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दावाः कोपरनिकस के अवशेष मिले

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पुरातत्व विज्ञानिकों को तीन साल पहले पूर्वोत्तर पोलैंड के एक चर्च में एक कंकाल मिला था
पोलैंड में शोधकर्ताओं ने सदियों पुराने रहस्य को सुलझाने का दावा किया है. उनके अनुसार खगोल विज्ञानी कोपरनिकस के अवशेष की शिनाख़्त हो गई है.

पोलेंड में मिले कोपरनिकस के कंकाल और स्वीडन में एक किताब में पाए गए उनके बालों के डीएनए के तुलनात्मक अध्ययन से लगभग पूरी तरह से साफ़ हो गया है कि कंकाल उनका ही है.

पुरातत्व वैज्ञानिकों को तीन साल पहले पूर्वोत्तर पोलैंड के उसी चर्च में एक कंकाल मिला था जहाँ कोपरनिकस रहा करते थे. कोपरनिकस 16 वीं शताब्दी में बाल्टिक सागर के तट पर स्थित फ़ॉर्मबोर्क गिरजा घर में रह कर काम किया करते थे.

कोपरनिकस की खोज

फ़ोरेंसिक जाँच के मुताबिक खोपड़ी से जो चेहरा बनता है वो बहुत हद तक खगोल विज्ञान के पिता निकोलस कोपरनिकस के पोर्ट्रेट से मिलता-जुलता है.

कोपरनिकस ने खोज की थी कि पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है.

निकोलस कोपरनिकस कई वर्षो तक गिरजाघर में काम करते रहे और वो ख़ाली समय में ही खगोलशास्त्रीय अध्ययन करते थे. सदियों से लोग अटकलें लगाते रहे हैं कि उनकी कब्र पौलंड के इसी गिरजाघर में स्थित है.

तीन साल पहले पुरात्व विज्ञानियों ने गिराज घर के पास खुदाई की और उन्हें एक 70 वर्षीय व्यक्ति की खोपड़ी और कुछ अवशेष मिले. ग़ौरतलब है कि जब कोपरनिकस का देहांत हुआ था तो उनकी आयु भी 70 वर्ष थी.

पुरात्व विज्ञानियों की टीम के प्रमुख जेर्जी गास्सोवस्की का कहना है, "फ़ोरेंसिक जाँच के मुताबिक खोपड़ी से जो चेहरा बनता है वो बहुत हद तक खगोल विज्ञान के पिता निकोलस कोपरनिकस के पोर्ट्रेट से मिला-जुलता है."

विज्ञानिकों ने दांत और जांघ की हड्डी के डीएनए को उनके बाल के डीएनए के दो स्टरेंड से मिलाया और तुलनात्मक अध्यायन किया है.

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