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कश्मीरः कहीं पुलिस फ़ायरिंग, कहीं कर्फ़्यू

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जम्मू-कश्मीर में पहले चरण के मतदान में सोमवार को 55 फ़ीसदी मतदाताओं ने वोट डाला
भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. राजधानी श्रीनगर में अघोषित कर्फ़्यू लागू है.

शुक्रवार को राजधानी श्रीनगर में प्रशासन ने अघोषित कर्फ़्यू लगा दिया. वहीं राज्य के गांदरबल इलाके में दो गुटों के बीच हिंसक झड़पों की ख़बरें भी हैं.

हिंसा को रोकने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा और फ़ायरिंग करनी पड़ी. इसमें एक व्यक्ति के घायल होने की ख़बर है.

गांदरबल मुस्लिम बाहुल्य इलाका है और यहाँ भी चुनाव के दूसरे चरण में मतदान होना है.

शुक्रवार को गांदरबल में हिंसा उस वक्त भड़की जब चुनावों का बहिष्कार कर रहे लोगों के एक जत्थे ने चुनाव प्रचार के लिए जा रहे एक काफिले पर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए.

पत्थरबाज़ी में कई मोटरसाइकिलों समेत एक कार को नुकसान हुआ. भड़कती हिंसा को काबू में करने के लिए पुलिस को फ़ायरिंग करनी पड़ी.

चुनाव का बहिष्कार और विरोध कर रहे लोगों ने इसके बाद शहर में विरोध प्रदर्शन किए. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस और बल प्रयोग का सहारा लेना पड़ा.

अघोषित कर्फ़्यू

उधर राजधानी श्रीनगर में कर्फ़्यू के बारे में प्रशासन ने कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है लेकिन पुलिस ने लोगों की आवाजाही पर पाबंदी लगा दी है.

अधिकारियों का कहना है कि शुक्रवार को चुनाव विरोधी रैलियों को न होने देने के मकसद से पाबंदियाँ लगाई गईं.

रविवार को कश्मीर घाटी के मुस्लिम बहुल गांदरबल और कानगन में मतदान होना है. कश्मीर में सात चरणों में मतदान हो रहा है और मतगणना 28 दिसंबर को होगी.

जम्मू-कश्मीर विधानसभा क्षेत्र- 87 मतदान की तारीखें 17 नवंबर---- 10 सीटें 23 नवंबर-----6 सीटें 30 नवंबर-----5 सीटें 07दिसंबर------18 सीटें 13दिसंबर-------11 सीटें 16दिसंबर----16 सीटें 24 दिसंबर---21 सीटें मतगणना---- 28 दिसंबर

चाहे चुनाव समर्थक दल सोमवार को पहले चरण के मतदान में हुए भारी मतदान के बाद जोश में हैं लेकिन प्रशासन किसी तरह की ढील नहीं बरतना चाहता. पहले चरण में हुए भारी मतदान ने सभी को चौंका दिया.

एक पुलिस अधिकारी का कहना था कि यदि ऐसी रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ कोई सख़्ती होती है या कोई घायल होता है तो ये चुनाव प्रक्रिया के लिए बुरा हो सकता है.

पहले चरण के मतदान में अलगाववादी संगठनों के बहिष्कार के आहवान की परवाह न करते सैकड़ों लोग वोट डालने की लाइन में लग गए.

मुस्लिम बहुल इलाक़ों में भी मतदान 50 फ़ीसदी से ज़्यादा था. इनमें से कई ऐसे मुसलमान भी थे जिनका कहना था कि वे भारतीय शासन को स्वीकार नहीं करते लेकिन मतदान में भाग ले रहे हैं.

पिछले कुछ महीनों में कश्मीर घाटी में आज़ादी के समर्थन में कई प्रदर्शन हुए हैं और इन पर सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग किया है जिससे कई लोगों की मौत हो गई है.

अनेक अलगाववादी नेता जेल में हैं ताकि उन्हें प्रदर्शनों में भाग लेने से रोका जा सके.

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