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बालकों के यौन शोषण की बढ़ती घटनाएँ

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भारत में बालकों के शोषण की घटनाएँ बढ़ रही हैं
शोधकर्ताओं का कहना है कि भारत में बालकों के यौन शोषण की घटनाएँ बढ़ रही हैं. दिलचस्प तथ्य ये है कि शोषण धार्मिक स्थलों पर अधिक है. इक्वेशंस नामक एक ग़ैरसरकारी संगठन का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर ये शोषण अधिक है.

विभिन्न बच्चों से बात करने से इस संगठन को पता चला कि शोषण करनेवाले विदेशी और घरेलू पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय निवासी होते हैं. ये अध्ययन उड़ीसा के पुरी, आंध्र प्रदेश के तिरुपति और केरल के गुरुवायूर में किया गया.

रिपोर्ट का कहना है कि ये शोषण लगभग छह साल की उम्र से शुरू हो जाता है और जब बालक नौ साल की उम्र के होते हैं तो उन्होंने पूरी तरह से इस काम में लगा दिया जाता है.

ये तत्थ उस समय सामने आए हैं जब एक ऑस्ट्रेलियाई नागरिक को पुरी में बालकों के यौन शोषण के मामले में गिरफ़्तार किया गया है.नागरिक अधिकार ग्रुपों का कहना है कि सरकार को तत्काल इस ओर ध्यान देने की ज़रूरत है.

बढ़ती घटनाएँ

बंगलौर स्थिति ग़ैरसरकारी संगठन इक्वेशंस की समन्वयक और इस रिपोर्ट को तैयार करनेवाली एस विद्या का कहना है कि ये इक्का दुक्का घटनाएँ नहीं हैं.

कई विदेशी पर्यटक किसी एक स्थान पर लंबे समय तक रहते हैं और वे बच्चों और उनके परिवारों से दोस्ती गांठ लेते हैं और उसके बाद उनका शोषण करते हैं.
उनका कहना था कि जिन बच्चों से बात की उन्होंने बताया कि शोषण करनेवालों में देसी और विदेशी दोनों पर्यटक शामिल हैं.

उनका कहना था,'' कई विदेशी पर्यटक किसी एक स्थान पर लंबे समय तक रहते हैं और वे बच्चों और उनके परिवारों से दोस्ती गांठ लेते हैं और उसके बाद उनका शोषण करते हैं.''

वो कहती हैं, '' कभी-कभी परिवारजनों ने ही बालकों का शोषण किया होता है और बाद में वो उन्हें इसके लिए मजबूर कर देते हैं.''

एस विद्या का कहना था कि सरकार की मौजूदा नीतियाँ केवल लड़कियों को शोषण से बचाने के लिए हैं. उनका कहना है कि बच्चों के शोषण को रोकने के लिए सरकार को तत्काल क़ानून कड़े करने चाहिए.

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