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मध्य प्रदेश चुनाव में कुछ अहम मुक़ाबले

By आलोक कुमार
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मध्य प्रदेश में 230 विधानसभा सीटों के लिए चुनावी बिसात बिछ चुकी है. आईए नज़र डालते हैं उन सीटों पर जहाँ कद्दावर नेताओं की प्रतिष्ठा दाँव पर है.

राज्य में मुख्य मुक़ाबला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच है लेकिन उमा भारती की भारतीय जनशक्ति पार्टी और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) कई सीटों पर चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकती हैं.

27 नवंबर को होने वाले मतदान में तीन हज़ार से ज़्यादा उम्मीदवार भाग्य आज़मा रहे हैं. भाजपा और कांग्रेस ने सभी 230 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे लेकिन दोनों दलों के एक-एक उम्मीदवारों के पर्जे ख़ारिज हो चुके हैं.

सत्तारूढ़ भाजपा जहाँ विकास को मुख्य मुद्दा बना रही है, वहीं कांग्रेस शिवराज सिंह चौहान सरकार पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने और शासकीय विफलता का आरोप लगा रही है.

मुख्यमंत्री के सामने कमज़ोर प्रतिद्वंद्वी

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधनी विधानसभा से चुनाव लड़ रहे हैं. उन्होंने उपचुनाव में इसी सीट से 36 हज़ार से अधिक मतों से जीत हासिल की थी.

इस बार प्रतिद्वंद्वी के रूप में कांग्रेस के प्रत्याशी महेश राजपूत मैदान में हैं. राजपूत राजनीति के नए खिलाड़ी हैं और विश्लेषकों की मानें तो कांग्रेस ने जान बूझ कर कमज़ोर उम्मीदवार खड़ा किया है.

विश्लेषकों के मुताबिक शिवराज का मुक़ाबला एक कमज़ोर उम्मीदवार से है

लोकनिर्माण मंत्री कैलाश विजयवर्गीय महू से मैदान में है. यहां से कांग्रेस के प्रत्याशी अतर सिंह चुनाव लड़ रहे हैं. अतर सिंह पिछले दो चुनावों में यहाँ से विजयी रहे हैं. विजयवर्गीय के लिए यह सीट नया है. बावजूद इसके दोनों के बीच काँटे की टक्कर है.

विधानसभा में विपक्ष की नेता जमुनादेवी कुक्षी से मैदान में हैं. भाजपा के रलेम चौहान उन्हें चुनौती दे रहे हैं. साफ सुथरी छवि की जमुनादेवी को हराना आसान नहीं होगा. वो पहली बार 1952 में विधानसभा में पहुँची थीं.

केंद्रीय मंत्री अर्जुन सिंह के बेटे अजय सिंह उर्फ़ राहुल भैया चुरहट सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. इस सीट पर पिछले तीन दशकों से कांग्रेस का दबदबा रहा है. यहां से भाजपा के अजय प्रताप सिंह मैदान में हैं. लेकिन गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (जीजीपी) के शरदेंदु तिवारी के मैदान में उतरने से मुक़ाबला त्रिकोणीय हो गया है.

उमा भारती की चुनौती

भारतीय जनशक्ति पार्टी की नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती पहली बार अपने गृह विधानसभा क्षेत्र टीकमगढ़ से चुनाव लड़ रही हैं. उन्हें भाजपा के अखंड प्रताप सिंह से चुनौती मिल रही है.

बाबूलाल गौर गोविंदपुरा से चुनाव लड़ रहे हैं

भाजपा से अलग होने के बाद उमा भारती कई मंचों से कह चुकी हैं उनका लक्ष्य शिवराज सरकार को दोबारा सत्ता में आने से रोकना है.

जब वो भाजपा में थी तब उन्होंने अखंड प्रताप सिंह को चुनाव जीताने में अहम भूमिका अदा की थी लेकिन अब दोनों पुराने सहयोगी आमने-सामने हैं.

भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर भोपाल संसदीय क्षेत्र की गोविंदपुरा सीट से एक बार फिर चुनाव मैदान में हैं. उन्हें कांग्रेस की विभा पटेल टक्कर दे रही हैं जो भोपाल की महापौर भी रह चुकी हैं.

बाबूलाल यह सीट जीतते आए हैं लेकिन इस बार स्थितियाँ पहले की तरह अनुकूल नहीं है. भोपाल गैस कांड के पीड़ित उनके ख़िलाफ़ लामबंद हुए हैं. वहीं तेज़ तर्रार विभा पटेल ज़ोरदार ढंग से चुनाव प्रचार में जुटी हुई हैं.

सबसे वृद्ध नेता

सिरमौर विधानसभा सीट से कांग्रेस के श्रीनिवास तिवारी इस चुनाव में सबसे बुज़ुर्ग उम्मीदवार हैं. 83 वर्षीय श्रीनिवासी तिवारी विधानसभा अध्यक्ष भी रह चुके हैं और पचास के दशक से सक्रिय राजनीति में हैं. यहां से भाजपा ने प्रदीप सिंह को उतारा है.

दिग्विजय सिंह चुनाव नहीं लड़ रहे हैं

पिछले पंद्रह वर्षों से विधायक रहे और भाजपा सरकार में खनिज मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा सिरौंज विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में हैं. उनके मुक़ाबले में कांग्रेस के बुंदेलसिंह यादव चुनाव लड़ रहे हैं.

भाजपा के प्रेमनारायण सिंह छठवीं बार अमरवाड़ा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. कमलनाथ के संसदीय क्षेत्र छिंदवाड़ा में होने के कारण कांग्रेस के लिए यह सीट काफी महत्वपूर्ण है. कांग्रेस ने यहां से कुँवर कमलेश शाह को उतारा है.

बड़े नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट देने में भाजपा और कांग्रेस में से कोई पीछे नहीं है.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भांजे और राज्य के जल संसाधन मंत्री अनूप मिश्रा भाजपा के टिकट पर ग्वालियर पूर्व से चुनाव मैदान में उतरे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री सुंदर लाल पटवा के भतीजे सुरेंद्र पटवा भोजपुर से भाजपा के टिकट पर और पूर्व मुख्यमंत्री वीरेंद्र सखलेचा के पुत्र ओमप्रकाश सखलेचा जावद से भाजपा उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं.

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के साले और कांग्रेस के पूर्व मंत्री रत्नेश सालोमन जबेरा से अपनी किस्मत आज़मा रहे हैं. ग्वालियर राजघराने का कोई सदस्य इस बार चुनाव मैदान में नहीं है.

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह भी इस बार चुनाव मैदान में नहीं है. उन्होंने पिछले चुनाव के समय ही दस वर्षों तक कोई पद ग्रहण नहीं करने की शपथ ली थी.

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