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मालेगाँव, मंदी पर केंद्रित रहे उर्दू अख़बार

By अविनाश दत्त
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पिछले सप्ताह से अख़बारों के पहले पन्ने पर मालेगाँव छाया रहा
बीते सप्ताह भारत के उर्दू अख़बार मालेगाँव बम धमाकों और देश में 'हिंदू आंतकवाद' के विभिन्न आयामों पर छिड़ी बहस से रंगे रहे.

देश में सबसे ज्यादा संस्करणों वाला उर्दू अख़बार 'राष्ट्रीय सहारा' अपनी कहानियों की श्रृंखलाओं के कारण औरों से अलग है.

पिछले एक सप्ताह से इसके पहले पन्ने पर पहली ख़बर बिना नागा केवल मालेगाँव धमाकों से जुड़ी रही.

इसके अलावा अख़बार के संपादक अज़ीज़ बरनी की पहले पन्ने पर चलाई हुई सिरीज़ प्रमुख है जिसका शीर्षक है "मुसलमान ऐ हिंद... माज़ी, हाल और मुस्तकबिल" यानी भारतीय मुसलमान: इतिहास, वर्तमान और भविष्य.

पिछले शुक्रवार यानि 14 नवम्बर को सहारा ने एक लंबे अभियान के बाद घोषणा की कि उनकी ख़बरों का असर हुआ और आख़िरकार हिंदू चरमपंथियों पर कार्रवाई शुरू हो गई.

अख़बार ने दिल्ली के बटला हाउस में हुई पुलिस मुठभेड़ में मुस्लिम युवकों के मारे जाने बाद से कई ख़बरें छापी थीं जो पुलिस के बयानों पर सवाल खड़े करती थीं.

आरएसएस के इतिहास पर नज़र

सहारा ने इस बात पर संतोष जताया कि केंद्र सरकार बटला हाउस मामले में दिल्ली चुनावों के बाद न्यायिक जाँच की घोषणा कर सकती है.

सहारा ने अपने प्रयासों की तुलना कुरान में वर्णित उन अबाबील चिड़ियों से की जिन्हें अल्लाह ने दुष्ट बादशाह अबरहा के लश्कर को नष्ट करने के लिए भेजा था.

अबरहा हाथियों का लश्कर लेकर काबा को नष्ट करने जा रहे थे. अबाबील चिड़िया चोंच और पंजों में कंकड़ लेकर आयीं. वे कंकड़ जब हाथियों के सर पर गिरे तो हाथी पागल हो गए.

इसके अलावा संपादक अज़ीज़ बरनी रोज़ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के इतिहास और इसके बाकी कार्यकलापों के बारे में लिख रहे हैं.

इक्कीस नवम्बर को संघ के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के बारे में लिखते हुए बरनी ने सवाल किया है, " क्या यही कारण है सारी दुनिया के मुसलमानों को आतंकवाद से जोड़े जाने का.''

आपबीती का बयान

'सहारा' की एक और ख़बर का ज़िक्र करना ज़रूरी है और वो है, सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की जाँच के बाद दो ऐसे तिहाड़ जेल में बंद दो कैदियों को बेक़सूर पाया जिन्हें दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने अल बद्र संगठन का सदस्य बता कर बंद कर दिया था.

अख़बार ने इसे अपनी बड़ी सफलता क़रार दिया. इन दोनों में से एक का आपबीती बयान करता ख़त अखबार ने दो किस्तों में 15 और 16 अगस्त 2007 को छापा था.

दिल्ली से छपने वाले अन्य उर्दू अखबार 'हिन्दुस्तान एक्सप्रेस' ने मालेगाँव धमाकों, राज ठाकरे और दुनिया भर में छाई आर्थिक मंदी की ख़बरों को प्रमुखता से पहले पन्नों पर छापा है.

'हमारा समाज' की 16 नवम्बर की एक हेडलाइन थी समझौता एक्सप्रेस धमाके में पुरोहित भी शामिल.

अखबार ने इसी दिन यूपीए सरकार के ख़िलाफ़ इस मसले पर आरएसएस का प्रतिरोध भी छापा है.

इन दोनों अख़बारों ने चंद्रयान पर भारत की ख़बर को भी ख़ासी तवज़्ज़ो दी है. इसी दिन चंद्रयान मिशन भी सफल क़रार दिया गया था.

हिरासत में प्रताड़ना

उर्दू अख़बारों के दूसरे बड़े केंद्र हैदराबाद में भी कमोबेश इसी तरह की ख़बरें छापी गईं.

पन्द्रह नवम्बर को बड़े उर्दू अखबार 'मुंसिफ़' की हेडलाइन थी- "सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा"....

इसी दिन एक दूसरे अख़बार 'एतमाद' ने छापा कि कर्नल पुरोहित ने बताया कि चरमपंथी कार्रवाई के लिए उन्हें साध्वी प्रज्ञा और दयानंद पांडेय ने उकसाया.

19 नवम्बर को 'एतमाद' और 'मुंसिफ़' ने ह्यूमन राइट्स वाच की उस रिपोर्ट को अपनी सबसे बड़ी ख़बर बनाया जिसमें 10 मुसलमान लड़कों को पुलिस हिरासत में प्रताड़ित करने की ख़बर है.

बीस नवम्बर को 'दैनिक एतमाद' ने अल क़ायदा के दूसरे सबसे बड़े नेता अयमन अल ज़वाहिरी का ओबामा के नाम संदेश बड़ी प्रमुखता से छापा. हेडलाइन थी, "घर के गुलाम ओबामा को ज़वाहिरी की चेतावनी."

इसी ख़बर में ज़वाहिरी की मुसलमानों से अमरीका के ख़िलाफ़ हमले जारी रखने की अपील को भी हेडलाइन बनाया.

इसके अलावा 'सियासत' की 20 नवम्बर की सबसे बड़ी ख़बर रही मक्का से जहाँ पाँच लाख मुसलमान हज के लिए इकट्ठा हुए.

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