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छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण का मतदान शुरु

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छत्तीसगढ़ विधानसभा की 90 में से 51 सीटों के लिए दूसरे और अंतिम चरण का मतदान शुरु हो चुका है. मतदान से पहले नक्सली हिंसा की कुछ ख़बरें मिली हैं.

इस चरण में विधानसभा की 90 में से 51 सीटों पर मतदान हो रहा है. 39 सीटों के लिए पहले चरण का मतदान 14 नवंबर को निपट चुका है. मतगणना आठ दिसंबर को होनी है.

मतदान की पूर्व संध्या पर नक्सल प्रभावित इलाक़ों से हिंसा की कुछ ख़बरें मिली हैं. चुनाव आयोग ने इस चरण में भी सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए हैं हालांकि इस चरण में नक्सली हिंसा की चुनौती वैसी नहीं है जैसी कि पहले चरण में दक्षिण छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाक़े में थी.

छत्तीसगढ़ विधासभा सीटें - 90 मतदान:पहला चरण- 14 नवंबर मतदान:दूसरा चरण - 20 नवंबर मतगणना - आठ दिसंबर दूसरे चरण में भी राज्य में कई अहम मुक़ाबले होने हैं जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनकी पत्नी रेणु जोगी का चुनाव भी है.

इसी चरण में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष धनेंद्र साहू और कार्यकारी अध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु देव साय और दिलीप सिंह जूदेव के बेटे युद्धवीर सिंह के राजनीतिक भविष्य का भी फ़ैसला होना है.

इसके अलावा गृहमंत्री रामविचार नेता, स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल, पूर्व गृहमंत्री नंदकुमार पटेल और एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष नोबेल वर्मा के भी चुनाव इसी चरण के मतदान से होने हैं.

हिंसा की ख़बरें

इस चरण में जिन ज़िलों में मतदान हो रहे हैं उनमें से कई ज़िले नक्सली प्रभावित माने जाते हैं. झारखंड से जुड़े सरगुज़ा ज़िले में नक्सलियों या माओवादियों का प्रभाव बहुत पुराना माना जाता है.

सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं.इन इलाक़ों में भी नक्सलियों ने चुनाव बहिष्कार का नारा दे रखा है और इसकी वजह से कई जगह मतदाता डरे हुए हैं.राज्य के गृहमंत्री रामविचार नेताम इसी सरगुजा के रामानुजगंज से चुनाव लड़ रहे हैं.

रामानुजगंज में ही बुधवार को नक्सलियों ने बारुदी सुरंग लगाकर पुलिस की एक जीप को उड़ा दिया था जिसमें एक डीएसपी सहित पाँच पुलिसकर्मी घायल हो गए थे.

इसके अलावा एक मतदान दल पर नक्सलियों ने गोलियाँ चलाई थीं. इसमें किसी के हताहत होने की ख़बर नहीं मिली है.

सरगुजा के ज़िला मुख्यालय अंबिकापुर में बुधबार की रात कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ताओं में झड़प की ख़बर आई है जिसमें छिटपुट हिंसा भी हुई है.वैसे पिछले एक पखवाड़े में वहाँ हिंसा की घटनाओं में इज़ाफ़ा हुआ है. पिछले ही हफ़्ते ही नक्सली हमले में सरगुजा के आईजी डीएस मरावी को घायल हो गए थे.

इसके अलावा नक्सलियों ने कई मोबाइल टॉवरों को उड़ा दिया था जिससे इस इलाक़े की संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है.चुनाव आयोग ने इन इलाक़ों में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए हैं और सीआरपीएफ़ की 17 बटालियनों के अलावा कुल 300 कंपनियां तैनात की गई हैं.

अहम चरण

सांसद अजीत जोगी को कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव लड़वाकर कई संकेत दिए हैं. इस चरण में उत्तर छत्तीसगढ़ की कुल 15 आदिवासी यानी अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों पर चुनाव होने हैं जबकि छह सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटें हैं और 30 सीटें सामान्य हैं.

पिछली बार आदिवासी सीटों पर भाजपा को मिली जीत के कारण ही वह सरकार बनाने में सफल हुई थी. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इन चुनावों में यदि कुछ आदिवासी सीटों पर कांग्रेस जीत दर्ज कर पाती है तो इससे राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं.

कांग्रेस ने इन 51 सीटों में से तीन सीटें अपने राजनीतिक सहयोगी एनसीपी के लिए छोड़ दी हैं जबकि भाजपा और बसपा ने सभी 51 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं.

इस चरण के चुनाव क्षेत्रों में ही बसपा का बड़ा प्रभाव माना जाता रहा है और माना जा रहा है कि कई सीटों पर बसपा चुनाव नतीजों को प्रभावित करेगी.

इन चुनावों में भाजपा ने जहाँ विकास के अलावा ग़रीबों को तीन रुपए किलो चावल देने जैसे मुद्दे उठाए हैं वहीं कांग्रेस ने विकास कार्यो में भ्रष्टाचार को उछाला है और सरकार बनने पर दो रुपए किलो चावल देने का वादा किया है.

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