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'मैं परमाणु हथियारों का विरोधी हूँ'

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ज़रदारी ने अपनी पत्नी बेनज़ीर भुट्टो को बार-बार याद किया
पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने परमाणु हथियार का पहले प्रयोग न करने की बात कही और दोनों ओर से व्यापार, आवाजाही बढ़ाने पर ज़ोर दिया है.

हिंदुस्तान टाइम्स के वार्षिक सम्मेलन में वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए भाग लेते हुए उन्होंने कहा है कि वे परमाणु हथियारों के ख़िलाफ़ हैं. कश्मीर के मसले पर उन्होंने कहा कि इस मसले पर दोनों देशों की जनता को पहल करनी चाहिए और एक सर्वमान्य हल निकालने की कोशिश करनी चाहिए.

उनका कहना था कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के मसले पर संसद में 'कॉकस' बनाने की पहल की है और वे चाहेंगे कि भारत में भी ऐसा ही हो.

परवेज़ मुशर्रफ़ के भविष्य से जुड़े सवाल को मज़ाक में टालते हुए उन्होंने कहा कि वे गोल्फ़ खेल रहे हैं और वे चाहेंगे कि मुशर्रफ़ अपने मैच में कामयाब रहें.

यूरोप की तरह

जब उनसे पूछा गया कि क्या वे भारत की तरह ही यह कहने की स्थिति में हैं कि पाकिस्तान परमाणु हथियार का उपयोग पहले नहीं करेगा, उन्होंने कहा, "पाकिस्तान परमाणु हथियार का उपयोग करने वाला पहला देश नहीं बनना चाहेगा और मैं तो कहता हूँ कि चलिए इसके लिए दक्षिण एशिया परमाणु संधि पर हस्ताक्षर करते हैं."

भारत और पाकिस्तान के बीच बेहतर रिश्तों पर ज़ोर देते हुए ज़रदारी ने कहा कि वे चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़े.

मैं तो चाहता हूँ कि ऐसी स्थिति बने कि दोनों देशों के बीच आने जाने के लिए पासपोर्ट की भी ज़रुरत न हो और लोग एक ई-कार्ड दिखाकर ही आना जाना कर सकें
उनका कहना था कि जब भारत और चीन के बीच व्यापार हो सकता है तो फिर भारत और पाकिस्तान के बीच क्यों नहीं.

दोनों देशों के बीच वीज़ा के नियमों को सरल बनाए जाने से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा, "मैं तो चाहता हूँ कि ऐसी स्थिति बने कि दोनों देशों के बीच आने जाने के लिए पासपोर्ट की भी ज़रुरत न हो और लोग एक ई-कार्ड दिखाकर ही आना जाना कर सकें."

पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने इस संभावना से तो इनकार किया कि जर्मनी की तरह किसी दिन भारत और पाकिस्तान फिर से एक हो जाएँगे, लेकिन उनका कहना था कि इस बात की संभावना वे देखते हैं कि यूरोपीय देशों की तरह ही संबंध दोनों देशों के बीच हो सके.

उनका कहना था कि सार्क देश मिलकर बहुत कुछ कर सकते हैं. यह पूछे जाने पर कि उनकी राय में कश्मीर किसका है, उनका कहना था, "कश्मीरियों का."

कश्मीर पर ज़ुल्फ़िकार भुट्टो की इस राय पर उनकी टिप्पणी माँगी गई कि दोनों ओर के कश्मीर को भारत और पाकिस्तान ही संभाल लें, उन्होंने सावधानी से जवाब दिया, "मैं एक देश का राष्ट्रपति हूँ जहाँ लोकतंत्र की स्थापना हो चुकी है इसलिए कोई भी फ़ैसला संसद में ही हो सकता है."

भावुक बयान

आसिफ़ अली ज़रदारी ने अपने भाषण की शुरुआत भावुक बयान के साथ की और कहा कि उनकी स्वर्गवासी पत्नी बेनज़ीर भुट्टो कहा करती थीं कि हर पाकिस्तानी में थोड़ा सा भारतीय होता है और हर भारतीय में थोड़ा सा पाकिस्तानी, और वे ख़ुद भी इस बात को मानते हैं.

अपने भाषण और सवालों के जवाब में उन्होंने बेनज़ीर भुट्टो को बार-बार याद किया और कई भावुक टिप्पणियाँ कीं.

भारत एक बड़ा देश है लेकिन मैं भारत से कोई ख़तरा महसूस नहीं करता, और भारत को भी पाकिस्तान से कोई ख़तरा महसूस नहीं करना चाहिए
उन्होंने बेनज़ीर भुट्टो और अपने ससुर ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो दोनों को अपना आदर्श बताया.

उनका कहना था, "भारत एक बड़ा देश है लेकिन मैं भारत से कोई ख़तरा महसूस नहीं करता, और भारत को भी पाकिस्तान से कोई ख़तरा महसूस नहीं करना चाहिए."

जब उनसे पूछा गया कि जम्मू कश्मीर में अब तक के चुनाव के शांतिपूर्ण होने के पीछे माना जा रहा है कि पाकिस्तान की दूर रहने की नीति की वजह से ऐसा हो रहा है, तो क्या वे आश्वासन दे सकेंगे कि आगे भी पाकिस्तान दूरी बनाए रखकर चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से हो जाने देगा, तो उन्होंने कहा, "मैं हमेशा से दूरी बनाए रखने की नीति पर विश्वास करता रहा हूँ और यह नीति जारी रहेगी."

पाकिस्तान की ख़स्ता आर्थिक स्थिति को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष से हुई बातचीत आगे बढ़ी है और उन्हें उम्मीद है कि दुनिया के दूसरे देशों की तरह पाकिस्तान को भी सहायता मिल जाएगी.

एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "मैं ट्रेड (कारोबार) में भरोसा करता हूँ एड (सहायता) पर नहीं. इसलिए कहता हूँ कि चलिए कारोबार करते हैं."

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