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जलदस्युओं से निपटने के अंतरराष्ट्रीय प्रयास तेज़

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सउदी अरब के बेड़ों को भी जलदस्युओं ने अपने कब्ज़े में ले लिया है
सोमालिया की जल-सीमा में सक्रिय जलदस्युओं से निपटने के लिए भारत सहित कुछ अन्य देश भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकजुट होते नज़र आ रहे हैं.

पर इस जलक्षेत्र में दस्युओं के आतंक से केवल भारत प्रभावित नहीं हुआ. अन्य कुछ देश इनसे कहीं ज़्यादा परेशान हैं.

सउदी अरब के सुपर-टैंकर सीरियस स्टार और क़रीब एक दर्जन अन्य छोटे-बड़े जहाज़ों पर सोमाली समुद्री लुटेरों के क़ब्जे़ के बाद अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस समस्या की ओर गया है.

इस सवाल पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है कि पूर्वी अफ़्रीका से लगे समुद्री मार्ग को कैसे सुरक्षित बनाया जाए.

जून महीने में, जब पहली बार सोमाली समुद्री लुटेरों के ख़तरे की भयावहता का अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अहसास हुआ, तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इस बारे में एक प्रस्ताव पारित किया था.

इसमें विदेशी नौसेनाओं को अपने जहाज़ों की रक्षा के लिए सोमाली जलसीमा में प्रवेश करने की अनुमति दी गई, बशर्ते उन्हें सोमालिया की अंतरिम सरकार की भी अनुमति प्राप्त हो.

इसके बाद से सोमालिया सरकार भारत, अमरीका, कनाडा और ब्रिटेन समेत कई देशों की नौसेनाओं को अपनी जल-सीमा आने की स्वीकृति दे चुकी है.

मजबूत प्रस्ताव की दरकार

सुरक्षा परिषद का जून का प्रस्ताव छह महीनों के लिए लागू किया गया था पर अब अमरीका ने अन्य देशों की नौसेनाओं के साथ समन्वय करते हुए इस प्रस्ताव में ज़रूरतों के अनुसार फ़ेरबदल कर इसे आगे भी लागू कराए रखने की कोशिशें शुरू कर दी है.

हम अन्य देशों के साथ मिल कर इस बात पर विचार कर रहे हैं कि सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव में कौन-कौन से बदलाव किए जाएं ताकि ज़िम्मेदार देशों की नौसेनाओं को इस क्षेत्र में समुद्री लुटेरों की समस्या से निपटने में आसानी हो. क्योंकि इस समस्या के वास्तविक आर्थिक पहलू हैं
अमरीकी विदेश विभाग के प्रवक्ता शॉन मैककॉरमैक ने इस बारे में बताया, "हम अन्य देशों के साथ मिल कर इस बात पर विचार कर रहे हैं कि सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव में कौन-कौन से बदलाव किए जाएं ताकि ज़िम्मेदार देशों की नौसेनाओं को इस क्षेत्र में समुद्री लुटेरों की समस्या से निपटने में आसानी हो. क्योंकि इस समस्या के वास्तविक आर्थिक पहलू हैं."

इस बीच सउदी अरब ने इस बात से इनकार किया है कि वह एक सउदी सुपर-टैंकर को छुड़वाने के लिए सोमाली समुद्री लुटेरों से बातचीत कर रहा है.

नॉर्वे दौरे पर गए सउदी विदेश मंत्री सउद अल-फ़ैसल ने कहा, "समुद्री जहाज़ों को लूटा जाना एक ऐसी बुराई है जिससे निपटने का एकमात्र तरीका है इस बुराई को मिटा देना. बातचीत करने और फ़िरौती देने से समुद्री लूटमार को बढ़ावा ही मिलता है. ये समस्या का समाधान नहीं हो सकता."

सोमाली समुद्री लुटेरों को परास्त करने के लिए की जाने वाली कार्रवाइयों के संबंध में अंतरराष्ट्रीय क़ानून के कुछ पहलुओं पर भी ग़ौर किया जाना ज़रूरी होगा.

कई सवाल हैं, मसलन, क्या विदेशी सैनिक दस्ते लुटेरों का पीछा करते हुए सोमालिया स्थित उनके अड्डों तक जा सकेंगे?

जो लुटेरे पकड़े जाएँगे उन पर कार्रवाई किस अदालत में चलाई जाएगी... क्योंकि पश्चिमी देशों में इस बात को लेकर थोड़ी चिंता है कि यदि लुटेरों को पकड़कर सोमालिया सरकार को सौंपा गया तो शायद उनके मानवाधिकार को लेकर सवाल उठ सकते हैं.

मदद की गुहार

समुद्री जहाज़ों को लूटा जाना एक ऐसी बुराई है जिससे निपटने का एकमात्र तरीका है इस बुराई को मिटा देना. बातचीत करने और फ़िरौती देने से समुद्री लूटमार को बढ़ावा ही मिलता है. ये समस्या का समाधान नहीं हो सकता
सोमालिया में जहाँ एक ओर इन दस्युओं की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने इस तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं वहीं सोमालिया की सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए विश्व समुदाय से मदद की अपील की है.

सोमालिया के विदेश मंत्री ने कहा है कि इस स्थिति से तत्काल निपटने की ज़रूरत को सभी देशों को समझना चाहिए.

उन्होंने बताया कि दस्युओं की गतिविधियों में कितनी तेज़ी आई है इसका आकलन इसी से लगा सकते हैं कि पिछले 12 महीनों के दौरान ये जलदस्यु 15 करोड़ डॉलर तक की फ़िरौती वसूल चुके हैं.

उन्होंने कहा कि दस्युओं को हो रही इतनी कमाई के कारण उन्हें ऐसी गतिविधियाँ जारी रखने के लिए बल मिल रहा है.

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