह यूरोप व पश्चिम के राष्ट्र-राज्य के सिद्धांत से प्रभावित हैं, भू-संस्कृति के सिद्धांत से नहीं।''

वर्ष 2005 में पाकिस्तान दौरे के दौरान मोहम्मदअली जिन्ना पर दिए गए आडवाणी के विवादित बयान पर टिप्पणी करते हुए गोविंदाचार्य ने कहा, "यदि उनके पास साहस होता तो वह पार्टी से अलग हो जाते, और चाहे कुछ भी हो जाता, अपने बयान पर कायम रहते। जिन्ना विवाद के समय मैंने उन्हें एक संदेश भेजा था और पूछा था- क्या आपके पास अपने सिद्धांतों पर चलने व आम जन के मुद्दे उठाने का साहस है।''

सक्रिय राजनीति में अपनी वापसी की घोषणा करते हुए गोविंदाचार्य ने पिछले सप्ताह कहा था कि वह एक ऐसा नया राजनीतिक मंच खड़ा करना चाहते हैं, जो भारत समर्थक व गरीब समर्थक हो और राजनीति में विचारधारा व आदर्शवाद को वापस लाने की कोशिश कर सकता हो।

पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी के बारे में गोविंदाचार्य का मानना है कि अब वह अप्रासंगिक हो चुके हैं। उन्होंने कहा, "सत्ता में बने रहने के लिए वाजपेयी जो भी कर सकते थे, उसे उन्होंने हर कीमत पर किया। लेकिन सिर्फ पोखरण के अलावा उन्हें और किसलिए याद किया जा सकता है। पोखरण मामले में उन्होंने निश्चित रूप से साहस का परिचय दिया। इसके अलावा कारगिल रहा हो या कोई और मुद्दा, वहां वह कुछ भी नहीं कर पाए। उन्होंने विदेशी निवेश के लिए पूरा दरवाजा ही खोल दिया। आज हम जिस आर्थिक मंदी, बढ़ती बेरोजगारी, गैरबराबरी व उपभोक्तावादी संस्कृति के दर्शन कर रहे हैं, उसके लिए वाजपेयी ही पूरी तरह जिम्मेदार हैं।''

एक सवाल के जवाब में गोविंदाचार्य ने कहा कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ता बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि वह जो भी करने जा रहे हैं, उसके लिए उन्होंने संघ से कोई बातचीत नहीं की है। लेकिन वह जो कुछ भी करते हैं, उसके बारे में संघ को हमेशा सूचित करते रहते हैं और आगे भी ऐसा करते रहेंगे।

गोविंदाचार्य ने कहा कि वह भाजपा और कांग्रेस में कोई अंतर नहीं देखते, "मैं कांग्रेस को तिरंगा पार्टी कहता हूं और भाजपा को दोरंगी कांग्रेस।''

गोविंदाचार्य के अनुसार वर्ष 2009 के संसदीय चुनावों में भाजपा सत्ता में नहीं लौटने वाली। उनके अनुसार केंद्र में बनने वाली अगली सरकार अपेक्षाकृत ज्यादा कमजोर, अवसरवादी व भ्रष्ट होगी।

यह पूछे जाने पर कि क्या भाजश भविष्य में भाजपा के साथ हाथ मिला सकती है, गोविंदाचार्य ने कहा, "देखा जाएगा। इस मामले में मूल्य व मुद्दे निर्णायक होंगे।''

29 सितंबर के मालेगांव विस्फोट मामले में संघ नेताओं की संलिप्तता उजागर होने के सवाल पर गोविंदाचार्य ने कहा, "इस मामले में संघ की संलिप्तता का सवाल ही नहीं उठता। यह ठीक उसी तरह का मामला है, जिस तरह अमेरिका ने इराक पर हमला करने के लिए वहां जन संहारक हथियारों के होने का बहाना बनाया। लेकिन उन्हें आज तक वे हथियार नहीं मिल पाए।''

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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