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हिंदुओं के प्रति साज़िश है 'हिंदू आतंकवाद'!

By ज़ुबैर अहमद
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नासिक में हर बारह साल बाद कुंभ का मेला आयोजित किया जाता है
आजकल सुर्ख़ियों में आए नासिक के निवासियों का मानना है कि 'हिंदू आतंकवाद' शब्द का प्रयोग वोट की राजनीति के लिए किया जा रहा है

आम दिनों में भी यहाँ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा सकती है.

आजकल भी रंग-बिरंगे कपड़े पहने साधु और साध्वियाँ यहाँ दिखते हैं. श्रद्धालुओं का एक रेला अपने सिर पर प्रसाद की टोकरियाँ उठाए ढोल-बाजे के साथ दर्शन के लिए जा रहा है.

मंदिरों में घंटियों और श्लोक पढ़ने की आवाजें यहाँ की फ़िज़ा में तैर रही हैं. यहाँ पर हिंदू धर्म की रूह को महसूस किया जा सकता है और देखा जा सकता है.

श्रद्धालुओं के चेहरे पर पसरी शांति के साथ-साथ अशांति भी देखी जा सकती है. इसका कारण जानने के लिए लोगों से बातचीत की कोशिश नाकाम हो जाती है.

अख़बारों की सुर्ख़ियाँ

यहाँ से कुछ ही किमी दूर नासिक की एक अदालत में करीब हर दिन हिंदू आतंकवाद की चर्चा होती है. अख़बार भी हिंदू आतंकवादी की गिरफ्तारी की सुर्खि़याँ लगाते हैं.

कुंभ मेला आयोजित करने वाली समिति के अध्यक्ष सतीश शंकर शुक्ल का कहना है कि हिंदू इस बात से नाराज़ है कि उनके धर्म को आतंकवाद से जोड़ा जा रहा है.

शुक्ल कहते हैं, "यह हिंदुओं के ख़िलाफ़ एक साज़िश है. जब मुसलमान पकड़े जाते थे तो सरकार कहती थी कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता है लेकिन साध्वी और पुरोहित जी की गिरफ़्तारी के बाद भगवा आतंकवाद और हिंदू आतंकवाद कहकर पूरे हिंदुत्व को बदनाम किया जा रहा है, जो ग़लत है".

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और भारतीय सेना के लेफ़्टिनेंट कर्नल पुरोहित उन दस लोगों में प्रमुख हैं, जिन्हें महाराष्ट्र की आतंकवाद निरोधक शाखा (एटीएस) ने 29 सिंतबर को मालेगाँव में हुए बम धमाके के सिलसिले में गिरफ़्तार किया है.

हिंदू इस बात से नाराज़ है कि उनके धर्म की आतंकवाद से जोड़ा जा रहा है
एटीएस ने अब तक इन लोगों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाख़िल नहीं की है लेकिन अदालत में वह कई बार कह चुकी है कि ये लोग मालेगाँव में हुए धमाके में शामिल थे.

इनकी गिरफ़्तारी के बाद मीडिया ने 'हिंदू आतंकवाद' और 'भगवा आतंकवाद' जैसे शब्दों का प्रयोग करना शुरू कर दिया. लेकिन हिंदू आतंकवाद नाम की कोई चीज है? अगर एटीएस से पूछा जाए तो जवाब होगा हाँ है. लेकिन अगर यही सवाल हिंदू धर्म नेताओं से किया जाए तो उत्तर होगा नहीं.

वोट पर है नज़र

हिंदू नेता इसे कांग्रेस सरकार की एक चाल मानते हैं. हिंदुओं को आतंकवाद से जोड़ने की जिससे लोकसभा चुनाव में अल्पसंख्यकों का वोट लिया जा सके.

नासिक ज़िले के शिवसेना प्रमुख दत्ता गायकवाड़ कहते हैं, "यह वोट की राजनीति हो रही है. अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को देखकर सरकार मुसलमानों को भड़का रही है उनका वोट लेना चाहती है".

मालेगाँव बम विस्फोट से पहले नाँदेड़ में हुए बम धमाके में भी हिंदू संगठनों का हाथ होने का शक था लेकिन पुलिस के पास कोई सबूत नहीं था. अब मालेगाँव धमाके के बाद पुलिस दावा कर रही है कि 'अभिनव भारत' नाम का संगठन का इस धमाके में हाथ है और जो दस लोग गिरफ़्तार हुए हैं वे इस संगठन के सदस्य हैं.

एटीएस का कहना है कि मालेगाँव बम धमाके की साज़िश नासिक की एक हिंदू संस्था भोंसला मिलिटरी अकादमी में रची गई थी.

पुलिस के दावे की बुनियाद यह है कि इस संस्थान के कर्नल रायकर, जो भारतीय सेना से छह महीने पहले रिटायर हुए हैं और सेना के लेफ़्टिनेंट कर्नल पुरोहित सेना की ख़ुफ़िया शाखा में काम करते थे. दोनों अच्छे दोस्त भी हैं.

पुलिस के मुताबिक कर्नल (रिटायर) रायकर ने लेफ़्टिनेंट कर्नल पुरोहित को उस मिटिंग की इजाज़त दी थी जिसमें धमाकों की योजना बनाई गई.

नासिक के भोंसला मिलिटरी अकादमी की स्थापना 1937 में की गई थी

भोंसला मिलिटरी अकादमी की स्थापना 1937 में हुई थी. इसमें 10-16 साल के छात्रों को सेना की तरह ट्रेनिंग दी जाती है. यहाँ छात्रों को 'अच्छा हिंदू' और 'अच्छा भारतीय' बनाने पर जोर दिया जाता है.

इस संस्थान के सचिव दिवाकर कुलकर्णी कहते है, "मैंने ही अभिनव भारत को यहाँ बैठक करने की इजजाज़त दी थी लेकिन मुझे इस संस्था के इतिहास का पता नहीं था".

वह कहते हैं कि हमारे संस्थान की बदनामी सिर्फ़ इसलिए हो रही है कि अभिनव भारत जैसी नामी संस्था को दो घंटे के लिए एक कमरा किराए पर दिया था.

वह कहते हैं, "उस बैठक में क्या-क्या हुआ उससे हमारा कुछ भी लेना देना नहीं है".

लेकिन पुलिस का दावा है कि कर्नल रायकर, जिनसे पुलिस ने दो बार पूछताछ की है. बैठक में मौज़ूद थे. कुलकर्णी कहते हैं वह उस सभा में केवल कुछ समय के लिए गए थे वह भी चाय-पानी के बारे में पूछने के लिए.

एटीएस ने कर्नल रायकर के अलावा इस संस्था के एक और पदाधिकारी से पूछताछ की है. इन दोनों लोगों ने संस्था छोड़ दी है. आखिर पुलिस ने संस्था के इन दो ही पदाधिकारियों से ही पूछताछ क्यों की.

इस सवाल पर कुलकर्णी का जवाब था कि एटीएस ने उनसे पूछताछ इसलिए की कि उन लोगों ने अपने कंप्यूटर पर अभिनव भारत का उद्देश्य डाउनलोड किया था. उन्हें नहीं मालूम था कि अभिनव भारत का इरादा क्या है.

एटीएस ने अभी भोंसला मिलिटरी अकादमी को क्लीन चिट नहीं दी है. उसकी जाँच पड़ताल जारी है.

नासिक के आम हिंदुओं का मानना है कि 'हिंदू आतंकवाद' शब्द मीडिया की पैदाइश है. कुछ लोग यह ज़रूर कहते हैं कि हिंदुओं के साथ बढ़ते अत्याचार के कारण अगर कुछ हिंदू उत्तेजित होकर धमाके करने लगें तो वे उन्हें रोक नहीं सकते हैं. इस वजह से हिंदू धर्म को आतंकवाद से जोड़ना ठीक नहीं होगा.

भेदभाव

कुंभ मेला समिति के अध्यक्ष सतीश कुमार शुक्ल ने इस सोच की तरफ़दारी करते हुए कहा, "पूरे देश में अगर देखा जाए तो हिंदुओं के ऊपर बहुत अत्याचार हो रहा है. अगर शंकराचार्य कुछ कहते हैं तो उन पर तुरंत हमला होता है. हज के लिए भारी अनुदान दिया जाता है लेकिन अमरनाथ के लिए ज़मीन नहीं दी जाती है".

यह वोट की राजनीति हो रही है. अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को देखकर सरकार मुसलमानों को भड़का रही है उनका वोट लेना चाहती है
हिंदुओं को पूरा विश्वास है कि साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ़्टिनेंट कर्नल पुरोहित आतंकवादी नहीं हो सकते हैं. शिव सेना और भारतीय जनता पार्टी ने तो साध्वी को आदलती कार्यवाही में पूरा सहयोग देने का वादा किया है.

साध्वी की पैरवी कर रहे वकीलों का नेतृत्व भी भाजपा के क़ानूनी प्रकोष्ठ के एक वरिष्ठ वकील कर रहे हैं.

साध्वी के परिवार वाले भी उन्हें बेकसूर मानते हैं. उसकी सबसे छोटी बहन प्रतिभा शाह कहती हैं, हमारे पूरे परिवार को विश्वास है कि उनकी छवि वैसे ही साफ़ है जैसा की उनके मानने वाले उन्हें मानते हैं.

उन्होंने एक साल पहले संन्यास लिया था तबसे वह और ज़्यादा धर्म के निकट चली गईं. वह कभी किसी को नुक़सान पहुँचाने के बारे में सोच भी नहीं सकती हैं. किसी एक धर्म की बदनाम करने के लिए उन्हें फंसाया जा रहा है.

'हिंदू आतंकवाद', ये दो शब्द 29 सिंतबर को मालेगाँव में हुए बम धमाके से पहले इस अंदाज में इस्तेमाल नहीं किए जाते थे. लेकिन 10 हिंदुओं की गिरफ़्तारी के बाद ऐसा लगता है कि इन शब्दों का इस्तेमाल नहीं रुकेगा.

ये शब्द सुर्खियों से ज़्यादा गहरे हैं या नहीं, इसका पता तो अदालत के फ़ैसले के बाद ही चल पाएगा.

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