देश ने ही मुझे बनाया-संवाराः मनमोहन

manmohan singh
नई दिल्ली, 22 नवंबरः प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपने बचपन के दिनों को याद करके काफी भावुक हो गए और उन्होंने कहा कि पढ़ने और शिक्षित होने की चाह ने ही उन्हें अभाव भरे गांव के माहौल से यहां तक पहुंचाया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज वह जो कुछ भी हैं उस मुकाम तक उन्हें देश ने ही पहुंचाया।हिन्दुस्तान टाइम्स लीडरशिप शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन के दौरान सिंह ने कहा पढने और ज्ञान पाने तथा अपने पैरों पर खड़े होने की चाह मुझे गांव से बिना किसी उम्मीद के यहां ले आई।

उन्होंने कहा "मेरे देश ने मुझे आज इस ऊंचाई तक पहुंचाकर जीवनकाल में ही मेरे सपने को सच कर दिया"। डॉ. सिहं ने अपने स्कूली दिनों को याद करते हुए कहा उनकी शिक्षा-दीक्षा उचित चयन और छात्रवृत्ति के जरिए पूरी हुई जबकि मुक्त समाज और अवसरों से उन्हें नियुक्ति मिली।

उन्होंने कहा कि लाखों देशवासियों की तरह वह भी एक साधारण परिवार से यहां पहुंचे हैं। उन्होंने कहा मैं भी धूल-मिट्टी भरे गांव से आया हूं जहां न तो डाक्टर था. न ही स्कूल और न ही वहां बिजली थी।

प्रधानमंत्री ने कहा उनकी सबसे बड़ी चाह यही है कि भारत एक शिक्षित देश बने। उन्होंने कहा कि ज्ञान का प्रकाश हर बच्चे तक पहुंचना चाहिये।

प्रत्येक नागरिक ज्ञान की ताकत से सशक्त होना चाहिये "मेरा यह सपना देश के अपने लोगों के लिये है क्योंकि दूरदराज गांव में रहने वाले नौजवान के रुप में मेरा भी यही सपना था"।

उन्होंने कहा कि आज मैं आपके सामने उसी ज्ञान और शिक्षा के प्रकाश की ताकत से खड़ा हूं इसके अलावा मुझे इसकी कोई और वजह नहीं दिखाई देती। सम्मेलन में मौजूद केन्द्रीय मंत्रियों, राजनयिकों और वरिष्ठ नौकरशाहों ने प्रधानमंत्री की बातों को सुना और तालियों से उनका अभिवादन किया।

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