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'चरमपंथ का मुक़ाबला विचारों सेः ब्लेयर

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टोनी ब्लेयर ने कहा भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में उचित जगह
पूर्व ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने 'इस्लाम के नाम पर चलाए जाने वाले चरमपंथ का सामना हथियारों से ही नहीं बल्कि वैचारिक स्तर पर' करने को कहा.

दिल्ली में हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उनका कहना था कि इस्लाम के रास्ते पर चलने वाले कुछ लोगों में अलग-थलग पड़ जाने और प्रताड़ित महसूस करने की भावना घर कर गई है, जिसे दूर करना होगा.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने इस बात से स्पष्ट इनकार किया कि अमरीका-ब्रिटेन के हमलों के कारण इस्लामी चरमपंथ को बल मिला है.

उनका कहना था, "ग्यारह सितंबर के हमले अमरीका-ब्रिटेन के हमलों से पहले हुए थे. जब तक हम इस तर्क का विरोध नहीं करते कि अमरीका-ब्रिटेन के हमलों से नया आतंकवाद पैदा हुआ तब तक इसका सामना नहीं किया जा सकता. हम इसे अपनी ग़लती नहीं मानते. नए आतंकवाद को तब तक हराया नहीं जा सकता जब तक इसकी विचारधारा को नहीं हराया जाता."

'भारत को उचित जगह मिले'

ग्यारह सितंबर के हमले अमरीका-ब्रिटेन के हमलों से पहले हुए थे. जब तक हम इस तर्क का विरोध नहीं करते कि अमरीका-ब्रिटेन के हमलों से नया आतंकवाद पैदा हुआ, तब तक इसका सामना नहीं किया जा सकता. हम इसे अपनी ग़लती नहीं मानते. नए आतंकवाद को तब तक हराया नहीं जा सकता जब तक इसकी विचारधारा को नहीं हराया जाता
भारत के बारे में बोलते हुए टोनी ब्लेयर ने कहा कि यदि भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में और विश्व बैंक में उचित जगह और भूमिका नहीं मिलती तो दुनिया के लिए ये ख़ुद को भ्रम में डालने वाली बात होगी.

मध्य पूर्व के संकट पर ब्लेयर का कहना था कि आश्चर्यजनक बात है कि उन्होंने इस समस्या को बेहतर तरीके से प्रधानमंत्री का पद छोड़ने के बाद ही समझा है.

उनका कहना था कि पहले ज़मीनी स्थिति को बदलना होगा और फिर राजनीतिक या कूटनीतिक तरीके से इसका समाधान खोजना होगा. उनके अनुसार ऐसा इसलिए ज़रूरी है क्योंकि इसराइल और फ़लस्तीन दोनो ही पक्षों में एक दूसरे के प्रति ख़ासा अविश्वास है.

वित्तीय संकट के बारे में उन्होंने कोई हल तो नहीं सुझाया लेकिन कहा कि जैसे पहले वाम और दक्षिणपंथ परस्पर विरोधी ख़ेमे थे उसी तरह अर्थव्यवस्था की दृष्टि से खुली बंद अर्थव्यवस्था के ख़ेमे हैं.

टोनी ब्लेयर के अनुसार भूमंडलीकरण के दौर में सभी अर्थव्यवस्थाओं - विकसित और विकासशील को साथ मिलकर चलना होगा क्योंकि या तो सभी इकट्ठा खड़े होंगे या फिर सभी गिर जाएँगे.

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