• search

उमा भारती के साथ गोविंदाचार्य

|
मध्य प्रदेश में उमा भारती की सभाओं में भीड़ उमड़ रही है
उमा भारती ने घोषणा की है कि उनका राजनीतिक दल भारतीय जन शक्ति गोविन्दाचार्य के संगठन राष्ट्रीय स्वाभिमान आन्दोलन का राजनीतिक अंग होगा.
उनका कहना था कि गोविन्दाचार्य पार्टी के संरक्षक रहेंगे और भाजश में बदलावों के लिए स्वतंत्र होंगे.

गोविन्दाचार्य और उमा भारती के संबंध हमेशा से क़रीबी रहे हैं और उन्हें भारती का राजनीतिक और बौद्धिक पथप्रदर्शक माना जाता रहा है, लेकिन अचानक की गई घोषणा के कारण राजनीतिक विश्लेषक ये समझने की कोशिश कर रहे हैं कि कहीं ये उमा भारती के अनगिनत शगूफ़ों में से एक तो नहीं!

संघ के एक धड़े का भरोसा भाजपा से उठ गया है और वह पार्टी के समानांतर एक दूसरा संगठन खड़ा करने की कोशिश कर रहा है
एनडी शर्मा के अनुसार धारा 370, समान नागरिक संहिता, अयोध्या में राम मन्दिर निर्माण को भाजपा के तिलांजलि दिए जाने के कारण संघ के एक धड़े का भरोसा पार्टी से उठ गया है और वह भाजपा के समानांतर एक दूसरा संगठन खड़ा करने की कोशिश कर रहा है.

वरिष्ठ पत्रकार राजेश चतुर्वेदी इसे उमा भारती के जनता और राजनीतिक वर्ग को दिए गए इस संदेश के रूप में देखते हैं कि अब वो भाजपा में वापस नहीं जा रहीं क्योंकि अब वो एक बड़े आन्दोलन का हिस्सा हैं और गोविन्दाचार्य जैसा चिन्तक अब औपचारिक रूप से उनकी राजनीतिक पार्टी का हिस्सा हैं.

इसी बीच कभी भाजपा के 'थिंक-टैंक' का हिस्सा रहे गोविन्दचार्य ने दिल्ली में कहा कि वह सक्रिय राजनीति में वापस आ रहे हैं.

"जब मिलेंगें रोटी राम, तभी बनेंगे पूरे काम" को अपनी पार्टी का दर्शन और संदेश बताती उमा भारती दावा करती हैं कि उनका संगठन राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की विचारधारा की एक लहर है और उसके हिंदुत्व और स्वदेशी के दर्शन के अनुसार ही काम करेगी.

लगभग तीन साल पहले भाजपा से निष्काषित उमा भारती अपने पुराने दावे कि " मैं ही असली भाजपा हूँ" से हटकर अब भाजश को हिन्दुओं की सबसे बड़ी हितैषी पार्टी के रूप में भी प्रस्तुत कर रही हैं.

सत्ता समीकरण

मालेगाँव बम धमाकों के सिलसिले में हिंदूवादी संगठनों के कुछ सदस्यों की गिरफ़्तारी और उसपर भाजपा की शुरूआती खामोशी का मामला उठाकर वो लालकृष्ण आडवाणी को निशाना बना रही हैं.गोविंदाचार्य ने फिर राजनीति में सक्रिय होने की घोषणा की है

राजेश चतुर्वेदी कहते हैं कि ख़ुद पिछडी लोधी जाति से ताल्लुक रखने वाली उमा भारती भाजपा को अवसरवादी साबित कर पिछड़ों और हिंदूवादी वोटरों के एक समूह का राजनीतिक समीकरण तैयार करना चाहती हैं.

कांग्रेस शासित मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक ब्राह्मणों और राजपूतों का बोलबाला रहा है जिसमें बदलाव की उम्मीद भी तब शुरू हुई जब भाजपा ने उमा भारती को पार्टी नेता बनाया.

माना जा रहा है कि उमा भारती बुंदेलखंड, विंध्य, मालवा और ग्वालियर-चम्बल के कुछ हलकों में मौजूद कुर्मी, यादव, काछी, पाटीदार और लोधी वोटरों से उम्मीद लगाए बैठी हैं.हालाँकि वो कहती हैं कि उनका दल भाजपा के वोटों को कांग्रेस में जाने से रोकेगा.

जबकि कांग्रेस उन्हें भाजपा के वोटों का हिस्सेदार बताती है तो भाजपा का कहना है की पिछले चुनाव में भाजपा-कांग्रेस के वोटों का अन्तर काफ़ी बड़ा था और कुछ नकारात्मक वोटों का भाजश को चले जाना उनके लिए बेहतर है, कम से कम वह विपक्षी कांग्रेस के हिस्से तो नहीं आएँगे.

इन तर्कों से दूर वोटरों के एक वर्ग में उमा भारती की वह छवि घूम रही है जब उन्होंने अपने एक कार्यकर्ता को हाल में ही सरेआम कई तमाचे जड़ दिए थे.

उमा भारती ने टीकमगढ़ से अपना नामांकन दाखिल किया है लेकिन एक प्रश्नचिन्ह ज्यों का त्यों है - कहीं उमा भारती उत्तर प्रदेश और गुजरात की तरह आख़िरी वक्त में मैदान न छोड़ दें.

कार्यकर्ताओं की अनुपस्थिति और उम्मीदवारों के पास फंड की कमी का मसला तो है ही.इस बीच भाजपा नेताओं की खाली रैलियों की ख़बरें, उमा भारती की सभाओं में भीड़ और उनके एक भोपाल कार्यक्रम में 60 हज़ार लोगों के जुटने पर चर्चा और विश्लेषण जारी है.

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts

Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more