• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

अफ़ग़ान शरणार्थियों की वापसी के प्रयास

By Staff
|
तालेबान के पतन के बाद अफ़ग़ानी शरणार्थियों पर वापसी का दबाब बढ़ता जा रहा है.
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी अफ़गानिस्तान के शरणार्थियों की वापसी के प्रयासों के तहत अफ़गान सरकार के साथ एक सम्मेलन आयोजित कर रही है.

शरणार्थियों की वापसी के लिए संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थियों के मामलों से जुड़ी संस्था यूएनएचसीआर अफ़ग़ान सरकार के विदेश मंत्रालय के साथ मिल कर काम करेगी.

एक अनुमान के अनुसार यूएनएचसीआर के प्रयास से वर्ष 2001 में तालेबान सरकार के पतन के बाद 50 लाख अफ़ग़ानी शरणार्थी देश वापस आए हैं लेकिन अब भी 30 लाख शरणार्थी पाकिस्तान और ईरान में हैं.

वापसी का दबाब

तालेबान के जाने के बाद अफ़ग़ान शरणार्थियों पर मेज़बान देशों की तरफ़ से वापसी का दबाब लगातार बढ़ता ही जा रहा है.

कुछ शरणार्थी असुरक्षा कारणों से अपनी पुरानी जगह पर जाने से असमर्थ हैं. उन्हें उन इलाक़ों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है जहाँ कुछ भी नहीं है. उनके पास नौकरी नहीं है इसलिए स्थिति बहुत चुनौतीपूर्ण है."
पचास लाख अफ़ग़ान शरणार्थीयों की वापसी का अर्थ अफ़ग़ानिस्तान की आबादी का 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा हुआ.

यूएनएचसीआर के प्रमुख एनटोनियों गूटेरस का कहना है, "कुछ शरणर्थी असुरक्षा कारणों से अपनी पुरानी जगह पर जाने से असमर्थ है. उन्हें उन इलाक़ों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है जहाँ कुछ भी नहीं है. उनके पास नौकरी नहीं है इसलिए स्थिति बहुत चुनौतीपूर्ण है."

शाह बीबी का ख़ानदान पाँच महीने पहले अफ़ग़ानिस्तान वापस आया है. एक शिविर में वो बहुत ख़राब परिस्थिति में रह रहे हैं जबकि सर्दी सर पर है.

वो कहती हैं, "मैं समझती थी कि हालात अच्छे होंगे, चिकित्सा सुविधाएँ होगीं, लेकिन इस तरह का कुछ भी नहीं दिख रहा है. हम लोग ज़मीन पर रह रहे हैं और खाना नहीं है."

यूएनएचसीआर का कहना है कि वापस आए 30 हज़ार से अधिक लोग टेंटों में रह रहे हैं.

वापस आए शरणार्थियों को देश के अंदर उन लोगों से नौकरी और संसाधनों के लिए मुक़ाबला करना पड़ रहा है जो ग़रीबी, असुरक्षा और फ़सल बर्बाद होने की वजह से विस्थापित होने पर मजबूर हुए थे.

कुछ विस्थापित हेरात प्रांत में रहते हैं. एक व्यक्ति ने बीबीसी को बताया, " ग़रीबी की वजह से लग रहा है जैसे हम पुराने ज़माने में रह रहे हैं. लड़ाई, मुसीबत, विस्थापन और सर्दी से हमारा मुक़ाबला है."

वो कहते हैं, "अगर आप के पास कुछ भी नहीं है तो आप को इलाक़ा छोड़ना पड़ेगा, मेरे सात महीने के बेटे की मौत हो गई है. मैं ख़ुद भी बुरी तरह से बीमार हूँ. "

गुटेरस का कहना है, "चुनौती ये है कि कैसे अफ़ग़ानी शरणार्थियों को उनके देश में सामान्य स्थिति में रखा जाए."

अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो अफ़ग़ानिस्तान से बाहर बड़े पैमाने पर विस्थापन का जोखिम है.

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts

Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more